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मराठा आरक्षण आंदोलन: मनोज जरांगे का एलान- 15 सितंबर को अकेले जाऊंगा मुंबई; आजाद मैदान में प्रदर्शन पर अड़े
Mon, 14 Sep 2026 03:34 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, जालना
पीटीआई, जालना
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Mon, 14 Sep 2026 03:34 PM IST
सार
मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने मुंबई पुलिस से भूख हड़ताल की अनुमति न मिलने के बाद अपने आंदोलन की नई रणनीति घोषित की है। उन्होंने कहा कि वह सीमित लोगों के साथ 15 सितंबर को राज्य की राजधानी के लिए रवाना होंगे और आजाद मैदान पहुंचकर विरोध दर्ज कराएंगे। आइए जानते हैं मनोज जरांगे ने सरकार पर क्या-क्या आरोप लगाए...
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मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
मुंबई में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की अनुमति नहीं मिलने के बाद मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने सोमवार को बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि वह 15 सितंबर को सुबह 11 बजे अकेले मुंबई के लिए रवाना होंगे और आजाद मैदान में प्रदर्शन करेंगे।
जालना जिले के अंतरवाली साराटी गांव में अनिश्चितकालीन अनशन के 16वें दिन समर्थकों को संबोधित करते हुए जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर प्रदर्शन रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार मराठा समुदाय की ताकत से डरकर उन्हें मुंबई जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
मुंबई पुलिस ने क्यों नहीं दी जरांगे को प्रदर्शन की इजाजत?
मुंबई पुलिस ने रविवार को गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा संबंधी संभावित चिंताओं का हवाला देते हुए जरांगे को 19 सितंबर से महानगर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने उनके दल की औपचारिक अनुमति याचिका भी खारिज कर दी। इसके लिए सार्वजनिक बैठक, प्रदर्शन और जुलूस नियमों के संभावित उल्लंघन तथा पिछले प्रदर्शनों के दौरान आयोजन स्थल से जुड़ी शर्तों का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने का हवाला दिया गया।
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जरांगे ने कहा, 'मराठा समुदाय की ताकत से डरकर सरकार ने मुंबई जाने की अनुमति नहीं दी है। सरकार के इस फैसले के जवाब में मैं 15 सितंबर को सुबह 11 बजे अकेले मुंबई के लिए निकलूंगा।' उन्होंने मराठा समुदाय से अपील की कि वह तुरंत मुंबई न पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंगलवार सुबह शुरू होने वाले तय मार्ग पर उनके साथ केवल 10 लोग और दो एंबुलेंस रहेंगी।
फडणवीस सरकार पर जरांगे ने लगाए क्या आरोप?
जरांगे ने कहा, 'फडणवीस के लोग मराठा रैली के दौरान गड़बड़ी पैदा करेंगे और इसका दोष मराठा समुदाय पर डाल देंगे। इसलिए मैंने अकेले जाने का फैसला किया है। अब क्या सरकार मेरे अकेले मार्च को भी अनुमति नहीं देगी?'
पानी, सलाइन और चिकित्सा उपचार लेने से इनकार करने के बाद बिगड़ती अपनी हालत के बावजूद जरांगे ने कहा कि वह अपनी मांगों पर अडिग रहेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने संसाधन बचाने और गांवों में शांतिपूर्वक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुंबई में आंदोलन की जिम्मेदारी वह खुद संभालेंगे।
छत्रपति शिवाजी महाराज का जिक्र कर क्या बोले मनोज जरांगे?
उन्होंने कहा, 'आगे का रास्ता बाधाओं से भरा है, लेकिन मैं समुदाय के लिए संघर्ष से पीछे नहीं हटूंगा।' खुद को छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी बताते हुए जरांगे ने कहा कि वह आखिरी सांस तक लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह यह संदेश देना चाहते हैं कि वह 'मर गए, लेकिन झुके नहीं'।
जरांगे की प्रमुख मांगों में सरकार की ओर से ऐसा सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी करना शामिल है, जिससे पुराने रिकॉर्ड और राजपत्र दस्तावेजों के आधार पर मराठा समुदाय के लोग अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में कुंबी समुदाय को मिलने वाले आरक्षण का दावा कर सकें। ओबीसी समूहों ने इस मांग का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे उन्हें मिलने वाले लाभों में उनका हिस्सा प्रभावित होगा।
जरांगे ने फडणवीस सरकार को दी क्या चेतावनी?
इस बीच, जरांगे ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत के दरवाजे अभी भी खुले हैं। उन्होंने कहा, 'हम किसी भी खुले मैदान में सरकार के साथ चर्चा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हम खोखले आश्वासन नहीं चाहते, हम सीधे लागू किए जाने की मांग करते हैं।' उन्होंने राजनीतिक नेताओं को चेतावनी भी दी कि भविष्य के चुनावों में मराठा समुदाय उनके भाग्य का फैसला करेगा।
पिछले साल 29 अगस्त को जरांगे ने मराठा आरक्षण की मांग दोहराते हुए मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। इस आंदोलन के कारण शहर के कुछ हिस्सों में अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई थी। बाद में सरकार की ओर से उनकी कुछ मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।
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जालना जिले के अंतरवाली साराटी गांव में अनिश्चितकालीन अनशन के 16वें दिन समर्थकों को संबोधित करते हुए जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर प्रदर्शन रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार मराठा समुदाय की ताकत से डरकर उन्हें मुंबई जाने की अनुमति नहीं दे रही है।
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मुंबई पुलिस ने क्यों नहीं दी जरांगे को प्रदर्शन की इजाजत?
मुंबई पुलिस ने रविवार को गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा संबंधी संभावित चिंताओं का हवाला देते हुए जरांगे को 19 सितंबर से महानगर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस ने उनके दल की औपचारिक अनुमति याचिका भी खारिज कर दी। इसके लिए सार्वजनिक बैठक, प्रदर्शन और जुलूस नियमों के संभावित उल्लंघन तथा पिछले प्रदर्शनों के दौरान आयोजन स्थल से जुड़ी शर्तों का कथित रूप से पालन नहीं किए जाने का हवाला दिया गया।
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जरांगे ने कहा, 'मराठा समुदाय की ताकत से डरकर सरकार ने मुंबई जाने की अनुमति नहीं दी है। सरकार के इस फैसले के जवाब में मैं 15 सितंबर को सुबह 11 बजे अकेले मुंबई के लिए निकलूंगा।' उन्होंने मराठा समुदाय से अपील की कि वह तुरंत मुंबई न पहुंचे। उन्होंने कहा कि मंगलवार सुबह शुरू होने वाले तय मार्ग पर उनके साथ केवल 10 लोग और दो एंबुलेंस रहेंगी।
फडणवीस सरकार पर जरांगे ने लगाए क्या आरोप?
जरांगे ने कहा, 'फडणवीस के लोग मराठा रैली के दौरान गड़बड़ी पैदा करेंगे और इसका दोष मराठा समुदाय पर डाल देंगे। इसलिए मैंने अकेले जाने का फैसला किया है। अब क्या सरकार मेरे अकेले मार्च को भी अनुमति नहीं देगी?'
पानी, सलाइन और चिकित्सा उपचार लेने से इनकार करने के बाद बिगड़ती अपनी हालत के बावजूद जरांगे ने कहा कि वह अपनी मांगों पर अडिग रहेंगे। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने संसाधन बचाने और गांवों में शांतिपूर्वक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि मुंबई में आंदोलन की जिम्मेदारी वह खुद संभालेंगे।
छत्रपति शिवाजी महाराज का जिक्र कर क्या बोले मनोज जरांगे?
उन्होंने कहा, 'आगे का रास्ता बाधाओं से भरा है, लेकिन मैं समुदाय के लिए संघर्ष से पीछे नहीं हटूंगा।' खुद को छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी बताते हुए जरांगे ने कहा कि वह आखिरी सांस तक लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वह यह संदेश देना चाहते हैं कि वह 'मर गए, लेकिन झुके नहीं'।
जरांगे की प्रमुख मांगों में सरकार की ओर से ऐसा सरकारी प्रस्ताव (जीआर) जारी करना शामिल है, जिससे पुराने रिकॉर्ड और राजपत्र दस्तावेजों के आधार पर मराठा समुदाय के लोग अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी में कुंबी समुदाय को मिलने वाले आरक्षण का दावा कर सकें। ओबीसी समूहों ने इस मांग का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे उन्हें मिलने वाले लाभों में उनका हिस्सा प्रभावित होगा।
जरांगे ने फडणवीस सरकार को दी क्या चेतावनी?
इस बीच, जरांगे ने कहा कि सरकार के साथ बातचीत के दरवाजे अभी भी खुले हैं। उन्होंने कहा, 'हम किसी भी खुले मैदान में सरकार के साथ चर्चा करने के लिए तैयार हैं। लेकिन हम खोखले आश्वासन नहीं चाहते, हम सीधे लागू किए जाने की मांग करते हैं।' उन्होंने राजनीतिक नेताओं को चेतावनी भी दी कि भविष्य के चुनावों में मराठा समुदाय उनके भाग्य का फैसला करेगा।
पिछले साल 29 अगस्त को जरांगे ने मराठा आरक्षण की मांग दोहराते हुए मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। इस आंदोलन के कारण शहर के कुछ हिस्सों में अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई थी। बाद में सरकार की ओर से उनकी कुछ मांगें स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया था।