'इससे बड़ा अपमान कुछ नहीं': संजय राउत ने शिंदे को लिया आड़े हाथ, बोले- मेयर पद के लिए उनकी की कोई हैसियत नहीं
एक तरफ जहां मुंबई में बीएमसी के मेयर को लेकर रस्साकशी जारी है। वहीं दूसरी ओर अब शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे पर जोरदार हमला किया है। उन्होंने कहा कि मेयर बनना है तो दिल्ली जाकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को मनाना होगा।
विस्तार
महाराष्ट्र में बीएमसी समेत 29 निगमों पर हुए चुनाव के बाद नतीजों को लेकर राज्य की सियासत में गर्माहट तेज है। ऐसे में अब शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने बुधवार को मुंबई मेयर पद को लेकर चल रही अटकलों के बीच महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर जोरदार हमला बोला। राउत ने कहा कि अगर शिंदे को मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) का मेयर चाहिए, तो उन्हें इसके लिए भाजपा के वरिष्ठ नेताओं को मनाना पड़ेगा।
बता दें कि बीएमसी चुनाव में भाजपा-शिवसेना (महायुति) ने बड़ी जीत हासिल की है, लेकिन अब तक यह तय नहीं हो पाया है कि मुंबई का मेयर किस पार्टी का होगा। एक तरफ भाजपा 227 में से 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और मेयर पद पर दावा ठोक रही है, जबकि एकनाथ शिंदे शिवसेना की पुरानी परंपरा को बनाए रखना चाहते हैं।
दिल्ली जाकर गुजराती नेताओं के पैर छूने पड़ते हैं- राउत
मुंबई में पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजय राउत ने कहा कि मेयर पद के लिए शिंदे की कोई हैसियत नहीं है। इससे बड़ा अपमान क्या होगा कि जो खुद को शिवसेना कहते हैं, बालासाहेब ठाकरे की तस्वीर लगाते हैं और फिर मुंबई के मेयर पद के लिए दिल्ली जाकर गुजराती नेताओं के पैरों में बैठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मेयर पद पर फैसला इसलिए अटका हुआ है क्योंकि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस वक्त स्विट्जरलैंड के दावोस में हैं, जहां वे वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में हिस्सा ले रहे हैं।
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दावोस दौरे पर भी पूछे तीखे सवाल
इस दौरान राउत ने मुख्यमंत्री फडणवीस के दावोस दौरे पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि दावोस में जिन भारतीय कंपनियों से समझौते किए जा रहे हैं, वे काम तो मुंबई में बैठकर भी हो सकते थे। उन्होंने मांग की कि दावोस जाने वाले नेताओं के यात्रा खर्च का ब्योरा जनता के सामने रखा जाए। राउत ने तंज कसते हुए कहा कि देशभर के मुख्यमंत्री दावोस में पिकनिक मना रहे हैं। टैक्सपेयर्स के पैसे से वहां जाकर भारतीय उद्योगपतियों से समझौते हो रहे हैं। अगर निवेश और रोजगार के आंकड़े सही हैं तो हम उसका स्वागत करते हैं, लेकिन खर्च भी बताना चाहिए।
कल्याण-डोंबिवली में यूबीटी गुट की मुश्किलें बढ़ीं
इस बीच कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिवसेना (यूबीटी) की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। जब राउत से पूछा गया कि यूबीटी गुट के दो पार्षद संपर्क में क्यों नहीं हैं, तो उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और अयोग्यता की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई पूरी होने के बाद वे जहां चाहें जा सकते हैं।
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शिंदे को मनसे का समर्थन
गौरतलब है कि कल्याण-डोंबिवली में स्थिति तब और बदली जब राज ठाकरे की मनसे ने महायुति को समर्थन दे दिया। यहां 122 सीटों वाली नगर निगम में महायुति ने 103 सीटें जीती हैं, भाजपा को 50 और शिवसेना (शिंदे गुट) को 53 सीटें मिली हैं। यूबीटी गुट को 11 और मनसे को 5 सीटें मिलीं। बीएमसी चुनाव में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन वे बीजेपी-शिवसेना महायुति को रोक नहीं सके। महायुति ने 118 सीटें जीतकर बहुमत (114) का आंकड़ा पार कर लिया। शिवसेना (यूबीटी) को 65 और मनसे को 6 सीटें मिलीं।
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