{"_id":"6a3533fa50747d040d0c748a","slug":"nia-fugitive-since-1999-mohammed-ali-obtained-government-id-through-fraud-2026-06-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"NIA: आंध्र प्रदेश विस्फोटक बरामदगी केस में अली ने धोखाधड़ी से हासिल की सरकारी आईडी, आरोपी 1999 से था फरार","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
NIA: आंध्र प्रदेश विस्फोटक बरामदगी केस में अली ने धोखाधड़ी से हासिल की सरकारी आईडी, आरोपी 1999 से था फरार
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Fri, 19 Jun 2026 05:50 PM IST
विज्ञापन
NIA
- फोटो : सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
आंध्र प्रदेश विस्फोटक बरामदगी केस में मोहम्मद अली ने धोखाधड़ी से सरकारी पहचान पत्र हासिल किया था। वह 1999 के बम धमाके के मामले में तमिलनाडु से फरार हो गया था। एनआईए ने शुक्रवार को आंध्र प्रदेश मामले में दूसरे आरोपी मोहम्मद अली के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। यह मामला आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल के लिए विस्फोटक बरामद होने से जुड़ा है।
विजयवाड़ा में एनआईए की स्पेशल कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में, आरोपी शेख मंसूर उर्फ मोहम्मद अली उर्फ विजयकुमार का नाम यूए (पी) एक्ट, 1967 और बीएनएस, 2023 की संबंधित धाराओं के तहत शामिल किया गया है। मोहम्मद अली, पहले चार्जशीट किए गए आरोपी शेख अमानुल्ला उर्फ अबू बकर सिद्दीक का करीबी सहयोगी और साजिश में शामिल साथी था। उसे इस मामले में दिसंबर 2025 में गिरफ्तार किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन
इस मामले में अब तक शेख अमानुल्ला समेत कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। एनआईए ने फरवरी 2026 में शेख अमानुल्ला के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। शेख अमानुल्ला के घर से विस्फोटक और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी।
गिरफ्तारी के समय, मोहम्मद अली फर्जी पहचान के साथ रह रहा था। वह 1999 के बम धमाके के मामले में तमिलनाडु से फरार हो गया था। वह आंध्र प्रदेश के अन्नामय्या जिले के रायचोटी शहर में शेख मंसूर के फर्जी नाम से रह रहा था। इसके लिए उसने धोखाधड़ी से हासिल किए गए सरकारी पहचान पत्र का इस्तेमाल किया था।
एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, शेख अमानुल्ला ने मोहम्मद अली को कट्टरपंथी बनाया। बाद में उसे अपने संगठन में भर्ती किया। इतना ही नहीं, उसे बम बनाने की ट्रेनिंग दी। मोहम्मद अली ने अमानुल्ला की मदद से विस्फोटक सामग्री को रायाचोटी में एक ठिकाने तक पहुंचाया था। एनआईए की जांच से पता चला है कि इन दोनों ने लोगों के बीच दहशत फैलाने और भारत में शरिया कानून लागू करने के अपने नापाक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक खास समुदाय के नेताओं की टारगेटेड हत्याओं की साजिश रची थी।