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'नोआखली, सिलहट वापस लेने का समय आया': दुबे ने नेहरू पर लगाए आरोप; पूछा- क्यों पाकिस्तान को सौंपे इलाके?
Fri, 06 Nov 2026 03:23 PM IST
निर्मल कांत
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 06 Nov 2026 03:23 PM IST
सार
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पीओके के साथ नोआखली, सिलहट और चटगांव को वापस लेने की बात कही है। उन्होंने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू पर इन क्षेत्रों को जबरन पाकिस्तान को सौंपने का आरोप लगाया। त्रिपुरा की रियासत और विभाजन के इतिहास को लेकर उन्होंने क्या दावे किए? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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निशिकांत दुबे, सांसद, भाजपा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने शुक्रवार को कहा कि अब भारत के लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के साथ-साथ नोआखली, चटगांव बंदरगाह और सिलहट के क्षेत्रों को भी वापस लेने का समय आ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इन क्षेत्रों को जबरन सौंप दिया था। दुबे ने कहा कि ये तीनों क्षेत्र टिपरा रियासत का हिस्सा थे।
उन्होंने कहा, अब सिर्फ पाकिस्तान से पीओके को वापस लेने का ही समय नहीं आया है। उन क्षेत्रों को भी वापस लेने का समय आ गया है, जिन्हें नेहरू जी ने जबरन सौंप दिया था। चाहे वह नोआखली हो, चटगांव बंदरगाह हो या सिलहट। भाजपा नेता ने दावा किया कि उस समय त्रिपुरा के राजा वीर विक्रम सिंह ने अपनी जमीन को लेकर बातचीत करने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू से सवाल किया था।
उन्होंने कहा, नोआखली, सिलहट और चटगांव बंदरगाह, ये तीनों क्षेत्र टिपरा रियासत का हिस्सा थे। पहले त्रिपुरा को टिपरा के नाम से जाना जाता था। इसके राजा वीर विक्रम सिंह लगातार नेहरू से लड़ रहे थे। वह सवाल कर रहे थे कि नेहरू उनके क्षेत्र को लेकर बातचीत कैसे कर सकते हैं। वह पूछते थे कि आप नोआखली को पाकिस्तान को कैसे सौंप सकते हैं? आप सिलहट में जनमत संग्रह कैसे करा सकते हैं? आप चटगांव में जनमत संग्रह कैसे करा सकते हैं? यह मेरा राज्य है। मैं फैसला करूंगा कि यह भारत का हिस्सा रहेगा, पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा या एक स्वतंत्र देश बनेगा।
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दुबे ने आगे कहा, सरदार पटेल ने सेना भेजी और अक्तूबर 1948 में त्रिपुरा भारत का हिस्सा बन गया। महारानी कंचन प्रभा ने अक्तूबर 1948 में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद त्रिपुरा भारत का हिस्सा बन गया।
नेहरू पर क्या आरोप लगाए?
दुबे ने आरोप लगाया कि पंडित नेहरू ने 1946 में नोआखली में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा पर ध्यान देने के बजाय मुस्लिम लीग को अपनी सरकार में शामिल करने को प्राथमिकता दी थी। उन्होंने दावा किया कि उस नरसंहार में करीब 10 हजार हिंदू मारे गए थे।
भाजपा सांसद ने कहा, नेहरू जी प्रधानमंत्री बनने के लिए बेचैन थे। भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ, लेकिन वह 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री नहीं बने थे। वह 2 सितंबर 1946 को प्रधानमंत्री बने थे। उनके प्रधानमंत्री बनते ही मुस्लिम लीग ने सीधी कार्रवाई शुरू कर दी।
उन्होंने आगे कहा, 15 अक्तूबर 1946 को हिंदू बहुल इलाके नोआखली में हिंदुओं का बहुत बड़ा नरसंहार हुआ। एक ही दिन में करीब 10 हजार हिंदू मारे गए। लेकिन वह प्रधानमंत्री के तौर पर वहां नहीं गए। उन्हें इस बात की चिंता बनी रही कि मुस्लिम लीग उनकी सरकार का हिस्सा कैसे बन सकती है।
पूर्वोत्तर के विकास से चटगांव बंदरगाह का क्या संबंध बताया?
दुबे ने आगे कहा कि चटगांव बंदरगाह के हाथ से निकल जाने के कारण पूरे पूर्वोत्तर का विकास रुक गया। उन्होंने कहा, चटगांव बंदरगाह के चले जाने की वजह से ही पूरे पूर्वोत्तर का विकास रुक गया।
ये भी पढ़ें: गोकुल डेयरी पर सियासी घमासान: राज ठाकरे ने भाजपा को घेरा; पांच निदेशक नियुक्त करने पर क्यों उठाए सवाल?
उन्होंने कहा, अगर आज पूर्वोत्तर पिछड़ा हुआ दिखाई देता है, अगर उसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है, अगर हम उसकी खदानों, खनिजों और गैस का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं और अगर यह क्षेत्र अब भी खुद को बाकी हिस्सों से कटा हुआ महसूस करता है, तो इसकी एकमात्र वजह यह है कि अब हमारे पास वह बंदरगाह नहीं है। अब चटगांव, नोआखली और सिलहट को भी वापस लेने का समय आ गया है।
बहरुल इस्लाम को लेकर क्या दावा किया?
दुबे ने कहा कि सिलहट में जनमत संग्रह कराने वाले व्यक्ति बहरुल इस्लाम को कांग्रेस ने राज्यसभा सदस्य बनाया था। उन्होंने कहा, नेहरू जी किसी भी तरह प्रधानमंत्री बनना चाहते थे। जब त्रिपुरा के राजा या महारानी ने 1948 में यह फैसला किया कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं और 1947 से 1948 के बीच त्रिपुरा में एक साल तक संघर्ष चला, तो आप उसके क्षेत्रों को पाकिस्तान को कैसे सौंप सकते थे? इनमें चटगांव, नोआखली और सिलहट जैसे हिंदू बहुल इलाके भी शामिल थे, जो अब बांग्लादेश में हैं। आपको यह अधिकार किसने दिया?
दुबे ने आगे कहा, जिस व्यक्ति ने सिलहट में जनमत संग्रह कराया था, क्या आप बहरुल इस्लाम को जानते हैं? कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया था। राज्यसभा से जाने के बाद उन्हें हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त होने के बाद कांग्रेस ने उन्हें फिर से राज्यसभा सदस्य बना दिया।
दुबे ने दावा किया कि बहरुल इस्लाम मुस्लिम लीग की रेड आर्मी के सदस्य थे। उनके मुताबिक, यह संगठन नोआखली नरसंहार में शामिल था। उसने चटगांव को हासिल करने और सिलहट में जनमत संग्रह कराने में भी बड़ी भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा, अब इतिहास को सुधारने का समय आ गया है। जिस तरह पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर पाकिस्तान के नियंत्रण में है और उसे वापस लेने का समय आ गया है, उसी तरह पूर्वोत्तर में चटगांव बंदरगाह, सिलहट और नोआखली को भी वापस लेने का समय आ गया है।
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उन्होंने कहा, अब सिर्फ पाकिस्तान से पीओके को वापस लेने का ही समय नहीं आया है। उन क्षेत्रों को भी वापस लेने का समय आ गया है, जिन्हें नेहरू जी ने जबरन सौंप दिया था। चाहे वह नोआखली हो, चटगांव बंदरगाह हो या सिलहट। भाजपा नेता ने दावा किया कि उस समय त्रिपुरा के राजा वीर विक्रम सिंह ने अपनी जमीन को लेकर बातचीत करने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू से सवाल किया था।
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उन्होंने कहा, नोआखली, सिलहट और चटगांव बंदरगाह, ये तीनों क्षेत्र टिपरा रियासत का हिस्सा थे। पहले त्रिपुरा को टिपरा के नाम से जाना जाता था। इसके राजा वीर विक्रम सिंह लगातार नेहरू से लड़ रहे थे। वह सवाल कर रहे थे कि नेहरू उनके क्षेत्र को लेकर बातचीत कैसे कर सकते हैं। वह पूछते थे कि आप नोआखली को पाकिस्तान को कैसे सौंप सकते हैं? आप सिलहट में जनमत संग्रह कैसे करा सकते हैं? आप चटगांव में जनमत संग्रह कैसे करा सकते हैं? यह मेरा राज्य है। मैं फैसला करूंगा कि यह भारत का हिस्सा रहेगा, पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा या एक स्वतंत्र देश बनेगा।
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दुबे ने आगे कहा, सरदार पटेल ने सेना भेजी और अक्तूबर 1948 में त्रिपुरा भारत का हिस्सा बन गया। महारानी कंचन प्रभा ने अक्तूबर 1948 में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद त्रिपुरा भारत का हिस्सा बन गया।
नेहरू पर क्या आरोप लगाए?
दुबे ने आरोप लगाया कि पंडित नेहरू ने 1946 में नोआखली में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसा पर ध्यान देने के बजाय मुस्लिम लीग को अपनी सरकार में शामिल करने को प्राथमिकता दी थी। उन्होंने दावा किया कि उस नरसंहार में करीब 10 हजार हिंदू मारे गए थे।
भाजपा सांसद ने कहा, नेहरू जी प्रधानमंत्री बनने के लिए बेचैन थे। भारत 1947 में स्वतंत्र हुआ, लेकिन वह 15 अगस्त 1947 को प्रधानमंत्री नहीं बने थे। वह 2 सितंबर 1946 को प्रधानमंत्री बने थे। उनके प्रधानमंत्री बनते ही मुस्लिम लीग ने सीधी कार्रवाई शुरू कर दी।
उन्होंने आगे कहा, 15 अक्तूबर 1946 को हिंदू बहुल इलाके नोआखली में हिंदुओं का बहुत बड़ा नरसंहार हुआ। एक ही दिन में करीब 10 हजार हिंदू मारे गए। लेकिन वह प्रधानमंत्री के तौर पर वहां नहीं गए। उन्हें इस बात की चिंता बनी रही कि मुस्लिम लीग उनकी सरकार का हिस्सा कैसे बन सकती है।
पूर्वोत्तर के विकास से चटगांव बंदरगाह का क्या संबंध बताया?
दुबे ने आगे कहा कि चटगांव बंदरगाह के हाथ से निकल जाने के कारण पूरे पूर्वोत्तर का विकास रुक गया। उन्होंने कहा, चटगांव बंदरगाह के चले जाने की वजह से ही पूरे पूर्वोत्तर का विकास रुक गया।
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उन्होंने कहा, अगर आज पूर्वोत्तर पिछड़ा हुआ दिखाई देता है, अगर उसे समस्याओं का सामना करना पड़ता है, अगर हम उसकी खदानों, खनिजों और गैस का पूरा इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं और अगर यह क्षेत्र अब भी खुद को बाकी हिस्सों से कटा हुआ महसूस करता है, तो इसकी एकमात्र वजह यह है कि अब हमारे पास वह बंदरगाह नहीं है। अब चटगांव, नोआखली और सिलहट को भी वापस लेने का समय आ गया है।
बहरुल इस्लाम को लेकर क्या दावा किया?
दुबे ने कहा कि सिलहट में जनमत संग्रह कराने वाले व्यक्ति बहरुल इस्लाम को कांग्रेस ने राज्यसभा सदस्य बनाया था। उन्होंने कहा, नेहरू जी किसी भी तरह प्रधानमंत्री बनना चाहते थे। जब त्रिपुरा के राजा या महारानी ने 1948 में यह फैसला किया कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं और 1947 से 1948 के बीच त्रिपुरा में एक साल तक संघर्ष चला, तो आप उसके क्षेत्रों को पाकिस्तान को कैसे सौंप सकते थे? इनमें चटगांव, नोआखली और सिलहट जैसे हिंदू बहुल इलाके भी शामिल थे, जो अब बांग्लादेश में हैं। आपको यह अधिकार किसने दिया?
दुबे ने आगे कहा, जिस व्यक्ति ने सिलहट में जनमत संग्रह कराया था, क्या आप बहरुल इस्लाम को जानते हैं? कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा सदस्य बनाया था। राज्यसभा से जाने के बाद उन्हें हाईकोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। हाईकोर्ट के न्यायाधीश पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त होने के बाद कांग्रेस ने उन्हें फिर से राज्यसभा सदस्य बना दिया।
दुबे ने दावा किया कि बहरुल इस्लाम मुस्लिम लीग की रेड आर्मी के सदस्य थे। उनके मुताबिक, यह संगठन नोआखली नरसंहार में शामिल था। उसने चटगांव को हासिल करने और सिलहट में जनमत संग्रह कराने में भी बड़ी भूमिका निभाई थी।
उन्होंने कहा, अब इतिहास को सुधारने का समय आ गया है। जिस तरह पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर पाकिस्तान के नियंत्रण में है और उसे वापस लेने का समय आ गया है, उसी तरह पूर्वोत्तर में चटगांव बंदरगाह, सिलहट और नोआखली को भी वापस लेने का समय आ गया है।