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ओडिशा: बालासोर जंगल से मिले पांच ओरांगुटान का डीएनए टेस्ट टला, जानें वन विभाग ने क्यों लिया ये फैसला
Thu, 10 Sep 2026 05:58 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, भुवनेश्वर।
पीटीआई, भुवनेश्वर।
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Thu, 10 Sep 2026 05:58 PM IST
सार
ओडिशा के बालासोर जंगल से बचाए गए पांच ओरांगुटान का डीएनए सैंपलिंग टेस्ट 10 दिन के लिए टाल दिया गया है। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क ने यह फैसला सीडब्लूएच कमिटी की सलाह पर लिया। बता दें कि सभी ओरांगुटान स्वस्थ हैं, लेकिन मां से अलग होने के कारण तनाव में हैं।
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पांच ओरांगुटान का DNA टेस्ट टला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
ओडिशा के बालासोर जिले के जंगल से बचाए गए पांच छोटे ओरांगुटान (orangutans) के डीएनए सैंपल लेने का काम कम से कम 10 दिनों के लिए टाल दिया गया है, क्योंकि ये जानवर अभी नए माहौल में भावनात्मक रूप से पूरी तरह स्थिर नहीं हो पाए हैं। यह जानकारी अधिकारियों ने गुरुवार को दी।
यह निर्णय किसने लिया है?
यह निर्णय नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के अधिकारियों ने 'सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ' (सीडब्लूएच) कमिटी की सिफारिश पर लिया। इस कमिटी में ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (ओयूएटी) के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं।
पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने क्या कहा?
राज्य के वन और पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया, जो ओरांगुटान की सेहत और भलाई पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके मूल स्थान का पता लगाने के लिए डीएनए सैंपलिंग जरूरी थी। मंत्री ने कहा, 'डीएनए टेस्ट करना ओरांगुटान के जेनेटिक्स, प्रजाति के वर्गीकरण और उनके माता-पिता का पता लगाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
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सीडब्लूएच ने क्या सलाह दी है?
इससे यह जांचने में भी मदद मिलेगी कि ये जानवर ओडिशा कैसे पहुंचे। ये भारत के मूल निवासी नहीं हैं।'सीडब्लूएच कमिटी ने बुधवार को ओरांगुटान की स्थिति की जांच की और तुरंत सैंपलिंग न करने की सलाह दी। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के डायरेक्टर सनथ कुमार एन ने पीटीआई को बताया, 'सीडब्लूएच की सलाह के अनुसार, जानवरों को नए माहौल में स्थिर होने और 10 दिनों तक अपनी देखभाल करने वालों और खाने-पीने की चीजों के आदी होने की जरूरत है। उसके बाद, स्क्रीनिंग के लिए ब्लड और ओरल स्वैब जैसे बायो-सैंपल लिए जाएँगे।"
अधिकारियों ने बताया कि सभी पांचों ओरांगुटान अभी अच्छी सेहत में हैं, ठीक से खा-पी रहे हैं और सक्रिय हैं। हालांकि, सिंहखुंटिया ने कहा कि अपनी माताओं से अलग होने के बाद ये जानवर भावनात्मक रूप से परेशान लग रहे थे। उन्होंने कहा, 'अपनी माताओं से अलग होने के बाद उनके चेहरों पर चिंता साफ दिख रही है। इसलिए, उन्हें स्थिर होने और शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की जरूरत है।'
अधिकारियों ने बताया कि बचाव के बाद तीन ओरांगुटान के बीमार पाए जाने पर पशु चिकित्सकों ने उनके लिए पौष्टिक आहार और दवाएं दी हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि ओडिशा सरकार ने 'सेंट्रल जू अथॉरिटी' (CZA) को पत्र लिखकर यह पता लगाने को कहा है कि क्या राज्य का मौसम और अन्य स्थितियां इस प्रजाति के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।
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यह निर्णय किसने लिया है?
यह निर्णय नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के अधिकारियों ने 'सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ' (सीडब्लूएच) कमिटी की सिफारिश पर लिया। इस कमिटी में ओडिशा यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी (ओयूएटी) के पशु चिकित्सा विशेषज्ञ शामिल हैं।
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पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया ने क्या कहा?
राज्य के वन और पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंहखुंटिया, जो ओरांगुटान की सेहत और भलाई पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके मूल स्थान का पता लगाने के लिए डीएनए सैंपलिंग जरूरी थी। मंत्री ने कहा, 'डीएनए टेस्ट करना ओरांगुटान के जेनेटिक्स, प्रजाति के वर्गीकरण और उनके माता-पिता का पता लगाने की प्रक्रिया का हिस्सा है।
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सीडब्लूएच ने क्या सलाह दी है?
इससे यह जांचने में भी मदद मिलेगी कि ये जानवर ओडिशा कैसे पहुंचे। ये भारत के मूल निवासी नहीं हैं।'सीडब्लूएच कमिटी ने बुधवार को ओरांगुटान की स्थिति की जांच की और तुरंत सैंपलिंग न करने की सलाह दी। नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क के डायरेक्टर सनथ कुमार एन ने पीटीआई को बताया, 'सीडब्लूएच की सलाह के अनुसार, जानवरों को नए माहौल में स्थिर होने और 10 दिनों तक अपनी देखभाल करने वालों और खाने-पीने की चीजों के आदी होने की जरूरत है। उसके बाद, स्क्रीनिंग के लिए ब्लड और ओरल स्वैब जैसे बायो-सैंपल लिए जाएँगे।"
अधिकारियों ने बताया कि सभी पांचों ओरांगुटान अभी अच्छी सेहत में हैं, ठीक से खा-पी रहे हैं और सक्रिय हैं। हालांकि, सिंहखुंटिया ने कहा कि अपनी माताओं से अलग होने के बाद ये जानवर भावनात्मक रूप से परेशान लग रहे थे। उन्होंने कहा, 'अपनी माताओं से अलग होने के बाद उनके चेहरों पर चिंता साफ दिख रही है। इसलिए, उन्हें स्थिर होने और शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहने की जरूरत है।'
अधिकारियों ने बताया कि बचाव के बाद तीन ओरांगुटान के बीमार पाए जाने पर पशु चिकित्सकों ने उनके लिए पौष्टिक आहार और दवाएं दी हैं। मंत्री ने यह भी कहा कि ओडिशा सरकार ने 'सेंट्रल जू अथॉरिटी' (CZA) को पत्र लिखकर यह पता लगाने को कहा है कि क्या राज्य का मौसम और अन्य स्थितियां इस प्रजाति के लिए उपयुक्त हैं या नहीं।