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कल से मानसून सत्र का आगाज: PM मोदी के मीडिया को संबोधित करने की संभावना, विपक्ष भी कई मुद्दों पर रहेगा आक्रामक
Sun, 19 Jul 2026 08:43 PM IST
Devesh Tripathi
एएनआई, नई दिल्ली
एएनआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 19 Jul 2026 08:43 PM IST
सार
संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो रहा है। इसकी शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मीडिया को संबोधित करने की संभावना है। सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी। दूसरी ओर, विपक्ष राम मंदिर चढ़ावा चोरी, नीट-यूजी और अन्य पेपर लीक, ई-20 ईंधन नीति तथा विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है। ऐसे में यह सत्र विधायी एजेंडे के साथ-साथ तीखे राजनीतिक टकराव का भी गवाह बन सकता है।
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पीएम मोदी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सोमवार सुबह 10:15 बजे संसद भवन के हंस द्वार पर मीडिया को संबोधित कर सकते हैं। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। स्वतंत्रता दिवस समारोह के अवकाश के बाद जरूरत पड़ने पर सदनों की बैठक फिर बुलाई जा सकती है।
लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, केंद्र सरकार इस सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश कर सकती है।
मानसून सत्र में पेश होंगे कौन से विधेयक?
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: इस विधेयक में किसी संगठन का एफसीआरए प्रमाणपत्र समाप्त होने, नवीनीकरण नहीं होने या सरकार द्वारा नवीनीकरण से इनकार किए जाने की स्थिति में उसके प्रमाणपत्र को समाप्त करने का प्रावधान है।
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प्रस्तावित संशोधन विदेशी अंशदान और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, निगरानी, प्रबंधन और निपटान के लिए एक नामित प्राधिकरण के गठन का भी प्रावधान करता है। यह विधेयक केरल विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है, क्योंकि राज्य में बड़ी ईसाई आबादी है और कई गैर-सरकारी संगठन एफसीआरए के तहत विदेशी धन प्राप्त करते हैं।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: इस विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की जगह नई व्यवस्था लागू करना है। इस विधेयक के तहत पहली बार राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (आईएनआई) को भी नियामक ढांचे के दायरे में लाया जाएगा। अब तक ये संस्थान काफी हद तक इस तरह की निगरानी से बाहर थे।
हालांकि, विधेयक की धारा 15(3)(जी) को लेकर आलोचना हुई है। इसमें प्रस्तावित उच्च शिक्षा आयोग के लिए केंद्र सरकार के नीतिगत निर्देशों का पालन अनिवार्य किया गया है। किसी मतभेद की स्थिति में सरकार का निर्णय अंतिम माना जाएगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि यह प्रावधान मौजूदा कानूनी व्यवस्था में किसी बदलाव का संकेत नहीं है।
सरकार को किन मुद्दों पर घेरेगा विपक्ष?
यह विधेयक ऐसे समय लाया जा रहा है, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष के निशाने का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी इस सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले प्रमुख आर्थिक विधेयकों में शामिल किया है।
वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कहा है कि वे संसद में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, नीट-यूजी और अन्य पेपर लीक, ई-20 ईंधन के साथ भारत की विदेश नीति जैसे मुद्दे उठाएंगे।
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लोकसभा सचिवालय के बुलेटिन के अनुसार, केंद्र सरकार इस सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 लोकसभा में पेश कर सकती है।
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मानसून सत्र में पेश होंगे कौन से विधेयक?
विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026: इस विधेयक में किसी संगठन का एफसीआरए प्रमाणपत्र समाप्त होने, नवीनीकरण नहीं होने या सरकार द्वारा नवीनीकरण से इनकार किए जाने की स्थिति में उसके प्रमाणपत्र को समाप्त करने का प्रावधान है।
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प्रस्तावित संशोधन विदेशी अंशदान और उससे जुड़ी परिसंपत्तियों के अधिग्रहण, निगरानी, प्रबंधन और निपटान के लिए एक नामित प्राधिकरण के गठन का भी प्रावधान करता है। यह विधेयक केरल विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है, क्योंकि राज्य में बड़ी ईसाई आबादी है और कई गैर-सरकारी संगठन एफसीआरए के तहत विदेशी धन प्राप्त करते हैं।
विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025: इस विधेयक का उद्देश्य विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की जगह नई व्यवस्था लागू करना है। इस विधेयक के तहत पहली बार राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (आईएनआई) को भी नियामक ढांचे के दायरे में लाया जाएगा। अब तक ये संस्थान काफी हद तक इस तरह की निगरानी से बाहर थे।
हालांकि, विधेयक की धारा 15(3)(जी) को लेकर आलोचना हुई है। इसमें प्रस्तावित उच्च शिक्षा आयोग के लिए केंद्र सरकार के नीतिगत निर्देशों का पालन अनिवार्य किया गया है। किसी मतभेद की स्थिति में सरकार का निर्णय अंतिम माना जाएगा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि यह प्रावधान मौजूदा कानूनी व्यवस्था में किसी बदलाव का संकेत नहीं है।
सरकार को किन मुद्दों पर घेरेगा विपक्ष?
यह विधेयक ऐसे समय लाया जा रहा है, जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नीट-यूजी पेपर लीक मामले को लेकर विपक्ष के निशाने का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 को भी इस सत्र के दौरान पेश किए जाने वाले प्रमुख आर्थिक विधेयकों में शामिल किया है।
वहीं, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने कहा है कि वे संसद में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला, नीट-यूजी और अन्य पेपर लीक, ई-20 ईंधन के साथ भारत की विदेश नीति जैसे मुद्दे उठाएंगे।