Pharmacist Registry: फार्मासिस्टों के लिए नया नियम, 15 दिन में एचपीआर अपडेट जरूरी; नहीं किया तो क्या होगा?
देशभर के पंजीकृत फार्मासिस्टों के लिए प्रोफेशनल रजिस्ट्री से जुड़ा नया नियम लागू किया गया है। फार्मासिस्टों को 15 दिनों के भीतर अपनी हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री प्रोफाइल अपडेट और सत्यापित करनी होगी। इसके लिए पहले ई-केवाईसी जरूरी है। समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर प्रोफाइल निष्क्रिय की जा सकती है। ऐसे में क्या फार्मासिस्टों को अपनी प्रोफाइल तुरंत अपडेट कर लेनी चाहिए? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
देशभर के पंजीकृत फार्मासिस्टों के लिए प्रोफेशनल रजिस्ट्री को लेकर सख्ती की गई है। फार्मासिस्टों को अब हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री यानी एचपीआर में अपनी प्रोफाइल अपडेट और सत्यापित करानी होगी। इसके लिए 15 दिनों की समयसीमा तय की गई है। निर्धारित अवधि में प्रक्रिया पूरी नहीं करने पर संबंधित प्रोफाइल को निष्क्रिय किया जा सकता है। नए नियम का उद्देश्य फार्मासिस्टों से जुड़ी जानकारी का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना और उनकी पहचान व पंजीकरण की जानकारी को ऑनलाइन सत्यापित करना है।
एचपीआर प्रोफाइल अपडेट करने के लिए क्या करना होगा?
एचपीआर व्यवस्था राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के साथ मिलकर शुरू की गई है। जिन फार्मासिस्टों का पहले से डिजी फार्मेड पोर्टल पर पंजीकरण है और जिनके पास वैध बीएचपी नंबर है, उन्हें अपनी एचपीआर प्रोफाइल अपडेट करनी होगी। प्रक्रिया की शुरुआत ई-केवाईसी से होगी। इसमें फार्मासिस्ट को अपनी पहचान की जानकारी सत्यापित करनी होगी। इसके बाद व्यक्तिगत जानकारी, नौकरी, पढ़ाई और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी की जांच करनी होगी। प्रोफाइल में कोई जानकारी अधूरी है तो उसे पूरा करना होगा।
क्या प्रोफाइल में पुरानी या गलत जानकारी भी परेशानी बढ़ा सकती है?
- प्रोफाइल अपडेट करते समय फार्मासिस्टों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दर्ज की गई जानकारी सही और नई हो।
- प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित राज्य फार्मेसी काउंसिल प्रोफाइल की जांच करेगी।
- काउंसिल की मंजूरी मिलने के बाद फार्मासिस्ट का एचपीआर कार्ड बनाया जाएगा।
- इस व्यवस्था से फार्मासिस्ट की पहचान, शैक्षणिक योग्यता, नौकरी और पंजीकरण से जुड़ी जानकारी को एक डिजिटल रिकॉर्ड में रखा जा सकेगा।
बीफार्मा की पढ़ाई में भी क्या बदलाव किया गया है?
फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने बीफार्मा के 2026 पाठ्यक्रम को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। नए पाठ्यक्रम में अलग-अलग विषयों को जोड़कर पढ़ाने वाले अंतर विषयी पाठ्यक्रम शामिल किए गए हैं। जिन कॉलेजों में किसी विषय के लिए योग्य फार्मेसी शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, वहां योग्य अतिथि या बाहर से आने वाले शिक्षक की मदद ली जा सकेगी। ऐसे शिक्षक के पास संबंधित विषय में स्नातकोत्तर डिग्री होना जरूरी होगा।
नए पाठ्यक्रम से छात्रों को क्या फायदा होगा?
पीसीआई के अनुसार नए पाठ्यक्रम का उद्देश्य बीफार्मा छात्रों को अलग-अलग विषयों की बेहतर जानकारी देना और उन्हें फार्मेसी से जुड़े व्यावहारिक काम के लिए तैयार करना है। बाहर से नियुक्त किए जाने वाले शिक्षकों को पढ़ाने से पहले जरूरी प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इस तरह एक तरफ फार्मासिस्टों की डिजिटल पहचान और रिकॉर्ड को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ फार्मेसी शिक्षा में भी व्यावहारिक और अंतर विषयी पढ़ाई पर जोर दिया जा रहा है।