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सुप्रीम कोर्ट: लुटियंस दिल्ली में बिना पुलिस की अनुमति नहीं निकल सकेगा जुलूस? शीर्ष अदालत में दायर हुई याचिका
Sun, 30 Aug 2026 09:14 PM IST
पवन पांडेय
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: पवन पांडेय
Updated Sun, 30 Aug 2026 09:14 PM IST
सार
दिल्ली के लुटियंस इलाके में विरोध-प्रदर्शन को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मांग की गई है कि इस इलाके में बिना पुलिस की अनुमति के कोई भी जुलूस-प्रदर्शन न निकाला जाए। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाएगा, इस पर सभी की निगाहें टिकी है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
राष्ट्रीय राजधानी के बेहद संवेदनशील इलाके लुटियंस दिल्ली में किसी भी बड़े जुलूस या प्रदर्शन से पहले पुलिस की अनुमति अनिवार्य करने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। यह याचिका ऐसे समय में दाखिल हुई है, जब कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च निकालने का एलान किया है।
किसने दायर की याचिका?
यह याचिका दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेंद्र सिंह ने दाखिल की है। इसमें सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के संवेदनशील संवैधानिक क्षेत्रों में किसी भी बड़े मार्च, जुलूस या संगठित प्रदर्शन की अनुमति तभी दी जाए, जब आयोजकों ने संबंधित अधिकारियों से जरूरी अनुमति पहले ही ले ली हो।
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5 सितंबर को प्रस्तावित है विरोध मार्च
सीजेपी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर 36 दिन तक आंदोलन किया था। संगठन का आरोप है कि 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कराने के लिए केंद्र की ओर से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। इसी के विरोध में संगठन ने 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाले जाने की बात कही गई है। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे अब तक इस तरह के किसी जुलूस के लिए कोई अनुरोध या अनुमति आवेदन नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई?
याचिका में अदालत से कहा गया है कि लुटियंस दिल्ली जैसे सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इलाके में बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाने, मार्च या प्रदर्शन का आह्वान तभी किया जा सके, जब आयोजकों के पास जरूरी अनुमति हो। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित किसी भी बड़े जमावड़े को नियंत्रित, टाला या उसके स्वरूप में बदलाव किया जाए। इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि अगर किसी जुलूस को अनुमति दी भी जाती है, तो वह निर्धारित और अधिकृत सीमा से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। आयोजकों को संबंधित क्षेत्र में लागू नियमों और पुलिस की अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा।
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सीजेपी का क्या कहना है?
कॉकरोच जनता पार्टी के मुताबिक, 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च शिक्षक दिवस के मौके पर होगा। संगठन का दावा है कि इसमें उन छात्रों के परिवार शामिल होंगे, जिन्होंने नीट परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी। संगठन ने यह भी कहा है कि जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के परिवार भी मार्च में शामिल होंगे।
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किसने दायर की याचिका?
यह याचिका दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारी राजेंद्र सिंह ने दाखिल की है। इसमें सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के संवेदनशील संवैधानिक क्षेत्रों में किसी भी बड़े मार्च, जुलूस या संगठित प्रदर्शन की अनुमति तभी दी जाए, जब आयोजकों ने संबंधित अधिकारियों से जरूरी अनुमति पहले ही ले ली हो।
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5 सितंबर को प्रस्तावित है विरोध मार्च
सीजेपी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर 36 दिन तक आंदोलन किया था। संगठन का आरोप है कि 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कराने के लिए केंद्र की ओर से किए गए वादों को पूरा नहीं किया गया। इसी के विरोध में संगठन ने 5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की घोषणा की है। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाले जाने की बात कही गई है। हालांकि, दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे अब तक इस तरह के किसी जुलूस के लिए कोई अनुरोध या अनुमति आवेदन नहीं मिला है।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई?
याचिका में अदालत से कहा गया है कि लुटियंस दिल्ली जैसे सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील इलाके में बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाने, मार्च या प्रदर्शन का आह्वान तभी किया जा सके, जब आयोजकों के पास जरूरी अनुमति हो। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित किसी भी बड़े जमावड़े को नियंत्रित, टाला या उसके स्वरूप में बदलाव किया जाए। इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि अगर किसी जुलूस को अनुमति दी भी जाती है, तो वह निर्धारित और अधिकृत सीमा से आगे नहीं बढ़ना चाहिए। आयोजकों को संबंधित क्षेत्र में लागू नियमों और पुलिस की अनुमति की शर्तों का पालन करना होगा।
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सीजेपी का क्या कहना है?
कॉकरोच जनता पार्टी के मुताबिक, 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च शिक्षक दिवस के मौके पर होगा। संगठन का दावा है कि इसमें उन छात्रों के परिवार शामिल होंगे, जिन्होंने नीट परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी। संगठन ने यह भी कहा है कि जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के परिवार भी मार्च में शामिल होंगे।