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कूटनीति के टर्निंग पॉइंट बनेंगे पीएम के विदेश दौरे: कनाडा-ईयू से व्यापार समझौतों पर रहेगी नजर; क्या है तैयारी?
सार
दिसंबर में पीएम मोदी की कनाडा यात्रा से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक ठहराव खत्म होने और व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के साथ-साथ क्रिटिकल मिनरल्स व ऊर्जा सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही यूरोपीय संघ के साथ लंबित मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना भी है, जिससे भारतीय निर्यात को नई उड़ान मिलेगी। इन समझौतों से भारतीय कारोबार और निर्यात को कितना फायदा मिल सकता है? पढ़िए इस रिपोर्ट में।
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पीएम मोदी के दिसंबर में प्रस्तावित दौरे क्यों अहम?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एएनआई (फाइल)
विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर में प्रस्तावित विदेश दौरे भारत की व्यापार कूटनीति और आर्थिक साझेदारियों को एक ऐतिहासिक नई दिशा देने जा रहे हैं। इस दौरान कनाडा के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते को अमलीजामा पहनाने और यूरोपीय संघ के साथ एफटीए को आगे बढ़ाने पर मुख्य फोकस रहेगा।
कनाडा से व्यापार समझौते पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 और 12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर रहेंगे। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारतीय उच्चायोग ने इस यात्रा की घोषणा की है। उच्चायोग के मुताबिक दोनों देशों के नेता व्यापार, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने पर सहमत हुए हैं। यात्रा के दौरान भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर ठोस फैसले की उम्मीद है। कनाडा के साथ इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को वहां के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। साल 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 30.4 अरब डॉलर रहा था, जिसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य है। इस दौरान लिथियम और कोबाल्ट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा के मोर्चे पर भी प्रगति हो सकती है।
ये भी पढ़ें: अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश पर भारत चिंतित: भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील; क्या कहा?
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जी-20 शिखर सम्मेलन
कनाडा दौरे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री के 14-15 दिसंबर को अमेरिका के फ्लोरिडा में आयोजित होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। साथ ही भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और द्विपक्षीय बैठकों के सिलसिले में बेल्जियम और जर्मनी जाने की संभावना भी है। हालांकि इन दौरों के लिए अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम फिलहाल स्पष्ट होना बाकी हैं।
यूरोपीय संघ के साथ एफटीए
भारत और यूरोपीय संघ ने इस साल जनवरी में मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता पूरी कर ली थी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक इस समझौते पर दिसंबर तक हस्ताक्षर होने और इसके अगले साल फरवरी-मार्च तक लागू होने की पूरी उम्मीद है। यूरोपीय संघ के भारत में राजदूत हर्वे डेल्फिन ने भी जून में कहा था कि दोनों पक्ष साल के अंत तक हस्ताक्षर की दिशा में काम कर रहे हैं। इस समझौते से वस्त्र, रसायन और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को पंख लगेंगे। हालांकि कुछ घरेलू उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ सकता है। यह समझौता ऐसे समय में आकार ले रहा है जब वैश्विक स्तर पर संरक्षणवाद और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की होड़ मची है। हालांकि इस मामले का एक संवेदनशील पहलू यह भी है कि यूरोपीय संघ के कड़े पर्यावरण मानकों खासकर कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म के बीच भारतीय उद्योगों को संतुलन बिठाना होगा। कुल मिलाकर दिसंबर का महीना भारत के आर्थिक कूटनीतिक कैलेंडर का सबसे व्यस्त निर्णायक समय साबित होने जा रहा है।
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कनाडा से व्यापार समझौते पर जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 11 और 12 दिसंबर को कनाडा के दौरे पर रहेंगे। कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारतीय उच्चायोग ने इस यात्रा की घोषणा की है। उच्चायोग के मुताबिक दोनों देशों के नेता व्यापार, ऊर्जा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में ठोस परिणाम हासिल करने पर सहमत हुए हैं। यात्रा के दौरान भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) पर ठोस फैसले की उम्मीद है। कनाडा के साथ इस समझौते से भारतीय निर्यातकों को वहां के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। साल 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार 30.4 अरब डॉलर रहा था, जिसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य है। इस दौरान लिथियम और कोबाल्ट जैसे क्रिटिकल मिनरल्स और स्वच्छ ऊर्जा के मोर्चे पर भी प्रगति हो सकती है।
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जी-20 शिखर सम्मेलन
कनाडा दौरे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री के 14-15 दिसंबर को अमेरिका के फ्लोरिडा में आयोजित होने वाले जी-20 शिखर सम्मेलन में शामिल होने की संभावना है। साथ ही भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और द्विपक्षीय बैठकों के सिलसिले में बेल्जियम और जर्मनी जाने की संभावना भी है। हालांकि इन दौरों के लिए अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम फिलहाल स्पष्ट होना बाकी हैं।
यूरोपीय संघ के साथ एफटीए
भारत और यूरोपीय संघ ने इस साल जनवरी में मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता पूरी कर ली थी। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक इस समझौते पर दिसंबर तक हस्ताक्षर होने और इसके अगले साल फरवरी-मार्च तक लागू होने की पूरी उम्मीद है। यूरोपीय संघ के भारत में राजदूत हर्वे डेल्फिन ने भी जून में कहा था कि दोनों पक्ष साल के अंत तक हस्ताक्षर की दिशा में काम कर रहे हैं। इस समझौते से वस्त्र, रसायन और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यात को पंख लगेंगे। हालांकि कुछ घरेलू उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का भी सामना करना पड़ सकता है। यह समझौता ऐसे समय में आकार ले रहा है जब वैश्विक स्तर पर संरक्षणवाद और सप्लाई चेन को सुरक्षित करने की होड़ मची है। हालांकि इस मामले का एक संवेदनशील पहलू यह भी है कि यूरोपीय संघ के कड़े पर्यावरण मानकों खासकर कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म के बीच भारतीय उद्योगों को संतुलन बिठाना होगा। कुल मिलाकर दिसंबर का महीना भारत के आर्थिक कूटनीतिक कैलेंडर का सबसे व्यस्त निर्णायक समय साबित होने जा रहा है।