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Karnataka Election: टिकट बंटवारे के साथ कर्नाटक विधानसभा चुनाव में बदले सियासी समीकरण, जानें अब आगे क्या?

Tue, 18 Apr 2023 02:33 PM IST
हिमांशु मिश्रा स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 18 Apr 2023 02:33 PM IST
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सार
पिछले 10 दिनों की गतिविधियों पर नजर डालें तो इस बीच कई बड़े उलटफेर हुए। आइए जानते हैं इन दस दिनों में क्या-क्या बदला और अब आगे क्या होगा? 
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Political equation changed in Karnataka assembly elections after ticket distribution, know what next?
कर्नाटक विधानसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कर्नाटक में 10 मई को विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके पहले सूबे में तेजी से सियासी समीकरण बदल रहे हैं। टिकट बंटवारे को लेकर राजनीतिक दलों में उठापटक तेज है। जिन्हें टिकट नहीं मिला वो नई राह तलाश रहे हैं। जिन्हें टिकट मिल गया वो चुनाव की तैयारियों में जुट गए। पिछले 10 दिनों की गतिविधियों पर नजर डालें तो इस बीच कई बड़े उलटफेर हुए। आइए जानते हैं इन दस दिनों में क्या-क्या बदला और अब आगे क्या होगा? 

 

1. सत्ताधारी भाजपा के कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी छोड़ी: सत्ताधारी पार्टी भाजपा में टिकट बंटवारे को लेकर खलबली मची हुई है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार, पूर्व उप-मुख्यमंत्री लक्ष्मण संगप्पा सावदी समेत दो दर्जन से ज्यादा बड़े नेताओं ने टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी जताते हुए पार्टी छोड़ दी है। इनमें से ज्यादातर ने कांग्रेस का दामन थाम लिया। भाजपा नेताओं में टिकट बंटवारे को लेकर नाराजगी और बगावत अभी भी जारी है। जगदीश शेट्टार की गिनती लिंगायत समुदाय के बड़े नेताओं में होती है। ऐसे में उनके कांग्रेस में जाने से भाजपा को नुकसान हो सकता है। 
 

2. कांग्रेस में भी उठापटक: ऐसा नहीं है कि बगावत केवल भाजपा में है। कांग्रेस और जेडीएस नेता भी बागी रुख अख्तियार कर रहे हैं। कर्नाटक के पूर्व एमएलसी और कांग्रेस नेता रघु आचार ने बागी रुख अख्तियार करते हुए जनता दल (सेक्यूलर) का दामन थाम लिया है। वहीं, कर्नाटक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कगोडु थिम्मप्पा की बेटी ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है।  
 

3. जेडीएस को भी लग चुका है झटका: भाजपा और कांग्रेस के साथ-साथ जेडीएस को भी कई झटके लग चुके हैं। जेडीएस नेता अब्दुल अजीज ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। इन्होंने नरसिम्हाराजा विधानसभा क्षेत्र से टिकट मांगा था। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और प्रदेश इकाई के सचिव पद से अब्दुल अजीज के इस्तीफे का पत्र प्रदेश इकाई के अध्यक्ष चंगाई मंगलोते इब्राहिम को सौंपा गया। बताया जाता है कि अब्दुल अजीज अब कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए उन्होंने कांग्रेस नेता सिद्धारमैया से मुलाकात भी की है। 

आरसिकेरे निर्वाचन क्षेत्र के जनता दल (एस) विधायक के एम शिवलिंगे गौड़ा ने भी पार्टी छोड़ दी है। गौड़ा के कांग्रेस में शामिल होने के आसार हैं। इसी तरह मांड्या से पूर्व लोकसभा सदस्य एलआर शिवराम गौड़ा भी पिछले दिनों सत्तारूढ़ भाजपा में शामिल हो गए हैं।
 

4. भाजपा ने उम्मीदवारों की तीन लिस्ट जारी की: कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए अभी तक भाजपा ने उम्मीदवारों की तीन लिस्ट जारी की है। पहली लिस्ट 11 अप्रैल को 189 उम्मीदवारों की, 12 अप्रैल को दूसरी लिस्ट 23 उम्मीदवारों की और सोमवार (17 अप्रैल ) को 10 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है। 224 सदस्यीय विधानसभा के लिए पार्टी अब तक 222 उम्मीदवारों का एलान कर चुकी है।
 

5. कांग्रेस के 209 उम्मीदवार तय: कांग्रेस ने अभी तक 209 उम्मीदवारों का एलान किया है। कांग्रेस ने 25 मार्च  को पहली लिस्ट में  124, दूसरी लिस्ट में 42 उम्मीदवारों को टिकट दिया है। कयास लग रहे हैं कि कांग्रेस तीसरी लिस्ट जल्द जारी कर सकती है। 
 

आगे क्या होगा? 
इसे समझने के लिए हमने राजनीतिक विश्लेषक एस. वीरेंद्र से बात की। उन्होंने कहा, 'टिकट बंटवारे की फाइनल सूची आने के बाद से सभी दलों में उठापटक बंद हो जाएगी। इसके बाद सभी दल और नेता चुनाव की तैयारियों में जुट जाएंगे।' वीरेंद्र आगे कहते हैं, 'चुनाव को लेकर कई ओपिनियन पोल भी आ चुके हैं। लड़ाई कांग्रेस और भाजपा में है। अब ये देखना होगा कि बाजी कौन मारता है।' 
 

सूबे का जातिगत समीकरण क्या है? 
कर्नाटक में 2011 की जनगणना के अनुसार कुल जनसंख्या 6.11 करोड़ है। इनमें सबसे ज्यादा हिन्दू 5.13 करोड़ यानी 84 फीसदी हैं। इसके बाद मुस्लिम हैं जिनकी जनसंख्या 79 लाख यानी 12.91 फीसदी है। राज्य में ईसाई 11 लाख यानी लगभग 1.87 फीसदी हैं और जैन आबादी 4 लाख यानी 0.72 फीसदी है। 

कर्नाटक का लिंगायत सबसे बड़ा समुदाय है। इनकी आबादी करीब 17 फीसदी है। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा समुदाय वोक्कालिगा है, जिसकी आबादी करीब 14 फीसदी हैं। राज्य में कुरुबा जाति की आबादी आठ फीसदी, एससी 17 फीसदी, एसटी सात फीसदी हैं। लिंगायत समाज को कर्नाटक की अगड़ी जातियों में गिना जाता है। लिंगायत और वीरशैव कर्नाटक के दो बड़े समुदाय हैं। इन दोनों समुदायों का जन्म 12वीं शताब्दी के समाज सुधार आंदोलन के चलते हुआ था।
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