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President: द. अफ्रीका के उपराष्ट्रपति से मिली राष्ट्रपति मुर्मू, द्विपक्षीय सहयोग-निवेश बढ़ाने पर हुई चर्चा
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Tue, 02 Jun 2026 07:58 PM IST
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सार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दक्षिण अफ्रीका के उप-राष्ट्रपति से मुलाकात कर व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने 15.5 अरब डॉलर के व्यापार को और बढ़ाने और भारत-अफ्रीका फोरम समिट को जल्द आयोजित करने की बात कही।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दक्षिण अफ्रीका के उप-राष्ट्रपति
- फोटो : @rashtrapatibhvn
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विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका को अपने व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करना चाहिए। उन्होंने दोनों देशों के बीच वर्तमान में हो रहे 15.5 अरब डॉलर के व्यापार का जिक्र किया। राष्ट्रपति ने जोर दिया कि दोनों देशों को इस द्विपक्षीय व्यापार को एक ऊंचे स्तर पर ले जाने के लिए लगातार प्रयास करने चाहिए।
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह बातें दक्षिण अफ्रीका के उप-राष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले के साथ बैठक के दौरान कहीं। माशातिले ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने माशातिले का भारत की उनकी पहली यात्रा पर गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक विशेष दोस्ती है। यह दोस्ती ऐतिहासिक होने के साथ-साथ आज के समय में भी बहुत महत्वपूर्ण है।
व्यापार पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 15.5 अरब डॉलर का मौजूदा व्यापार अच्छा है, लेकिन इसमें और भी ज्यादा संभावनाएं छिपी हैं। उन्होंने कहा कि हमें व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए हमें ऐसा नीतिगत माहौल बनाना होगा जिससे दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में निवेश और कारोबार बढ़ाने में आसानी हो।
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राष्ट्रपति मुर्मू ने अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत अफ्रीका के साथ अपने रिश्तों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत जल्द ही भारत-अफ्रीका फोरम समिट को फिर से आयोजित करने के लिए अफ्रीकी संघ आयोग के साथ मिलकर काम करेगा। इबोला वायरस के फैलने की चिंताओं के कारण पिछले महीने दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन को टाल दिया गया था।
ये भी पढ़ें: Accident: सूरत के पास महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में भिड़ंत, पांच लोगों की मौत; कई घायल
मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आपसी सहयोग से दोनों देशों के लोगों को बहुत फायदा होगा। राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि दक्षिण अफ्रीका वह पहला देश था जिसके साथ भारत ने साल 1997 में रणनीतिक साझेदारी शुरू की थी। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका हमेशा से 'ग्लोबल साउथ' की मजबूत आवाज रहे हैं। दोनों देशों का उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष का एक साझा इतिहास रहा है। संयुक्त राष्ट्र, गुटनिरपेक्ष आंदोलन और जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग के जरिए हम शांति और समृद्धि को बढ़ावा देना चाहते हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह बातें दक्षिण अफ्रीका के उप-राष्ट्रपति शिपोकोसा पॉलस माशातिले के साथ बैठक के दौरान कहीं। माशातिले ने राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति ने माशातिले का भारत की उनकी पहली यात्रा पर गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक विशेष दोस्ती है। यह दोस्ती ऐतिहासिक होने के साथ-साथ आज के समय में भी बहुत महत्वपूर्ण है।
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व्यापार पर चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 15.5 अरब डॉलर का मौजूदा व्यापार अच्छा है, लेकिन इसमें और भी ज्यादा संभावनाएं छिपी हैं। उन्होंने कहा कि हमें व्यापारिक रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए हमें ऐसा नीतिगत माहौल बनाना होगा जिससे दोनों देशों की कंपनियों को एक-दूसरे के बाजार में निवेश और कारोबार बढ़ाने में आसानी हो।
राष्ट्रपति मुर्मू ने अफ्रीका के साथ भारत की साझेदारी पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत अफ्रीका के साथ अपने रिश्तों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। भारत जल्द ही भारत-अफ्रीका फोरम समिट को फिर से आयोजित करने के लिए अफ्रीकी संघ आयोग के साथ मिलकर काम करेगा। इबोला वायरस के फैलने की चिंताओं के कारण पिछले महीने दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन को टाल दिया गया था।
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मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि आपसी सहयोग से दोनों देशों के लोगों को बहुत फायदा होगा। राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि दक्षिण अफ्रीका वह पहला देश था जिसके साथ भारत ने साल 1997 में रणनीतिक साझेदारी शुरू की थी। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका हमेशा से 'ग्लोबल साउथ' की मजबूत आवाज रहे हैं। दोनों देशों का उपनिवेशवाद के खिलाफ संघर्ष का एक साझा इतिहास रहा है। संयुक्त राष्ट्र, गुटनिरपेक्ष आंदोलन और जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सहयोग के जरिए हम शांति और समृद्धि को बढ़ावा देना चाहते हैं।