रक्षा मंत्री: 'समुद्र में सिर्फ जहाजों की सुरक्षा काफी नहीं': राजनाथ सिंह बोले- अब तेल ठिकाने भी बचाना जरूरी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्री सुरक्षा का दायरा बढ़ाने पर जोर दिया है। अब भारत को जहाजों और समुद्री व्यापारिक रास्तों के साथ पानी के नीचे बिछी इंटरनेट केबल, तेल-गैस ठिकानों और बंदरगाहों की भी सुरक्षा करनी होगी। समुद्री डकैती, तस्करी और साइबर हमले भी बड़ी चुनौती हैं। ऐसे में क्या भारत की मौजूदा निगरानी व्यवस्था इन नए खतरों से निपटने के लिए पर्याप्त है? आइए, विस्तार से जानते हैं कि रक्षा मंत्री ने क्या-कुछ कहा...
विस्तार
नई दिल्ली में बुधवार को भारतीय हिंद-प्रशांत क्षेत्रीय संवाद (आईपीआरडी) को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की रणनीति में बड़े बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अब समुद्र में सिर्फ जहाजों और व्यापारिक रास्तों की सुरक्षा पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। समुद्र के भीतर बिछी इंटरनेट केबल, बंदरगाह, तेल और गैस के ठिकाने भी देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं। इन पर हमला या किसी तरह की रुकावट देश की आर्थिक गतिविधियों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में भारत को समुद्र के भीतर और सतह पर होने वाली हर गतिविधि पर नजर रखने की मजबूत व्यवस्था तैयार करनी होगी।
समुद्री सुरक्षा को लेकर राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
रक्षा मंत्री ने कहा कि समुद्री व्यापार के रास्तों की सुरक्षा जरूरी है, लेकिन इसके साथ बंदरगाहों, समुद्र के नीचे बिछी संचार केबल और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों को भी सुरक्षित रखना होगा। उन्होंने जोर दिया कि देश को यह समझने की क्षमता विकसित करनी होगी कि उसके समुद्री क्षेत्र में क्या हो रहा है। खतरे सिर्फ दूसरे देशों की नौसेना या सैन्य गतिविधियों से नहीं आते। समुद्री डकैती, तस्करी, अवैध मछली पकड़ने, साइबर हमलों और प्राकृतिक आपदाओं से भी समुद्री सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसलिए बदलते हालात के हिसाब से समुद्री सुरक्षा की समझ और निगरानी व्यवस्था को भी बदलना होगा।
पानी के नीचे बिछी इंटरनेट केबल इतनी महत्वपूर्ण क्यों हैं?
समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक केबल दुनिया के संचार तंत्र की रीढ़ हैं। इनके जरिए इंटरनेट और डिजिटल सूचनाओं का बड़ा हिस्सा एक देश से दूसरे देश तक पहुंचता है। इन केबलों के जरिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय लेनदेन और इंटरनेट सेवाएं भी चलती हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया के 95 प्रतिशत से अधिक इंटरनेट ट्रैफिक और वित्तीय लेनदेन का बड़ा हिस्सा समुद्र के नीचे मौजूद इन केबलों से होकर गुजरता है। अगर इन केबलों को नुकसान पहुंचता है या इनके कामकाज में रुकावट आती है, तो इसका असर इंटरनेट सेवाओं, कारोबार और वित्तीय गतिविधियों पर पड़ सकता है। यही वजह है कि राजनाथ सिंह ने इनकी सुरक्षा को राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बताया।
तेल और गैस के ठिकानों की सुरक्षा क्यों जरूरी है?
भारत की ऊर्जा जरूरतों और आर्थिक गतिविधियों के लिए समुद्र में मौजूद तेल और गैस के ठिकाने भी महत्वपूर्ण हैं। समुद्र में बने तेल के कुएं, प्राकृतिक गैस के टर्मिनल और बड़े व्यापारिक बंदरगाह देश की आपूर्ति व्यवस्था से जुड़े हैं। इन ठिकानों पर किसी हमले, तकनीकी गड़बड़ी या प्राकृतिक आपदा का असर ऊर्जा की उपलब्धता और सामान की आवाजाही पर पड़ सकता है। इसलिए इनकी सुरक्षा सिर्फ नौसेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि देश की आर्थिक संप्रभुता से भी जुड़ा विषय है। राजनाथ सिंह के बयान का मतलब है कि समुद्र में मौजूद इन महत्वपूर्ण संपत्तियों की लगातार निगरानी की जानी चाहिए, ताकि किसी खतरे का समय रहते पता लगाया जा सके।
समुद्र में कौन-कौन से नए खतरे सामने आ रहे हैं?
समुद्री सुरक्षा के लिए अब पारंपरिक सैन्य खतरों के अलावा कई दूसरे जोखिम भी चुनौती बन रहे हैं। समुद्री रास्तों पर साइबर हमला, तस्करी, अवैध और बिना सूचना के मछली पकड़ना तथा समुद्री डकैती जैसी गतिविधियां सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाएं भी समुद्री ढांचे को नुकसान पहुंचा सकती हैं। ऐसे खतरों से निपटने के लिए अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल जरूरी है। लगातार निगरानी और जरूरत पड़ने पर तेजी से कार्रवाई करने की क्षमता विकसित करनी होगी। रक्षा मंत्री ने इसी व्यापक नजरिये को अपनाने की जरूरत पर जोर दिया।
भारत अपनी समुद्री निगरानी व्यवस्था को कैसे मजबूत कर रहा है?
भारत हिंद महासागर क्षेत्र और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी समुद्री निगरानी और नौसैनिक क्षमता बढ़ाने पर काम कर रहा है। भारतीय नौसेना तटीय रडार नेटवर्क, उपग्रहों से मिलने वाली जानकारी, समुद्र के भीतर आवाज और गतिविधियों का पता लगाने वाले सेंसर तथा मानवरहित हवाई वाहनों के जरिए निगरानी का दायरा बढ़ा रही है। इन तकनीकों की मदद से समुद्र में होने वाली गतिविधियों की जानकारी जुटाने और संभावित खतरों को पहचानने में मदद मिलती है। राजनाथ सिंह ने जिस व्यापक निगरानी व्यवस्था की बात की है, उसका मकसद समुद्र में केवल जहाजों की आवाजाही पर नजर रखना नहीं, बल्कि वहां मौजूद महत्वपूर्ण ढांचे और संसाधनों की भी सुरक्षा करना है।
भारत की नई समुद्री रणनीति का क्या होगा मकसद?
भारत का लक्ष्य हिंद महासागर और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है। इसके तहत समुद्री रास्तों पर आवाजाही की स्वतंत्रता और नियमों पर आधारित व्यवस्था को बनाए रखने के साथ-साथ जरूरी आर्थिक ठिकानों को भी सुरक्षित रखना होगा। बदलते खतरों को देखते हुए निगरानी, तकनीक और अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल को मजबूत करना जरूरी है। राजनाथ सिंह का संदेश साफ है कि समुद्री सुरक्षा अब केवल नौसेना के जहाजों और सीमित गश्त तक नहीं रह सकती। पानी के नीचे मौजूद केबल से लेकर समुद्र में बने ऊर्जा ठिकानों तक, हर महत्वपूर्ण संपत्ति की सुरक्षा भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है।