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चढ़ावा चोरी विवाद: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को फिर होगी सुनवाई, SIT के पुनर्गठन पर यूपी सरकार साफ करेगी रुख

Sun, 26 Jul 2026 06:28 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Sun, 26 Jul 2026 06:28 PM IST
सार

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। शीर्ष अदालत उत्तर प्रदेश सरकार से जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) के पुनर्गठन पर भी स्थिति स्पष्ट करने को कह सकती है। पिछली सुनवाई में अदालत ने निष्पक्ष जांच और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में एसआईटी गठित करने की आवश्यकता जताई थी।

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Ram temple donation row Supreme Court to resume hearing on Monday UP govt stand on SIT reconstitution likely
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI

विस्तार

अयोध्या के राम मंदिर में ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को फिर सुनवाई करेगा। मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से विशेष जांच दल (एसआईटी) के पुनर्गठन पर अपना रुख स्पष्ट करने की भी संभावना है।
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सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की गई कार्यसूची के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ इन याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।
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किन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट?
इन याचिकाओं में अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की रिट याचिका, स्वयं पक्षकार के रूप में अजय कुमार राय की आपराधिक रिट याचिका, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) सांसद सुधाकर सिंह की याचिका और हिंदू धर्म परिषद की ओर से दायर याचिका शामिल हैं। चारों मामलों पर एक साथ सुनवाई होगी।
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20 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई में सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार से कथित अनियमितताओं की जांच कर रही एसआईटी के पुनर्गठन पर विचार करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि जांच का नेतृत्व एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी को करना चाहिए और इसे "तार्किक निष्कर्ष तक" पहुंचाया जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कहा था- अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं?
पीठ ने कहा था, "जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और उसे उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाना चाहिए।" साथ ही अदालत ने इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा था कि "अदालतें राजनीति करने की जगह नहीं हैं।" सुनवाई के दौरान केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया था कि उसके पहले के निर्देशों का पालन करते हुए सीलबंद लिफाफे में स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी गई है।

उन्होंने कहा था, "जांच जारी है। आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस स्तर पर मैं इससे अधिक जानकारी साझा नहीं कर सकता।" पहले गठित एसआईटी की भूमिका स्पष्ट करते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि उसका गठन केवल आरोपों की सत्यता की जांच के लिए किया गया था, जबकि आपराधिक जांच वह स्वयं नहीं कर रही थी।

चढ़ावा चोरी की जांच पर क्या बोली यूपी सरकार?
उन्होंने अदालत को बताया था कि फिलहाल पुलिस अधीक्षक की निगरानी में पुलिस जांच कर रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पहले की एसआईटी में दो आईएएस अधिकारियों और एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। अदालत ने सुझाव दिया कि मौजूदा जांच उसी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में पुनर्गठित एसआईटी को सौंपी जाए, जिसे पहले से मामले की जानकारी है।

पीठ ने कहा था, "चल रही जांच के लिए एक एसआईटी होनी चाहिए। इस अधिकारी को इसकी अगुवाई करनी चाहिए क्योंकि उसे मामले की जानकारी है। सरकार से बात करें और एसआईटी का पुनर्गठन करें। जो भी अतिरिक्त निर्देश आवश्यक होंगे, हम देंगे।"

याचिका में दान से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
सुनवाई के दौरान एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता देवदत्त कामत ने अदालत से राम मंदिर निर्माण के दौरान मिले दान से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि इन रिकॉर्ड को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाए, ताकि दानदाता यह जांच सकें कि उनका दान मंदिर तक पहुंचा या नहीं।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करना व्यावहारिक नहीं हो सकता, लेकिन जहां भी रसीद जारी की गई है, वहां रिकॉर्ड का समुचित रखरखाव होना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्य सहित सभी संबंधित रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जा रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार को क्यों भेजा था नोटिस?
इससे पहले 13 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी को उसकी संरचना सहित विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था। इसके बाद यह रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में अदालत में दाखिल की गई। याचिकाओं में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की अदालत की निगरानी में जांच कराने की मांग की गई है।

अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी की याचिका में राम जन्मभूमि मंदिर में मिले दान से जुड़े रिकॉर्ड और साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है। वहीं, राजद सांसद सुधाकर सिंह ने अपनी अलग याचिका में मौजूदा जांच को सुप्रीम कोर्ट की प्रत्यक्ष निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपने की मांग की है।


उन्होंने अदालत से अंतरिम निगरानी समिति गठित करने, वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने और ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑडिट की गई वित्तीय रिपोर्ट तथा दान का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करने का भी अनुरोध किया है।
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