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Parliament: भाजपा सांसद ने उठाया टेलीविजन पर गुमराह करने वाले विज्ञापनों का मुद्दा, सख्त निगरानी की मांग की
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 29 Jan 2026 06:24 PM IST
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सार
Parliament: भाजपा सांसद ने आज संसद में गुमराह करने वाले टेलीविजन विज्ञापनों का मुद्दा उठाया और कहा कि इनका नाबालिगों और युवाओं के मन पर गहरा असर होता है। उन्होंने सख्त निगरानी की मांग की।
लोकसभा की कार्यवाही
- फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद के लक्ष्मण ने गुरुवार को टेलीविजन पर शराब और पान मसाला जैसे उत्पादों के गुमराह करने वाले (सरोगेट) विज्ञापनों पर कड़े नियंत्रण और निगरानी की मांग की, खासकर क्रिकेट मैच व अन्य लोकप्रिय कार्यक्रमों के दौरान। भाजपा सांसद ने शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाया।
उत्तर प्रदेश से बीजेपी सांसद लक्ष्मण ने कहा, मशहूर हस्तियां, खासकर क्रिकेट खिलाड़ी ऐसे गुमराह करने वाले विज्ञापनों के जरिये उत्पादों का प्रचार करने से बचें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला बहुत अहम है और समाज में हर माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि उन कार्यक्रमों में ऐसे विज्ञापन बढ़ते जा रहे हैं, जिन्हें परिवार और खासकर छोटे बच्चे बड़ी संख्या में देखते हैं।
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लक्ष्मण ने कहा कि भारत में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं बल्कि देश के प्रति भावनात्मक जुड़ाव है, क्योंकि इसे परिवार के सदस्य दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे साथ मिलकर देखते हैं।
'नाबालिगों और युवाओं के दिमाग पर गहरा असर'
उन्होंने कहा, ऐसे व्यापक दर्शक वर्ग वाले कार्यक्रमों के दौरान दिखाए जाने वाले विज्ञापनों का प्रभाव बच्चों और युवाओं के दिमाग पर गहरा पड़ता है। इसमें पान मसाला, गुटखा, शराब और अन्य उत्पादों का प्रचार सरोगेट ब्रांडिंग के जरिये किया जाता है और इसमें फिल्म सितारे और क्रिकेट खिलाड़ी जैसी मशहूर हस्तियां ब्रांड एंबेसडर भी होते हैं।
लक्ष्मण ने बताया कि ये विज्ञापन म्यूजिक सीडी, बोतलबंद पानी और जीवनशैली से जुड़े उत्पादों जैसी वस्तुओं के माध्यम से होते हैं, लेकिन इसमें ब्रांड की पहचान, रंग, जिंगल और एंबेसडर वयस्क उत्पादों से जुड़े रहते हैं।
'हम समाज को क्या संदेश दे रहे हैं?'
उन्होंने पूछा, बच्चे लाइव मैच और अन्य मनोरंजन के कार्यक्रमों के दौरान बार-बार इन ब्रांड के प्रभाव में आते हैं, तो हम समाज को क्या संदेश दे रहे हैं? भाजपा सांसद ने कहा कि वैश्विक शोध दिखाते हैं कि उपभोक्ता पर इसका प्रभाव होता है।
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'अन्य प्लेटफॉर्म में भी अपनाई जा रही यह प्रवृत्ति'
अब इसी प्रवृत्ति (पैटर्न) को ओटीटी प्लेटफॉर्म, अवार्ड शो, म्यूजिक इवेंट और डिजिटल इन्फ्लुएंसर प्लेटफॉर्म में भी अपनाया जा रहा है। उन्होंने राज्यसभा में कहा कि गुमराह करने वाले विज्ञापनों की निगरानी मजबूत करने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं, स्पष्ट किया जाए कि अप्रत्यक्ष प्रचार क्या है और ऐसे विज्ञापनों को उन कार्यक्रमों में प्रतिबंधित करने पर विचार किया जाए, जिन्हें परिवार और नाबालिग अधिक देखते हैं।
'मशहूर हस्तियों को ऐसे विज्ञापन करने से रोका जाए'
उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि मशहूर हस्तियों खासकर खिलाड़ी और फिल्म स्टार को ऐसे विज्ञापनों में भाग लेने से रोका जाए, ताकि बच्चे प्राइम टाइम में ऐसे उत्पादों के संपर्क में न आएं और उनका उज्ज्वल भविष्य सुरक्षित रहे।
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उत्तर प्रदेश से बीजेपी सांसद लक्ष्मण ने कहा, मशहूर हस्तियां, खासकर क्रिकेट खिलाड़ी ऐसे गुमराह करने वाले विज्ञापनों के जरिये उत्पादों का प्रचार करने से बचें। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मामला बहुत अहम है और समाज में हर माता-पिता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि उन कार्यक्रमों में ऐसे विज्ञापन बढ़ते जा रहे हैं, जिन्हें परिवार और खासकर छोटे बच्चे बड़ी संख्या में देखते हैं।
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लक्ष्मण ने कहा कि भारत में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं बल्कि देश के प्रति भावनात्मक जुड़ाव है, क्योंकि इसे परिवार के सदस्य दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे साथ मिलकर देखते हैं।
'नाबालिगों और युवाओं के दिमाग पर गहरा असर'
उन्होंने कहा, ऐसे व्यापक दर्शक वर्ग वाले कार्यक्रमों के दौरान दिखाए जाने वाले विज्ञापनों का प्रभाव बच्चों और युवाओं के दिमाग पर गहरा पड़ता है। इसमें पान मसाला, गुटखा, शराब और अन्य उत्पादों का प्रचार सरोगेट ब्रांडिंग के जरिये किया जाता है और इसमें फिल्म सितारे और क्रिकेट खिलाड़ी जैसी मशहूर हस्तियां ब्रांड एंबेसडर भी होते हैं।
लक्ष्मण ने बताया कि ये विज्ञापन म्यूजिक सीडी, बोतलबंद पानी और जीवनशैली से जुड़े उत्पादों जैसी वस्तुओं के माध्यम से होते हैं, लेकिन इसमें ब्रांड की पहचान, रंग, जिंगल और एंबेसडर वयस्क उत्पादों से जुड़े रहते हैं।
'हम समाज को क्या संदेश दे रहे हैं?'
उन्होंने पूछा, बच्चे लाइव मैच और अन्य मनोरंजन के कार्यक्रमों के दौरान बार-बार इन ब्रांड के प्रभाव में आते हैं, तो हम समाज को क्या संदेश दे रहे हैं? भाजपा सांसद ने कहा कि वैश्विक शोध दिखाते हैं कि उपभोक्ता पर इसका प्रभाव होता है।
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'अन्य प्लेटफॉर्म में भी अपनाई जा रही यह प्रवृत्ति'
अब इसी प्रवृत्ति (पैटर्न) को ओटीटी प्लेटफॉर्म, अवार्ड शो, म्यूजिक इवेंट और डिजिटल इन्फ्लुएंसर प्लेटफॉर्म में भी अपनाया जा रहा है। उन्होंने राज्यसभा में कहा कि गुमराह करने वाले विज्ञापनों की निगरानी मजबूत करने के लिए सख्त नियम बनाए जाएं, स्पष्ट किया जाए कि अप्रत्यक्ष प्रचार क्या है और ऐसे विज्ञापनों को उन कार्यक्रमों में प्रतिबंधित करने पर विचार किया जाए, जिन्हें परिवार और नाबालिग अधिक देखते हैं।
'मशहूर हस्तियों को ऐसे विज्ञापन करने से रोका जाए'
उन्होंने सभी सांसदों से अपील की कि मशहूर हस्तियों खासकर खिलाड़ी और फिल्म स्टार को ऐसे विज्ञापनों में भाग लेने से रोका जाए, ताकि बच्चे प्राइम टाइम में ऐसे उत्पादों के संपर्क में न आएं और उनका उज्ज्वल भविष्य सुरक्षित रहे।