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RSS: पश्चिम बंगाल के चुनाव पर मंथन करेगा आरएसएस, असम में घुसपैठिया विवाद पर भी होगी चर्चा
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Tue, 24 Feb 2026 03:58 PM IST
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सार
पश्चिम बंगाल और असम में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) घुसपैठ विवाद पर चर्चा करेगा। यह चर्चा 13 मार्च से 15 मार्च के बीच हरियाणा के समालखा में होने वाली आरएसएस की शीर्ष बैठक के दौरान की जाएगी।
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- फोटो : प्रो जसीम मोहम्मद
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विस्तार
पश्चिम बंगाल और असम में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) घुसपैठ विवाद पर चर्चा करेगा। यह चर्चा 13 मार्च से 15 मार्च के बीच हरियाणा के समालखा में होने वाली आरएसएस की शीर्ष बैठक के दौरान की जाएगी। बैठक में समसामयिक मुद्दों पर चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल और असम के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में संघ के 40 अनुषांगिक संगठनों के प्रमुख भी शामिल होंगे। बैठक में भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष नितिन नवीन के भी शामिल होने की संभावना है।
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पश्चिम बंगाल और असम में घुसपैठ का मुद्दा प्रमुखता से चर्चा में है। भाजपा लगातार इस मुद्दे पर आक्रामक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री लगातार घुसपैठ का मुद्दा उठा रहे हैं। इन नेताओं ने कहा है कि घुसपैठिये असम और बांग्लादेश के मूल लोगों के रोजी-रोटी के अधिकार को छीन रहे हैं। वे इन्हें राज्यों से बाहर करने की बात करते रहे हैं। जबकि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और असम में कांग्रेस इसे मुसलमानों के खिलाफ भाजपा की 'साजिश' करार दे रहे हैं। इस बीच संघ इस मुद्दे पर चर्चा कर इस पर अपना रुख तय कर सकता है।
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हालांकि, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी लगातार घुसपैठ के मुद्दे पर आक्रामक हैं। संघ में संघ प्रमुख की राय ही अंतिम मानी जाती है। हाल ही में लखनऊ प्रवास के दौरान उन्होंने कहा था कि घुसपैठिये इस देश के नागरिक नहीं हो सकते। उन्होंने घुसपैठियों को पहचान कर देश से बाहर भेजने की बात कही। संघ प्रमुख के बयान से स्पष्ट है कि संघ का इस मुद्दे पर एजेंडा बिल्कुल साफ है। उन्होंने यह भी कहा है कि मुसलमानों की 'घर वापसी' के काम में तेजी लाई जानी चाहिए और हिंदू धर्म में वापसी करने वालों का ध्यान भी रखा जाना चाहिए। इस शीर्ष बैठक में भी इन मुद्दों पर विचार हो सकता है। आरएसएस की सर्वोच्च संस्था 'अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा' की बैठक में पिछले कार्यों का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया जाता है और अगली कार्य योजनाओं पर विचार किया जाता है। संघ के वरिष्ठ नेता इस बैठक के बाद अनौपचारिक चर्चा में समसामयिक मुद्दों पर बातचीत भी करते हैं।