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Maharashtra: रायगढ़ में NCP सहयोगी नहीं, शिवसेना मंत्री गोगवाले गणतंत्र दिवस पर फहराएंगे तिरंगा; जानें क्यों?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Wed, 21 Jan 2026 10:34 PM IST
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सार
रायगढ़ में गणतंत्र दिवस समारोह इस बार अलग सियासी संकेत दे रहा है। शिवसेना मंत्री भारत गोगावले 26 जनवरी को तिरंगा फहराएंगे, जबकि पिछले साल यह जिम्मेदारी एनसीपी नेता अदिति तटकरे के पास थी। दोनों नेताओं के बीच जिले में लंबे समय से राजनीतिक टकराव है। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं।
भारतीय झंडा
- फोटो : एआई
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विस्तार
महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में इस साल गणतंत्र दिवस समारोह का दृश्य बदला हुआ होगा। आधिकारिक कार्यक्रम में इस बार तिरंगा भारत गोगवाले फहराएंगे। वह पिछले साल झंडारोहण करने वाली अदिति तटकरे की जगह लेंगे। यह बदलाव ऐसे समय हुआ है, जब जिले में गोगावले और तटकरे परिवार के बीच सियासी टकराव खुलकर सामने है।
क्यों बदला झंडारोहण का नाम?
राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) की ओर से जारी आदेश में रायगढ़ जिला मुख्यालय पर 26 जनवरी को तिरंगा फहराने के लिए गोगावले को अधिकृत किया गया है। आदेश में साफ किया गया है कि जिलेवार अभिभावक मंत्री, मंत्री या राज्यमंत्री मुख्य सरकारी समारोह में ध्वजारोहण करेंगे। पिछले वर्ष यह जिम्मेदारी तटकरे के पास थी, लेकिन इस बार सूची में बदलाव किया गया।
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महाय़ुति सरकार की आंतरिक सियासत
रायगढ़ में यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं माना जा रहा। शिवसेना और एनसीपी दोनों भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के घटक दल हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से वर्चस्व की लड़ाई चल रही है, जिसका असर अब सार्वजनिक कार्यक्रमों तक दिखने लगा है।
सरकारी दिशा-निर्देश और तैयारियां
जीएडी के आदेश में गणतंत्र दिवस समारोह के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी तय किए गए हैं। इसमें ध्वजारोहण का समय, प्रोटोकॉल, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा शामिल है। सभी विभागों और जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि समारोह तय मानकों के अनुसार शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से कराए जाएं।
स्थानीय राजनीति पर नजर
रायगढ़ तटीय जिले में यह बदलाव राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से इलाके में विकास कार्यों और संगठनात्मक पकड़ को लेकर दोनों खेमों के बीच खींचतान रही है। ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में झंडारोहण की जिम्मेदारी बदलना, आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।
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महाय़ुति सरकार की आंतरिक सियासत
रायगढ़ में यह फैसला केवल प्रशासनिक नहीं माना जा रहा। शिवसेना और एनसीपी दोनों भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार के घटक दल हैं। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से वर्चस्व की लड़ाई चल रही है, जिसका असर अब सार्वजनिक कार्यक्रमों तक दिखने लगा है।
सरकारी दिशा-निर्देश और तैयारियां
जीएडी के आदेश में गणतंत्र दिवस समारोह के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश भी तय किए गए हैं। इसमें ध्वजारोहण का समय, प्रोटोकॉल, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रूपरेखा शामिल है। सभी विभागों और जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि समारोह तय मानकों के अनुसार शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से कराए जाएं।
स्थानीय राजनीति पर नजर
रायगढ़ तटीय जिले में यह बदलाव राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से इलाके में विकास कार्यों और संगठनात्मक पकड़ को लेकर दोनों खेमों के बीच खींचतान रही है। ऐसे में गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रम में झंडारोहण की जिम्मेदारी बदलना, आने वाले दिनों में स्थानीय राजनीति की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है।
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