{"_id":"6ab9e54fb299107bdc0791fd","slug":"strict-health-regulations-acidity-medication-not-without-doctor-prescription-new-alternative-for-stomach-pain-2026-09-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"सेहत पर सख्त नियम: एसिडिटी की दवा डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगी, पेट दर्द में नया विकल्प क्या?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सेहत पर सख्त नियम: एसिडिटी की दवा डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं मिलेगी, पेट दर्द में नया विकल्प क्या?
विज्ञापन
दवाओं के नए विकल्पों की तैयारी शुरू (सांकेतिक)
- फोटो : ANI
फैटी लिवर, सिकल सेल, थैलेसीमिया और कब्ज के साथ पेट दर्द जैसी समस्याओं के इलाज में दवाओं के नए विकल्पों की तैयारी शुरू हो गई है। सीडीएससीओ की विशेषज्ञ समितियों ने कई दवाओं के तीसरे व चौथे चरण के चिकित्सकीय परीक्षण आगे बढ़ाने की सिफारिश की है। एसिडिटी की दवा वोनोप्रीजन की बिक्री डॉक्टर की पर्ची के साथ ही करने की शर्त रखी गई है। दरअसल, बिना डॉक्टरी सलाह के लंबे समय तक एसिडिटी की दवा लेने से विटामिन बी-12, मैग्नेशियम की कमी व आंतों के इंफेक्शन का जोखिम बढ़ सकता है। किडनी को भी नुकसान हो सकता है।
विज्ञापन
एफिमोस्फेरमिन अल्फा
इस दवा के तीसरे चरण का परीक्षण आगे बढ़ाने की सिफारिश हुई है। यह फैटी लिवर के ऐसे मरीजों के लिए है, जिनमें बीमारी लिवर में सूजन व फाइब्रोसिस जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। वहीं रेसमेटिरोम के तीसरे चरण के परीक्षण में बदलाव की सिफारिश हुई है। परीक्षण में मुख्य परिणाम लिवर की बायोप्सी से फाइब्रोसिस में बदलाव को मानने व इलाज की अवधि 52 सप्ताह रखने की बात कही गई है।
विज्ञापन
पेट दर्द में नया विकल्प
लिनाक्लोटाइड 290 माइक्रोग्राम के तीसरे चरण के परीक्षण की सिफारिश हुई है। यह आईबीएस-सी, यानी कब्ज के साथ पेट दर्द व आंतों की परेशानी वाली बीमारी के लिए है। यह आंत की गंदगी निकालने में मदद करता है और पेट दर्द में भी राहत देता है। परीक्षण ऐसे अस्पतालों में होगा जहां गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी विभाग हो।
विज्ञापन
वोनोप्रीजन 10 व 20 मिग्रा को है मंजूरी
वोनोप्रीजन 10 और 20 मिलीग्राम भारत में पहले से मंजूर है। विशेषज्ञ समिति ने एक कंपनी के जैव-समानता अध्ययन व दूसरी कंपनी को इसे बनाने-बेचने की अनुमति की सिफारिश की है। इसकी खुदरा बिक्री गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की पर्ची पर करने की शर्त रखी गई है। एटावोपिवैट के तीसरे चरण के परीक्षण में 6 से 12 साल के बच्चों को शामिल करने की सिफारिश है।