ED: एमएलए-लैड फंड से 32 स्कूलों के लिए खरीदा घटिया क्वालिटी का सामान, विधायक ने किया 2.87 करोड़ का घोटाला
राजस्थान में एमएलए-लैड फंड से 32 स्कूलों के लिए घटिया क्वालिटी का सामान खरीदा गया। ईडी के मुताबिक, विधायक पर 2.87 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप है।
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राजस्थान के बहरोड़ निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व विधायक बलजीत यादव ने अपने 'विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि' (एमएलए-एलएडी) के जरिए स्कूलों के लिए घटिया क्वालिटी का सामान खरीदने की सिफारिश की। एमएलए-लैड फंड से 32 स्कूलों के लिए घटिया क्वालिटी का सामान खरीदा गया। ईडी के मुताबिक, विधायक पर 2.87 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय ने पूर्व विधायक बलजीत यादव को गिरफ्तार कर लिया है। पूर्व विधायकों ने इस घोटाले को अंजाम देने के लिए अपने परिचितों के नाम पर कंपनियों का गठन किया। इसके बाद नियमों को ताक पर रखकर उन्हें टेंडर दिलाया गया। घटिया क्वालिटी वाले सामान के खरीद बिलों को बहुत ज्यादा राशि का दिखाया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), जयपुर जोनल ऑफिस ने राजस्थान के बहरोड़ निर्वाचन क्षेत्र के पूर्व विधायक बलजीत यादव को तीन फरवरी को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई, उनके कार्यकाल के दौरान एमएलए-एलएडी फंड के गबन से संबंधित मामले में की गई है। बलजीत यादव को पीएमएलए की विशेष अदालत, जयपुर के सामने पेश किया गया। अदालत ने आरोपी को तीन दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। यह गिरफ्तारी एसीबी, जयपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (2018 में संशोधित) की धारा 7(c), 13(1)(a), 13(2), IPC, 1860 की धारा 409 और 120B, जो पीएमएलए के तहत अनुसूचित अपराध है, के तहत की गई है। राजस्थान सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता अधिनियम, 2012 की धारा 41 के तहत अपराधों के लिए 287/2024 दिनांक 12.12.2024 को एफआईआर दर्ज की गई थी।
ईडी की जांच में पता चला है कि बलजीत यादव, अपने एमएलए कार्यकाल (2018-2023) के दौरान, 2.87 करोड़ रुपये के एमएलए-लैड फंड के गलत इस्तेमाल में मुख्य साजिशकर्ता थे। उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र के 32 स्कूलों के लिए खेल का सामान खरीदने की सिफारिश की। इसके लिए उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर, कर्मचारियों/सहयोगियों के पहचान पत्र का इस्तेमाल करके मेसर्ज बालाजी कंप्लीट सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्ज सूर्या एंटरप्राइजेज, मेसर्ज राजपूत स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज और मेसर्ज शर्मा स्पोर्ट्स एंटरप्राइजेज जैसी कंपनियां बनाईं। इन कंपनियों को खेल के सामान के व्यापार का कोई पिछला अनुभव नहीं था।
इन कंपनियों को जिला परिषद, अलवर से प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद बनाया गया था। प्रतिस्पर्धा को सीमित करने और इन कंपनियों को ही टेंडर दिलाने के लिए तय नियमों का उल्लंघन करके टेंडर जारी किए गए। इसके अलावा, घटिया क्वालिटी का सामान कैश में खरीदा गया। नीमराना पंचायत समिति को बढ़ा-चढ़ाकर बिल जमा किए गए, जिन्हें मंजूरी दे दी गई। बैंक अकाउंट की जांच से पता चला कि मिले हुए फंड को बलजीत यादव के रिश्तेदारों/सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर किया गया। फंड का कुछ हिस्सा उनके नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने में इस्तेमाल किया गया, जिसे बाद में बेच दिया गया। पैसा वापस कंपनियों में भेजा गया, जिनमें से ज़्यादातर कैश में निकाल लिए गए।
इससे पहले, जांच के दौरान, ईडी ने 24.01.2025 को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत जयपुर और दौसा (राजस्थान) और रेवाड़ी (हरियाणा) में नौ जगहों पर तलाशी अभियान चलाया था। इसमें बलजीत यादव और उनसे जुड़े व्यक्तियों/संस्थाओं से संबंधित ठिकानों को कवर किया गया था। तलाशी अभियान के दौरान, 31 लाख रुपये नकद, आपत्तिजनक दस्तावेज़, रिकॉर्ड और कई डिजिटल डिवाइस ज़ब्त किए गए। इनमें 'विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि' फंड की मनी लॉन्ड्रिंग के बारे में अहम सबूत मिले हैं।
