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'NCPI को चुनाव आयोग से मिली मान्यता': सुदीप बंद्योपाध्याय का विपक्ष पर निशाना, सर्वदलीय बैठक से किया था वॉकआउट
Sun, 19 Jul 2026 06:15 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sun, 19 Jul 2026 06:15 PM IST
सार
संसद के मानसून सत्र से पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक में टीएमसी के बागी सांसदों की मौजूदगी को लेकर विपक्ष ने विरोध जताते हुए प्रतीकात्मक वॉकआउट किया। एनसीपीआई नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने जवाब में कहा कि उनकी पार्टी को चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त है और उसके सांसदों की संख्या के आधार पर उसे उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि टीएमसी अब छोटी पार्टी बन चुकी है।
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एनसीपीआई सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
संसद के मानसून सत्र से पहले रविवार को सर्वदलीय बैठक में तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों की मौजूदगी का विपक्षी दलों ने विरोध किया। इस पर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के नेता सुदीप बंद्योपाध्याय ने पलटवार करते हुए कहा कि उनकी पार्टी को चुनाव आयोग से मान्यता प्राप्त है।
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद टीएमसी के 19 अन्य बागी टीएमसी सांसदों के साथ एनसीपीआई में शामिल हुए बंद्योपाध्याय ने दावा किया कि एनसीपीआई राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का सबसे बड़ा घटक दल भी है। उन्होंने कहा, "मैंने कभी सर्वदलीय नेताओं की बैठक के दौरान वॉकआउट होते नहीं देखा। एनसीपीआई को चुनाव आयोग की मान्यता प्राप्त है। काकोली घोष दस्तीदार लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सभी दस्तावेज सौंपने जा रही हैं।"
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टीएमसी बन गई अब छोटी पार्टी : बंद्योपाध्याय
सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि 20 लोकसभा सांसदों के एनसीपीआई में शामिल होने के बाद तृणमूल कांग्रेस अब छोटी पार्टी बन गई है। उन्होंने कहा, "मैंने सर्वदलीय बैठक में यह भी मांग की कि छोटी पार्टी को लोकसभा में पहली पंक्ति में सीट नहीं दी जानी चाहिए। 28 में से 20 सांसदों के अलग होने के बाद पार्टी (टीएमसी) में अब केवल आठ सांसद बचे हैं।"
संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में रविवार को पूरा विपक्ष प्रतीकात्मक रूप से वॉकआउट कर गया। विपक्ष ने बागी टीएमसी सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय और काकोली घोष दस्तीदार को बैठक में बुलाए जाने का विरोध किया। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने बागी सांसदों की स्थिति पर फैसला नहीं किए जाने के बावजूद सरकार ने उन्हें मान्यता देने की जल्दबाजी दिखाई।
सरकार के फैसले के बचाव में क्या बोले रिजिजू?
हालांकि, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा, "एनसीपीआई ने लोकसभा अध्यक्ष से मान्यता की मांग की है। ऐसे में उन्हें कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है? सभी को आमंत्रित करना सरकार का कर्तव्य है।" विपक्ष के आरोपों पर बंद्योपाध्याय ने कहा, "वे जो कहना चाहते हैं, कहें। लोकसभा अध्यक्ष को जो कहना है, वह कल संसद शुरू होने पर सामने आ जाएगा। तब पता चल जाएगा कि किसकी सीट कहां होगी।"
टीएमसी की ओर से 20 बागी सांसदों को अयोग्य घोषित करने की मांग पर उन्होंने कहा कि इसका फैसला लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना है। उन्होंने कहा, "अगर अध्यक्ष को लगेगा कि अयोग्यता बनती है तो वे अयोग्य घोषित करेंगे। और अगर उन्हें लगेगा कि हमें कल से अलग समूह के रूप में पहली पंक्ति में बैठना चाहिए, तो वह भी कल पता चल जाएगा। 24 घंटे इंतजार कीजिए।"
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लोकसभा अध्यक्ष ने टीएमसी के बागी सांसदों के लिए क्या फैसला?
बंद्योपाध्याय ने कहा कि काकोली घोष दस्तीदार रविवार को लोकसभा अध्यक्ष को सभी जरूरी दस्तावेज सौंपेंगी। काकोली घोष दस्तीदार ने कहा, "सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित किए जाने के लिए हम आभार व्यक्त करते हैं। यह हमारे 20 सांसदों के नवगठित गठबंधन के प्रति सम्मान का संकेत है।" संसद के मानसून सत्र से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार को शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी दी थी। साथ ही टीएमसी के 20 बागी सांसदों को लोकसभा में अलग बैठने की अनुमति भी दी थी।