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Sunil Jakhar Exclusive Interview: 'दम है तो राजस्थान में कार्रवाई करे कांग्रेस हाईकमान, तय करे पायलट गलत या गहलोत', जानें ऐसा क्यों बोले सुनील जाखड़
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सार
उदयपुर में चल रहे चिंतन शिविर के दौरान ही पंजाब के तेजतर्रार कांग्रेसी नेता सुनील जाखड़ ने इस्तीफा देकर बड़ी हलचल पैदा कर दी। पार्टी से इस्तीफा देने के बाद सुनील जाखड़ ने अमर उजाला डॉट कॉम से खुलकर की बात। कहा- मैं नेतागिरी दिमाग से नहीं दिल से करता हूं। कांग्रेस पार्टी में नेता चमचे और चापलूस ज्यादा है, जबकि पार्टी कार्यकर्ता हाशिए पर।
सुनील जाखड़
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विस्तार
पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कांग्रेस की गुड बुक में शुमार पंजाब के बड़े नेता सुनील जाखड़ ने अचानक इस्तीफा देकर न सिर्फ सबको चौंका दिया बल्कि कांग्रेस पर तमाम तरह के आरोप भी लगाए। जाखड़ कहते हैं पंजाब के नेताओं ने पंजाब में वो काम करना शुरू किया जो आतंकवाद के दौर में भी नहीं हो रहा था। वो कहते हैं कि मैंने तो कांग्रेस की आंखों में सुरमा लगाने का काम किया था लेकिन अंबिका सोनी और हरीश चौधरी जैसे नेताओं ने आलाकमान को मैसेज दिया कि मैं आंखें फोड़ रहा हूं। वह कहते हैं अगर कांग्रेस सच में दूध का दूध और पानी का पानी करना चाहती है तो उसको राजस्थान में भी तय करना चाहिए कि सचिन पायलट विरोध करके गलत थे या मुख्यमंत्री के पद पर बैठे अशोक गहलोत। वो कहते हैं कि अब बहुत राजनीति हो गई। अब वह चुपचाप बैठेंगे। दूसरी पार्टी ज्वाइन करने के सवाल पर उन्होंने फिलहाल राजनीति से दूरी बनाने की बात कह दी। सुनील जाखड़ ने अमर उजाला डॉट कॉम के आशीष तिवारी से बातचीत के दौरान ऐसी बहुत सी बाते कहीं। पेश है बातचीत के अंश।
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सवाल: आप ने इस्तीफा देकर एकदम चौंका दिया। यह तो पहले से ही प्लान किया था या अचानक मन बनाया।
जवाब: (हंसते हुए) मैं तो एक कांग्रेस का छोटा सा कार्यकर्ता हूं। जो दिमाग की बजाए दिल से चलता है। पार्टी को कैसे चौका सकता हूं।
जवाब: (हंसते हुए) मैं तो एक कांग्रेस का छोटा सा कार्यकर्ता हूं। जो दिमाग की बजाए दिल से चलता है। पार्टी को कैसे चौका सकता हूं।
सवाल: आप कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार किए जाते हैं। अगर कोई नाराजगी थी तो आप आलाकमान से मिलकर भी तो अपनी बात रख सकते थे। फेसबुक पर आना और फिर गुड बाय कर देना...
जवाब: ऐसा क्या था जो आलाकमान को नहीं पता था। क्या पंजाब की सियासत को लेकर मैडम अनभिज्ञ हैं। लेकिन उनकी आंख और कान पंजाब के दो ऐसे नेता थे, जो उनको न सिर्फ भड़का रहे थे बल्कि कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने की जमीन भी तैयार कर रहे थे।
जवाब: ऐसा क्या था जो आलाकमान को नहीं पता था। क्या पंजाब की सियासत को लेकर मैडम अनभिज्ञ हैं। लेकिन उनकी आंख और कान पंजाब के दो ऐसे नेता थे, जो उनको न सिर्फ भड़का रहे थे बल्कि कांग्रेस का सूपड़ा साफ करने की जमीन भी तैयार कर रहे थे।
सवाल: कौन-कौन से नेता थे वो?
जवाब: अंबिका सोनी और हरीश चौधरी। यह दो नेता थे जिन्होंने मैडम और आलाकमान को बताया कि सुनील जाखड़ तो पंजाब में आंखें फोड़ने का काम कर रहे हैं। जबकि हकीकत तो यह है कि मैं तो कांग्रेस की आंख में सुरमा लगाने का काम कर रहा था। बताइए...अंबिका सोनी ने हिंदू और सिख की राजनीति में पंजाब को बांटने की कोशिश की। अरे...जब आतंकवाद के दौर में गरजने वाली बंदूकें भी पंजाब को हिंदू और सिख में नहीं बांट पाई तो यह नेता क्या पंजाब को बांटने चले थे।
जवाब: अंबिका सोनी और हरीश चौधरी। यह दो नेता थे जिन्होंने मैडम और आलाकमान को बताया कि सुनील जाखड़ तो पंजाब में आंखें फोड़ने का काम कर रहे हैं। जबकि हकीकत तो यह है कि मैं तो कांग्रेस की आंख में सुरमा लगाने का काम कर रहा था। बताइए...अंबिका सोनी ने हिंदू और सिख की राजनीति में पंजाब को बांटने की कोशिश की। अरे...जब आतंकवाद के दौर में गरजने वाली बंदूकें भी पंजाब को हिंदू और सिख में नहीं बांट पाई तो यह नेता क्या पंजाब को बांटने चले थे।
सवाल: तो आपको लगता है आलाकमान ने आपसे जो स्पष्टीकरण मांगा और आपको पदों से हटा दिया, वह इसी राजनीति के चलते हुआ?
जवाब: पार्टी मुझे बता दे मैं कौन से पद पर था जो मुझे हटा दिया गया। रही बात जवाब देने की तो मैं ऐसे चमचे और चापलूस नेताओं के आरोपों के बाद भेजे गए स्पष्टीकरण में जवाब क्यों दूं। पार्टी आलाकमान को सब कुछ पता है।
जवाब: पार्टी मुझे बता दे मैं कौन से पद पर था जो मुझे हटा दिया गया। रही बात जवाब देने की तो मैं ऐसे चमचे और चापलूस नेताओं के आरोपों के बाद भेजे गए स्पष्टीकरण में जवाब क्यों दूं। पार्टी आलाकमान को सब कुछ पता है।
सवाल: लेकिन आपकी नाराजगी तो कैप्टन अमरिंदर को अचानक मुख्यमंत्री पद से हटाए जाने के बाद से पार्टी आलाकमान से हो गई थी। आपको भी तो अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। कहा जा रहा था कि मुख्यमंत्री पद के आप बड़े दावेदार हैं। लेकिन अंतिम समय में सब बिगड़ गया।
जवाब: अब आप इन सब सवालों के जवाब मुझसे ना लें तो ज्यादा ही बेहतर है। मैं बस एक बात कहना चाहता हूं कि ऐसा कुछ नहीं है जो पार्टी को पता नहीं है।
जवाब: अब आप इन सब सवालों के जवाब मुझसे ना लें तो ज्यादा ही बेहतर है। मैं बस एक बात कहना चाहता हूं कि ऐसा कुछ नहीं है जो पार्टी को पता नहीं है।
सवाल: उदयपुर में कांग्रेस का चिंतन शिविर चल रहा है। आने वाले चुनावों को लेकर नई रणनीतियां बनाई जा रही हैं। आप उनको कैसे देख रहे हैं?
जवाब: फॉर्मेलिटी के लिए कुछ भी किया जा सकता है। उदयपुर के चिंतन शिविर में आप बैठ कर के रूस और यूक्रेन युद्ध की चर्चा कर रहे हो। इससे पार्टी का भला होने वाला नहीं है। बेहतर है आप पार्टी में कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के लिए योजनाएं बनाएं। चमचो और चापलूसों से कैसे छुटकारा मिले, उस पर योजनाएं बनाएं। तब जाकर कहीं चिंतन शिविर सफल होंगे।
जवाब: फॉर्मेलिटी के लिए कुछ भी किया जा सकता है। उदयपुर के चिंतन शिविर में आप बैठ कर के रूस और यूक्रेन युद्ध की चर्चा कर रहे हो। इससे पार्टी का भला होने वाला नहीं है। बेहतर है आप पार्टी में कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के लिए योजनाएं बनाएं। चमचो और चापलूसों से कैसे छुटकारा मिले, उस पर योजनाएं बनाएं। तब जाकर कहीं चिंतन शिविर सफल होंगे।
सवाल: उदयपुर के चिंतन शिविर में राजस्थान समेत देश के बड़े-बड़े राज्यों के नेता पहुंचे हैं। कांग्रेस की बेहतरी के लिए कुछ तो निकल के सामने आएगा ही।
जवाब: जवाब उदयपुर के चिंतन शिविर की बात कर रहे हैं तो मुझे लगता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए इससे बेहतर मंच और कोई हो ही नहीं सकता है। राजस्थान में भी तो भयंकर विरोध हुआ था। सचिन पायलट ने किया था। भरे मंच से अशोक गहलोत को कांग्रेस आलाकमान से पूछना चाहिए कि अगर विरोध करने वाले सचिन पायलट गलत थे तो उनको पार्टी से बाहर किया जाए। और अगर ऐसा नहीं था तो खुद अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें। फर्क यहीं पर आपको दिखता है कि कैसे आलाकमान पंजाब और राजस्थान में दुभांति करता है।
जवाब: जवाब उदयपुर के चिंतन शिविर की बात कर रहे हैं तो मुझे लगता है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के लिए इससे बेहतर मंच और कोई हो ही नहीं सकता है। राजस्थान में भी तो भयंकर विरोध हुआ था। सचिन पायलट ने किया था। भरे मंच से अशोक गहलोत को कांग्रेस आलाकमान से पूछना चाहिए कि अगर विरोध करने वाले सचिन पायलट गलत थे तो उनको पार्टी से बाहर किया जाए। और अगर ऐसा नहीं था तो खुद अशोक गहलोत मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दें। फर्क यहीं पर आपको दिखता है कि कैसे आलाकमान पंजाब और राजस्थान में दुभांति करता है।
सवाल: आजकल भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस से टूटकर भाजपा में शामिल हुए नेताओं को बड़े-बड़े पदों पर पहुंचा रही है। मुख्यमंत्री तक बना रही है राज्यों में। आप तो कद्दावर नेता है। कांग्रेस छोड़ दी है तो क्या भाजपा या दूसरे किसी दल में जाएंगे। या भाजपा के अलावा किसी दूसरे दल ने आपसे संपर्क किया है?
जवाब: न मुझसे किसी ने संपर्क किया है और न मैंने किसी से संपर्क किया है। अब मैं चुपचाप शात होकर घर बैठूंगा।
जवाब: न मुझसे किसी ने संपर्क किया है और न मैंने किसी से संपर्क किया है। अब मैं चुपचाप शात होकर घर बैठूंगा।
सवाल: बड़ी असंभव थी बात आपने कही है कि आप चुपचाप घर बैठेंगे। आपका और आपके परिवार का पूरा जीवन तो कांग्रेस में लग गया। कांग्रेस से बात तो करेंगे ही। क्या इस्तीफा देने के बाद कांग्रेस के किसी नेता से बात नहीं हुई आपकी?
जवाब: आप पार्टी छोड़ दी तो मेरे लिए यह सब पुरानी बातें हो गई है। ना मैंने किसी नेता से बात की है और ना ही किसी नेता ने मुझसे बात की।अब सभी चैप्टर क्लोज हो चुके हैं।
जवाब: आप पार्टी छोड़ दी तो मेरे लिए यह सब पुरानी बातें हो गई है। ना मैंने किसी नेता से बात की है और ना ही किसी नेता ने मुझसे बात की।अब सभी चैप्टर क्लोज हो चुके हैं।
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