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एलजीबीटी नाइट क्लब से गेकेशन्स तक, धारा 377 पर आए फैसले से मुक्त हुई भारत की पिंक इकोनॉमी

Wed, 12 Sep 2018 02:12 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Sep 2018 02:12 PM IST
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Supreme court decision on article 377 free pink economy of India

सुप्रीम कोर्ट के धारा 377 को अपराध की श्रेणी से बाहर करने फैसले से दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 'पिंक इकोनॉमी' के लिए रास्ते खुल गए हैं। यह कहना है विशेषज्ञों का। सुप्रीम कोर्ट के बीते हफ्ते आए ऐतिहासिक फैसले से समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया, जिससे कार्यकर्ताओं में भी खुशी का माहौल है।

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जिस समुदाय के अधिकार के लिए वह सालों से लड़ाई लड़ रहे थे, आखिरकार वह अधिकार उन्हें मिल ही गया। कोर्ट के फैसले के बाद कार्यकर्ताओं सहित इस समुदाय के लोगों ने इंद्रधनुष रंग के झंडे फहराकर अपनी खुशी जाहिर की।
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अब इस समुदाय के लोग फैशन, स्वास्थ्य समेत कई क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए तैयार है। इससे एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था आगे बढ़ेगी।

इस कानून के खिलाफ याचिका दायर करने वालों में से एक केशव सुरी का कहना है कि भारत की अर्थव्यवस्था में बिलियन डॉलर आ सकते हैं, अगर भारत में समलैंगिक लोगों पर भी खर्च किया जाए। ललित होटल के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर केशव सूरी का कहना है कि पिंक अर्थव्यवस्था और एलजीबीटी समुदाय के सामाजिक पहलुओं को अनदेखा करना अब बहुत बड़ी बात होगी।
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Supreme court decision on article 377 free pink economy of India
LGBT

भारत में 5.5 करोड़ से भी ज्यादा एलजीबीटी युवा रहते है। यह आंकड़े आउट नाओ कंसल्टिंग कंपनी द्वारा जारी किए गए हैं। यह कंपनी एक तरह की मार्केटिंग एजेंसी है, जो कि गे और लेस्बियन उपभोक्ताओं की बिजनेस टार्गेट में मदद करती है।

कंपनी का कहना है कि पेय पदार्थ ब्रांड और ट्रैवल कंपनियां इस समुदाय को कोर्ट के फैसले के बाद से ही टार्गेट कर रही हैं। एलजीबीटी बार, क्लब और कैफे से रोजगार के नए मार्ग खुल रहे हैं। ऐसा ही एक कारोबार करते हैं मुंबई के रहने वाले नक्षत्र बागवे। वह बैकपैक ट्रैवल नाम की कंपनी चलाते हैं जो कि विशेष रूप से इस समुदाय के लिए ट्रिप का आयोजन करती है।

अब कानूनी रूप से समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के बाद इस तरह के कारोबार में बढ़ोतरी होगी। वहीं एक समलैंगिक का तो यह तक कहना है कि उसने अपना हैंडबैग और कपड़ों का एक स्टोर खोला था।

जिसे 2013 में ही उसके मकान मालिक ने बंद करवा दिया। उसने कहा कि सरकार ने अब समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। जिसके कारण अब वह भी आजाद महसूस कर रही हैं। और जल्द ही अपना स्टोर दोबारा खोलेंगी। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बीते 6 सितंबर को समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था। जिसे धारा 377 के तहत अपराध माना जाता था। 

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