सुप्रीम कोर्ट: तरुण तेजपाल को बड़ा झटका, उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज; अगली सुनवाई कब?
सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार तरुण तेजपाल की आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने उन्हें 2013 के उत्पीड़न मामले में मिली 10 साल की सजा के लिए तीन हफ्ते में सरेंडर करने को कहा। आईए जानते हैं इस मामले की अगली सुनवाई कब होगी।
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पत्रकार तरुण तेजपाल को निर्देश दिया कि वह 2013 के दुष्कर्म मामले में तीन हफ्ते के भीतर आत्मसमर्पण करें, जिसमें बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी करार देते हुए 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने आत्मसमर्पण से राहत के अनुरोध वाली तेजपाल की याचिका खारिज कर दी।
पीठ ने कहा, आत्मसमर्पण से छूट के अनुरोध वाली अर्जी खारिज की जाती है। हालांकि, याचिकाकर्ता (तेजपाल) को आत्मसमर्पण करने और इस अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र दाखिल करने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया जाता है।
22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध
शीर्ष अदालत ने सजा और दोषसिद्धि के फैसले के खिलाफ दायर तेजपाल की अपील को 22 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया। हालांकि, सुनवाई के लिए उन्हें पहले आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र जमा करना होगा। पीठ ने कहा, अगर आत्मसमर्पण प्रमाणपत्र 21 सितंबर को या उससे पहले जमा किया जाता है, तो रजिस्ट्री इस आपराधिक अपील को 22 सितंबर को नियमित पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करेगी। तेजपाल की याचिका को ‘चैंबर मामलों’ की सूची में रखा गया था। ऐसे मामलों में शुरुआती या प्रक्रियागत निर्देशों के लिए सुनवाई होती है और फिर इन्हें नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया जाता है।
तेजपाल के वकील ने क्या तर्क दिया?
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने तेजपाल की सजा और दोषसिद्धि के खिलाफ अपील पर सुनवाई के लिए 22 सितंबर की तारीख तय की है। तेजपाल ने इस आधार पर आत्मसमर्पण से छूट मांगी थी कि उनकी अपील पहले सर्वोच्च न्यायालय में सूचीबद्ध और सुनवाई के लिए पेश की जानी चाहिए।
तेजपाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने तर्क दिया कि न्यायालय के पास उचित मामले में आत्मसमर्पण की आवश्यकता को समाप्त करने और आरोपी के आत्मसमर्पण न करने की स्थिति में भी आपराधिक अपील को सूचीबद्ध करने का अधिकार है।
एसजीआई ने क्या पक्ष रखा?
गोवा राज्य की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया (एसजीआई) तुषार मेहता ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि छूट के आवेदन पर मामले को ध्यान में रखते हुए विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के निष्कर्षों का हवाला देते हुए कहा कि यह मामला उत्पीड़न का एक गंभीर अपराध है, जिसके लिए तेजपाल को 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
कौन है तरुण तेजपाल?
तरुण तेजपाल तहलका मैगजीन के संस्थापक और तत्कालीन प्रधान संपादक रहे हैं। वर्ष 2013 में अपनी ही एक जूनियर महिला सहकर्मी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बाद वह विवादों में आ गए थे। शिकायत सामने आने के बाद उन्होंने छह महीने के लिए संपादक पद से हटने की घोषणा की थी ताकि मामले की निष्पक्ष जांच हो सके।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला नवंबर 2013 का है। आरोप है कि 7 और 8 नवंबर 2013 को गोवा के एक होटल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान तरुण तेजपाल ने अपनी ही जूनियर महिला सहकर्मी का यौन उत्पीड़न किया। घटना के करीब दस दिन बाद, 18 नवंबर 2013 को पीड़िता ने तहलका की तत्कालीन मैनेजिंग एडिटर शोमा चौधरी को इसकी शिकायत की। शिकायत में उन्होंने पूरी घटना का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की मांग की।
किन धाराओं में हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया गया?
हाईकोर्ट ने तरुण तेजपाल को दुष्कर्म और महिला की मर्यादा भंग करने का दोषी ठहराया । वहीं, भारतीय दंड संहिता (IPC) की चार धाराओं के तहत दोषी ठहराया।
- धारा 376(2)(f): यह धारा ऐसे मामलों पर लागू होती है, जब कोई ऐसा व्यक्ति, जो महिला के प्रति विश्वास, संरक्षण या अधिकार की स्थिति में हो, उसी स्थिति का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म करे।
- धारा 376(2)(k): यह धारा उस स्थिति से जुड़ी है, जब कोई व्यक्ति किसी महिला पर नियंत्रण, प्रभुत्व या प्रभाव की स्थिति में रहते हुए उसके साथ दुष्कर्म करता है।
- धारा 354A: यह यौन उत्पीड़न से संबंधित धारा है। इसके तहत महिला की इच्छा के विरुद्ध शारीरिक संपर्क करना, यौन संबंध बनाने का दबाव डालना, अश्लील सामग्री दिखाना या यौन टिप्पणी करना अपराध माना जाता है।
- धारा 354B: यह धारा किसी महिला के कपड़े उतारने या उसे निर्वस्त्र करने के इरादे से हमला करने या बल प्रयोग करने से संबंधित है। इस अपराध के लिए न्यूनतम तीन वर्ष और अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।