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Supreme Court: पोलावरम सिंचाई परियोजना को लेकर तेलंगाना की याचिका खारिज, नया मुकदमा दायर करने की मिली छूट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Mon, 12 Jan 2026 05:40 PM IST
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सार
सुप्रीम कोर्ट ने पोलावरम प्रोजेक्ट विवाद में तेलंगाना को सही कानूनी रास्ता अपनाने को कहा है। न्यायालय ने तकनीकी आधार पर पुरानी याचिका खारिज करते हुए अनुच्छेद 131 के तहत नया मुकदमा दायर करने की छूट दी। साथ ही, न्यायालय ने दोनों राज्यों को आपसी बातचीत और मध्यस्थता से विवाद सुलझाने का सुझाव भी दिया है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर)
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के पोलावरम बहुउद्देशीय सिंचाई परियोजना के खिलाफ तेलंगाना सरकार की याचिका खारिज कर दी। हालांकि, न्यायालय ने राज्य सरकार को संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत नया मुकदमा दायर करने की इजाजत दे दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि मौजूदा रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
न्यायालय का तर्क
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 131 केंद्र और राज्यों या दो राज्यों के बीच के कानूनी विवादों को सुलझाने के लिए है। तेलंगाना ने पहले अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की थी, जो मौलिक अधिकारों के लिए होती है। बेंच ने यह भी बताया कि इस विवाद में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य भी हितधारक हैं, लेकिन रिट याचिका में उन्हें मुकदमे का पक्षकार नहीं बनाया गया है।
तेलंगाना की दलीलें और आरोप
तेलंगाना सरकार ने केंद्र से आंध्र प्रदेश को मिल रही आर्थिक मदद और प्रोजेक्ट के विस्तार को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की सिफारिशों का उल्लंघन हुआ है। राज्य का कहना है कि मंजूरी सिर्फ 80,000 मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी) पानी मोड़ने की थी, लेकिन विस्तार प्रस्ताव में बिना मंजूरी के इसे 200 टीएमसी करने की बात है।
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न्यायालय ने किया मध्यस्थता का जिक्र
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों को विवाद सुलझाने के लिए 'मध्यस्थता' के बारे में सोचने को कहा। न्यायालय ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार प्रोजेक्ट की अगुवाई कर रही है और ऐसे मुद्दों पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई है।
नया केस जल्द होगा दायर
तेलंगाना सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने न्यायालय को बताया कि उनका नया मुकदमा तैयार है और जल्द ही दायर किया जाएगा। बाद में तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि न्यायालय ने उनकी बात धैर्य से सुनी और सही कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी। वहीं, आंध्र प्रदेश के वकील मुकुल रोहतगी ने पहले कहा था कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट को सभी राज्यों की राय लेने के बाद ही मंजूरी मिली थी।
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न्यायालय का तर्क
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 131 केंद्र और राज्यों या दो राज्यों के बीच के कानूनी विवादों को सुलझाने के लिए है। तेलंगाना ने पहले अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की थी, जो मौलिक अधिकारों के लिए होती है। बेंच ने यह भी बताया कि इस विवाद में महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्य भी हितधारक हैं, लेकिन रिट याचिका में उन्हें मुकदमे का पक्षकार नहीं बनाया गया है।
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तेलंगाना की दलीलें और आरोप
तेलंगाना सरकार ने केंद्र से आंध्र प्रदेश को मिल रही आर्थिक मदद और प्रोजेक्ट के विस्तार को चुनौती दी थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट में केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की सिफारिशों का उल्लंघन हुआ है। राज्य का कहना है कि मंजूरी सिर्फ 80,000 मिलियन क्यूबिक फीट (टीएमसी) पानी मोड़ने की थी, लेकिन विस्तार प्रस्ताव में बिना मंजूरी के इसे 200 टीएमसी करने की बात है।
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न्यायालय ने किया मध्यस्थता का जिक्र
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने दोनों पक्षों को विवाद सुलझाने के लिए 'मध्यस्थता' के बारे में सोचने को कहा। न्यायालय ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार प्रोजेक्ट की अगुवाई कर रही है और ऐसे मुद्दों पर विचार करने के लिए एक कमेटी बनाई गई है।
नया केस जल्द होगा दायर
तेलंगाना सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने न्यायालय को बताया कि उनका नया मुकदमा तैयार है और जल्द ही दायर किया जाएगा। बाद में तेलंगाना के सिंचाई मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने कहा कि न्यायालय ने उनकी बात धैर्य से सुनी और सही कानूनी रास्ता अपनाने की सलाह दी। वहीं, आंध्र प्रदेश के वकील मुकुल रोहतगी ने पहले कहा था कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट को सभी राज्यों की राय लेने के बाद ही मंजूरी मिली थी।
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