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दीपावली पर पटाखों पर रोक या छूट?: सुप्रीम कोर्ट बोला- लोगों को जागरूक करना जरूरी, प्रदूषण पर भी जताई चिंता
Mon, 12 Oct 2026 05:57 PM IST
शिवम गर्ग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिवम गर्ग
Updated Mon, 12 Oct 2026 05:57 PM IST
सार
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाने की जरूरत बताई है। अदालत ने जागरूकता और कम प्रदूषण वाले विकल्पों पर जोर दिया। पराली जलाने की समस्या पर भी चर्चा हुई।
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दीपावली से पहले सुप्रीम कोर्ट लेगा फैसला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों के इस्तेमाल और वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। साथ ही, लोगों को अदालत के सख्त आदेशों के बजाय खुद कम प्रदूषण वाले तरीकों से त्योहार मनाने के लिए आगे आना चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची व न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि अदालत धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती, लेकिन पटाखों से होने वाले नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है।
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धार्मिक भावनाएं भी जरूरी, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता नहीं
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि लोगों को स्वेच्छा से कम प्रदूषण वाले विकल्प अपनाने चाहिए। इस पूरे मामले में संतुलित नजरिया जरूरी है। उनके मुताबिक, लोगों और नागरिक समाज के बीच जागरूकता बढ़ाना इस समस्या से निपटने का प्रभावी तरीका हो सकता है।
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वहीं, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने पटाखे फोड़ने के धार्मिक आधार पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि पटाखे फोड़ने में धार्मिक क्या है? मामले में अदालत की मदद कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता और एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने वायु प्रदूषण से बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे लोगों को होने वाले नुकसान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि भगवान को पता चले कि उनके नाम पर बच्चे बीमार हो रहे हैं और उन्हें तकलीफ हो रही है, तो वे भी इससे दुखी होंगे।
सिर्फ एक-दो घंटे पटाखे चलाने का आदेश काफी नहीं
सुनवाई के दौरान पटाखे चलाने की समय सीमा तय करने और उस पर अमल कराने की व्यावहारिक चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। अपराजिता सिंह ने कहा कि अदालत में पटाखे चलाने के लिए एक या दो घंटे की सीमा तय करना अच्छा लग सकता है, लेकिन जमीन पर इसे लागू करना मुश्किल है।
उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के लिए हर समय हर सड़क पर मौजूद रहना संभव नहीं है। ऐसे में केवल समय सीमा तय करने से अपेक्षित नतीजे नहीं मिल सकते। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत को ऐसा आदेश देने से पहले बेहद सावधानी बरतनी होगी, जिसे जमीन पर लागू करना मुश्किल हो। उनके मुताबिक, यदि किसी निर्देश को प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया जा सकता, तो लोग उसे दबाव डालने वाली कार्रवाई के रूप में देख सकते हैं।
कम प्रदूषण वाले पटाखों को बढ़ावा देने पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों के नुकसान को लेकर जागरूकता बढ़ाने और कम प्रदूषण वाले विकल्पों को प्रोत्साहित करने पर भी चर्चा की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि लोगों को यह बताना जरूरी है कि कौन से पटाखे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं और कौन से अपेक्षाकृत कम हानिकारक हैं।
पीठ ने पारंपरिक तरीकों से त्योहार मनाने, दीप जलाने और फुलझड़ियों जैसे विकल्पों को बढ़ावा देने की संभावना पर भी विचार किया। साथ ही, अधिक प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों की बिक्री को नियंत्रित करने और लोगों से निर्धारित समय के भीतर ही पटाखे चलाने की अपील करने पर चर्चा हुई। अदालत ने संकेत दिया कि इस विषय से जुड़े सुझाव वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के सामने विचार के लिए रखे जा सकते हैं। आयोग दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता से जुड़े मामलों को देखता है।
पराली जलाने से निपटने के उपायों पर भी चर्चा
सुनवाई के दौरान दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण बढ़ने के एक अन्य प्रमुख कारण पराली जलाने को लेकर भी चर्चा हुई। न्यायमूर्ति बागची ने राज्यों की उन योजनाओं का जिक्र किया, जिनके तहत फसल अवशेष खरीदने और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल करने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि फसल अवशेष का अब व्यावसायिक मूल्य भी है और इससे किसानों को आर्थिक लाभ मिल सकता है। इसलिए इसके लिए बाजार विकसित करने की जरूरत है। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत को बताया कि फसल अवशेष के खेत में और खेत से बाहर प्रबंधन के लिए नीतिगत व्यवस्था मौजूद है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस समस्या से निपटने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए विस्तृत हलफनामा दाखिल करेगी।
एमिकस क्यूरी ने भी माना कि सरकार ने पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न योजनाएं और आर्थिक प्रोत्साहन शुरू किए हैं। केंद्र की ओर से अदालत में एक अद्यतन स्थिति रिपोर्ट भी पेश की जाएगी, जिसमें अब तक लागू किए गए उपायों, रोकथाम के कदमों और आगे की योजनाओं का ब्योरा होगा।
15 अक्तूबर को फिर होगी सुनवाई
दिल्ली-एनसीआर में पटाखों, पराली जलाने और ठोस कचरे के प्रबंधन समेत वायु प्रदूषण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। इस मामले में अगली सुनवाई 15 अक्तूबर को होगी।