Supreme Court: बंगाल मतदाता सूची विवाद पर अदालत सख्त, नाम हटाने वाली याचिका पर जल्द फैसला करने का दिया निर्देश
Supreme Court on Vote: पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय न्यायाधिकरण को जल्द फैसला करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता पहली नजर में राज्य के वास्तविक निवासी प्रतीत होते हैं। शीर्ष अदालत ने न्यायाधिकरण से दो महीने के भीतर मामले का निपटारा करने को कहा है। यह मामला मतदाता सूची संशोधन से जुड़े बड़े विवाद के बीच सामने आया है। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने एक वरिष्ठ वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपीलीय न्यायाधिकरण को निर्देश दिया कि वह मामले का जल्द निपटारा करे। अदालत ने कहा कि पहली नजर में याचिकाकर्ता पश्चिम बंगाल के वास्तविक निवासी प्रतीत होते हैं। इस टिप्पणी के बाद मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया और उससे जुड़े विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला 75 वर्षीय एक वकील से जुड़ा है, जिनका नाम विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटा दिया गया था। याचिकाकर्ता के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह पिछले करीब 50 वर्षों से वकालत कर रहे हैं और एसआईआर से पहले वैध मतदाता थे। नाम हटाए जाने के खिलाफ उन्होंने अपीलीय न्यायाधिकरण में अपील दायर की थी, लेकिन उस पर अब तक फैसला नहीं हुआ। इसी के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या टिप्पणी की?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता पश्चिम बंगाल के वास्तविक निवासी दिखाई देते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को उस व्यवस्था की जानकारी है जो मतदाता सूची से जुड़े विवादों के समाधान के लिए बनाई गई है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर विस्तृत टिप्पणी किए बिना अपीलीय न्यायाधिकरण को याचिका पर शीघ्र निर्णय लेने का निर्देश दिया।
न्यायाधिकरण को क्या निर्देश दिए गए?
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए अपीलीय न्यायाधिकरण से कहा कि वह मामले पर तेजी से सुनवाई करे और संभव हो तो दो महीने के भीतर फैसला सुनाए। अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिकाकर्ता 1977 से मुर्शिदाबाद में वकालत कर रहे हैं और उनका नाम एसआईआर प्रक्रिया के दौरान हटाया गया था। इससे पहले भी अदालत ने मतदाता सूची से नाम हटने से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए विशेष व्यवस्था बनाई थी।
एसआईआर के बाद कितने मामलों की सुनवाई हो रही है?
विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए नामों को लेकर करीब 60 लाख दावे और आपत्तियां सामने आई थीं। इन मामलों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड के लगभग 700 न्यायिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 19 अपीलीय न्यायाधिकरण गठित किए, जिनकी अध्यक्षता पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और न्यायाधीशों को सौंपी गई। अब इन न्यायाधिकरणों के सामने बड़ी संख्या में अपीलें लंबित हैं।