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Supreme Court: अगस्थ्यामलई में अतिक्रमण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,118 सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
पीटीआई, नई दिल्ली।
Published by: Rahul Kumar
Updated Tue, 02 Jun 2026 03:47 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु और केरल में फैले अगस्थ्यामलई पारिस्थितिक परिदृश्य के संरक्षित वन क्षेत्रों में लंबे समय से जारी अतिक्रमण पर गंभीर रुख अपनाया है। अदालत ने प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध अतिक्रमण हटाओ योजना तैयार कर उसे लागू करने का निर्देश दिया है। साथ ही अतिक्रमण में शामिल पाए गए 118 सेवारत और सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई शुरू करने के आदेश भी दिए हैं।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि कलाकड-मुंडनथुरई टाइगर रिजर्व, श्रीविल्लिपुथुर-मेघमलाई टाइगर रिजर्व और कन्याकुमारी वन्यजीव अभयारण्य सहित अगस्थ्यामलई के संरक्षित क्षेत्रों में दशकों से अतिक्रमण जारी है। यह स्थिति मद्रास हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद बनी हुई है।
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अदालत ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला केवल प्रशासनिक जवाबदेही या नियमों के पालन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय शासन और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण से जुड़ा है। पीठ ने कहा कि राज्य का संवैधानिक दायित्व है कि वह नाजुक पारिस्थितिक क्षेत्रों और संकटग्रस्त वन्यजीवों की रक्षा वर्तमान और भावी पीढ़ियों के हित में सुनिश्चित करे। यह आदेश 29 मई को उस याचिका पर सुनाया गया, जिसमें तमिलनाडु के आरक्षित वनों, वन्यजीव अभयारण्यों और बाघ अभयारण्यों के संरक्षण से जुड़े मुद्दे उठाए गए थे।
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सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि एक समयबद्ध और मंडल-वार अतिक्रमण निष्कासन योजना तैयार की जाए, जिसमें स्पष्ट समय-सीमा, तय लक्ष्य और जिम्मेदार अधिकारियों का उल्लेख हो। इस योजना को एक महीने के भीतर केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के समक्ष प्रस्तुत करना होगा।
अदालत ने कहा कि योजना में केवल अतिक्रमण हटाने तक ही सीमित न रहकर, जहां आवश्यक हो वहां पुनर्वास, जानबूझकर उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और अतिक्रमण हटने के बाद पारिस्थितिक बहाली के उपाय भी शामिल होने चाहिए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि खाली कराई गई वन भूमि पर दोबारा कब्जा न हो।
पीठ ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया कि तमिलनाडु सरकारी सेवक आचरण नियम, 1973 के तहत अतिक्रमणकारी पाए गए सभी 118 वर्तमान और पूर्व सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। अदालत ने यह भी कहा कि राज्य ऐसे मामलों में अतिरिक्त दंड लगाने पर विचार करे और संबंधित व्यक्तियों से पर्यावरणीय क्षति की भरपाई तथा पुनर्स्थापन के लिए उपयुक्त शुल्क तमिलनाडु CAMPA को जमा कराने की व्यवस्था करे।