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तमिलनाडु: 15 हजार यौन अपराधियों पर पुलिस की नजर, रंगों के आधार पर होगी निगरानी; क्या है स्पेक्ट्रम परियोजना?

Mon, 29 Jun 2026 10:01 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चेन्नई Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Mon, 29 Jun 2026 10:01 AM IST
सार

Tamil Nadu Spectrum Project: तमिलनाडु पुलिस ने स्पेक्ट्रम परियोजना शुरू की है, जिसके तहत 15,000 यौन अपराधियों की रंग आधारित श्रेणियों में प्रोफाइलिंग और निगरानी की जाएगी। इस योजना का उद्देश्य गंभीर और आदतन अपराधियों पर कड़ी नजर रखना है। पुलिस आरोपियों के बायोमेट्रिक डाटा भी जुटा रही है। यह परियोजना फिलहाल दक्षिण तमिलनाडु के 10 जिलों में लागू की गई है। आइए, विस्तार से तमिलमाडु पुलिस की इस पहल को समझते हैं...

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Tamil Nadu Spectrum Project Colour-Coded Tracking System to Monitor 15000 Molester crime Offenders
क्या है तमिलनाडु पुलिस की नई पहल? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

यौन अपराधों पर लगाम लगाने और दोबारा अपराध करने वालों पर कड़ी नजर रखने के लिए तमिलनाडु पुलिस ने एक नई पहल शुरू की है। अब सामूहिक दुष्कर्म के आरोपी, बार-बार छेड़छाड़ करने वाले और साइबर यौन अपराधियों को एक ही श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। तमिलनाडु पुलिस ने 'स्पेक्ट्रम' नामक एक विशेष निगरानी परियोजना शुरू की है, जिसके तहत करीब 15,000 यौन अपराधियों की प्रोफाइल तैयार कर उनकी जोखिम के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में निगरानी की जाएगी। इस पहल का मकसद गंभीर अपराधियों की पहचान कर उन पर लगातार नजर रखना है।
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तमिलनाडु पुलिस की यह परियोजना राज्य के दक्षिणी क्षेत्र के 10 जिलों में लागू की गई है। इनमें मदुरै, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन और कन्याकुमारी जैसे जिले शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, इन जिलों में हर साल 1500 से 2000 यौन अपराध के मामले दर्ज होते हैं। इनमें छेड़छाड़, पीछा करना, पॉक्सो कानून के तहत दर्ज मामले और दुष्कर्म जैसे अपराध शामिल हैं। 'स्पेक्ट्रम' का पूरा नाम 'सेक्सुअल ऑफेंडर प्रोफाइलिंग, इवैल्यूएशन, क्लासिफिकेशन, ट्रैकिंग, रिस्क असेसमेंट एंड यूनिफाइड मॉनिटरिंग सिस्टम' है।
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क्या है स्पेक्ट्रम परियोजना और यह कैसे काम करेगी?

इस परियोजना के तहत यौन अपराध के आरोपियों को उनके अपराध की गंभीरता और दोबारा अपराध करने की आशंका के आधार पर आठ अलग-अलग रंगों की श्रेणियों में रखा जाएगा। पुलिस का कहना है कि रेड और ऑरेंज श्रेणी के अपराधियों पर सबसे ज्यादा नजर रखी जाएगी। इन आरोपियों की गतिविधियों, जमानत की स्थिति और आपराधिक रिकॉर्ड की नियमित समीक्षा की जाएगी। जरूरत पड़ने पर ऐसे आरोपियों से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 126 के तहत बांड भी भरवाया जा सकता है।

किन अपराधियों को किस रंग की श्रेणी में रखा गया है?

रंग कोड अपराध की श्रेणी
लाल (Red) खतरनाक यौन अपराधी, सामूहिक यौन अपराधी
नारंगी (Orange) बार-बार यौन अपराध करने वाले अपराधी
नीला (Blue) साइबर यौन अपराधी
काला (Black) संगठित अपराध, जिसमें मानव तस्करी जैसे अपराध शामिल
सिल्वर (Silver) किशोर अपराधी
बैंगनी (Purple) समलैंगिक अपराध
गुलाबी (Pink) छेड़छाड़ करने वाले, बिना शारीरिक संपर्क वाले यौन अपराधी
हरा (Green) अलग-थलग या कम गंभीरता वाले अपराध

क्या पुलिस आरोपियों का बायोमेट्रिक डाटा भी जुटा रही है?

तमिलनाडु पुलिस ने इस वर्ष दक्षिणी क्षेत्र में 'मेजरमेंट कैप्चरिंग यूनिट' (एमसीयू) भी शुरू की है। इसके तहत आरोपियों के फिंगरप्रिंट, हथेली के निशान, आइरिस स्कैन, लंबाई और हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें दर्ज की जा रही हैं। पुलिस का मानना है कि इससे भविष्य में अनसुलझे मामलों की जांच और अपराधियों की पहचान में मदद मिलेगी। साइबर अपराधियों के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी निगरानी की जा रही है।

क्या इस परियोजना का फोकस दोबारा अपराध करने वालों पर है?

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पहली बार अपराध करने वाले और कम जोखिम वाले मामलों की तुलना में आदतन और गंभीर अपराधियों पर ज्यादा ध्यान देना है। खासकर ऐसे आरोपी जो बार-बार अपराध करते हैं या समाज के लिए बड़ा खतरा माने जाते हैं, उन्हें लगातार निगरानी में रखा जाएगा। किशोर आरोपियों के मामलों में सुधार और परामर्श पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि उन्हें मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।
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