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Politics: शशि थरूर ने नए संसद भवन को बताया 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर', बोले- पुरानी इमारत में अपनापन था

Fri, 21 Aug 2026 04:00 AM IST
Pavan पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: Pavan Updated Fri, 21 Aug 2026 04:00 AM IST
सार

कांग्रेस नेता शशि थरूर ने नए संसद भवन को ‘बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर’ बताते हुए कहा कि इसमें पुराने भवन जैसा अपनापन और अनौपचारिक बातचीत का माहौल नहीं है। उन्होंने सेंट्रल हॉल की कमी और लोकसभा में 850 सांसदों की प्रस्तावित संख्या पर भी चिंता जताई।

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Tharoor calls new Parliament building 'soulless conference centre', lacking in intimacy
शशि थरूर, सांसद, कांग्रेस - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने नए संसद भवन की डिजाइन और वहां के माहौल पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नए संसद भवन को 'बेजान कॉन्फ्रेंस सेंटर' बताते हुए कहा कि इसमें पुराने संसद भवन जैसा अपनापन और सहज बातचीत का माहौल नहीं है। उनके मुताबिक, इमारत की बनावट संसद में बढ़ती राजनीतिक दूरी और ध्रुवीकरण का प्रतीक जैसी लगती है। थरूर ने यह बात पत्रकार और लेखिका शोभना के. नायर की नई किताब 'हाउसिंग द रिपब्लिक: ए बायोग्राफी ऑफ द इंडियन पार्लियामेंट' के विमोचन के दौरान कही।
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ऊंची छत और दूर-दूर बैठने की व्यवस्था पर सवाल
थरूर ने कहा कि नए संसद भवन की छत काफी ऊंची है। इससे सदस्यों के बीच सहज बातचीत और एक-दूसरे से जुड़ने की संभावना कम होती है। उन्होंने कहा कि पुराने संसद भवन के कक्षों में एक तरह का अपनापन था, जो सांसदों के बीच बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देता था। उन्होंने नए भवन में सांसदों के बैठने की पंखे जैसी व्यवस्था का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, यहां सदस्यों के बीच एक तरह की दूरी दिखाई देती है। थरूर ने इसे देश की राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण से जोड़ते हुए कहा कि संसद की इमारत का यह बदलाव भी मौजूदा राजनीतिक माहौल का प्रतीक लगता है।
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सेंट्रल हॉल की कमी का भी जिक्र
चार बार के तिरुवनंतपुरम सांसद थरूर ने नए संसद भवन में सेंट्रल हॉल नहीं होने को भी महत्वपूर्ण कमी बताया। उन्होंने कहा कि पुराने संसद भवन का सेंट्रल हॉल सांसदों के बीच अनौपचारिक बातचीत का अहम स्थान था। उनके मुताबिक, वहां मौजूदा और पूर्व सांसदों के साथ-साथ पर्यवेक्षकों और मीडिया के लोगों के बीच भी अनौपचारिक बातचीत होती थी। इससे अलग-अलग दलों के नेताओं के बीच संबंध और आपसी संवाद मजबूत होता था। थरूर ने कहा कि नए भवन में ऐसे अनौपचारिक संवाद की जगह कम हो गई है।

लोकसभा में 850 सांसदों की संख्या पर जताई चिंता
थरूर ने प्रस्तावित लोकसभा विस्तार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि अगर लोकसभा में सांसदों की संख्या बढ़ाकर 850 की जाती है तो भले ही नए भवन में इसके लिए जगह हो, लेकिन इससे सार्थक संसदीय बहस और चर्चा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने आशंका जताई कि बड़ी संख्या में सांसद होने पर सदस्य एक-दूसरे के लिए अजनबी जैसे हो सकते हैं। उन्होंने चीन की संसद जैसी स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर सांसद केवल नेता की घोषणाओं पर एक साथ मेज थपथपाने तक सीमित रह जाएं, तो यह संसद के वास्तविक उद्देश्य के अनुरूप नहीं होगा।

पुरानी संसद की एक परेशानी जरूर खत्म हुई
हालांकि, थरूर ने नए संसद भवन की एक सुविधा की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि पुराने भवन में सीटों की व्यवस्था के कारण सांसदों को अपनी जगह तक पहुंचने के लिए एक-दूसरे के घुटनों के पास से निकलना पड़ता था और कई बार काफी असुविधा होती थी। नए भवन में यह समस्या खत्म हो गई है।


जॉन ब्रिटास ने भी नए भवन पर उठाए सवाल
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास भी मौजूद थे। उन्होंने भी नए संसद भवन की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी खूबसूरती या डिजाइन में कुछ खास पसंद नहीं है। ब्रिटास ने कहा कि केवल नई इमारत बना देने से संसद या संसदीय चर्चा मजबूत नहीं होती। असली सवाल यह है कि संसद में बहस और चर्चा की गुणवत्ता कैसी है। उन्होंने दावा किया कि संसदीय बहस का स्तर सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया है। उन्होंने नए संसद भवन की निर्माण लागत को लेकर भी सवाल उठाया। ब्रिटास ने कहा कि पुरानी संसद भवन के निर्माण पर हुए खर्च की जानकारी सार्वजनिक थी, लेकिन नए भवन की वास्तविक लागत पूछने पर उन्हें जवाब मिला कि यह जानकारी गोपनीय है।

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2023 में हुआ था नए संसद भवन का उद्घाटन
नए संसद भवन का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 में किया था। यह सरकार की महत्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है। चार मंजिला इस भवन को पुराने संसद भवन के सामने बनाया गया है। इसमें पहले की तुलना में अधिक सांसदों के बैठने की क्षमता और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस कार्यक्रम के दौरान जारी शोभना के. नायर की किताब हाउसिंग द रिपब्लिक में भारत की संसद के इतिहास और उसके बदलते स्वरूप को बताया गया है। किताब में 1919 में संसद भवन के शुरुआती इतिहास से लेकर 2023 में नए भवन के निर्माण तक की यात्रा को शामिल किया गया है।
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