सुप्रीम कोर्ट: अभिषेक बनर्जी के ऑफिस से जुड़े बोर्ड विवाद पर शीर्ष अदालत ने क्या कहा, अब क्या करेगी टीएमसी?
टीएमसी के कैमक स्ट्रीट कार्यालय से कथित अनधिकृत साइनबोर्ड हटाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, लेकिन शीर्ष अदालत ने सीधे राहत देने के बजाय पार्टी को अपनी सभी दलीलें कलकत्ता हाईकोर्ट में रखने को कहा। बोर्ड पहले ही हटाया जा चुका है। ऐसे में क्या टीएमसी को हाईकोर्ट से राहत मिलेगी और क्या नगर निगम की कार्रवाई पर कोई सवाल उठेगा? आइए, पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं....
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विस्तार
कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित टीएमसी कार्यालय से पार्टी का कथित तौर पर अनधिकृत साइनबोर्ड हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। पार्टी ने कलकत्ता हाईकोर्ट के अंतरिम राहत नहीं देने के फैसले को चुनौती दी थी। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने मामले में सीधे हस्तक्षेप करने के बजाय टीएमसी को अपनी सभी दलीलें हाईकोर्ट के सामने रखने को कहा। अब सवाल है कि जिस बोर्ड को नगर निगम पहले ही हटा चुका है, उस पर टीएमसी को अदालत से क्या राहत मिल सकती है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने टीएमसी से कहा कि साइनबोर्ड हटाने से जुड़े सभी पक्षों को कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने रखा जाए। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें हाईकोर्ट में रखने की छूट दी और टीएमसी की याचिका का निपटारा कर दिया। साथ ही हाईकोर्ट से कहा गया कि वह सभी पक्षों की दलीलों पर जल्द फैसला करे।
टीएमसी सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंची थी?
टीएमसी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने पार्टी के साइनबोर्ड को हटाए जाने के मामले में शीर्ष अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। यह याचिका कलकत्ता हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दाखिल की गई थी, जिसमें हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया था। टीएमसी का मामला दक्षिण कोलकाता के 9, कैमक स्ट्रीट स्थित उस इमारत से जुड़ा है, जहां टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का कार्यालय भी है।
साइनबोर्ड हटाने को लेकर विवाद क्या है?
विवाद उस कथित तौर पर अनधिकृत साइनबोर्ड को लेकर है, जिस पर टीएमसी का चिन्ह लगा था। कोलकाता नगर निगम ने पुलिस की मदद से कैमक स्ट्रीट स्थित इमारत से इस बोर्ड को हटाया था। टीएमसी ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। पार्टी की ओर से मामले में राहत की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने तत्काल रोक लगाने का आदेश नहीं दिया।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत क्यों नहीं दी?
28 अगस्त को कलकत्ता हाईकोर्ट ने टीएमसी की याचिका पर अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने कहा था कि कैमक स्ट्रीट स्थित परिसर से साइनबोर्ड को कोलकाता नगर निगम पहले ही हटा चुका है। ऐसे में फिलहाल उस कार्रवाई पर अंतरिम सुरक्षा देने की गुंजाइश नहीं है। इसके बाद टीएमसी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन शीर्ष अदालत ने भी मामले के गुण-दोष पर तत्काल फैसला देने के बजाय सभी दलीलें हाईकोर्ट के सामने रखने को कहा।
अब इस मामले में आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के सोमवार के आदेश के बाद टीएमसी और मामले से जुड़े दूसरे पक्ष अपनी सभी दलीलें कलकत्ता हाईकोर्ट के सामने रख सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट से इन दलीलों पर जल्द फैसला करने को कहा है। फिलहाल साइनबोर्ड हटाया जा चुका है और शीर्ष अदालत ने उसे वापस लगाने या कार्रवाई पर रोक लगाने का कोई आदेश नहीं दिया है। अब इस विवाद में अगली बड़ी भूमिका कलकत्ता हाईकोर्ट की होगी।