अदाणी के फायदे के लिए बनी ‘समुद्र मंथन’ योजना?: कांग्रेस ने सरकार की नियत पर उठाए सवाल; लगाए गंभीर आरोप
कांग्रेस ने मोदी सरकार की ‘समुद्र मंथन’ योजना अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए शुरू की गई है। पार्टी ने मांग की कि या तो इस योजना को रद्द किया जाए या फिर इसके लिए तय 84,084 करोड़ रुपये की पूरी राशि सरकारी ऊर्जा कंपनी ONGC को दी जाए, ताकि तेल और गैस की खोज को बढ़ावा देने के साथ नौकरियां भी पैदा की जा सकें।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कांग्रेस ने सोमवार को ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय ऑफशोर खोज योजना पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसके जरिए अदाणी समूह की कंपनी वेल स्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड (AWEL) को फायदा पहुंचाया जा सकता है। पार्टी ने योजना को रद्द करने या इसके लिए स्वीकृत 84,084 करोड़ रुपये ONGC को देने की मांग की है। वहीं, सरकार के अनुसार योजना का उद्देश्य भारत की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, घरेलू तेल-गैस खोज और उत्पादन बढ़ाना तथा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करना है। सरकार या अदाणी समूह की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
'अदाणी की कंपनी को होगा सीधा फायदा'
कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले महीने ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी दी थी। इसके पहले चरण के लिए 84,084 करोड़ रुपये का ‘भारी-भरकम’ बजट मंजूर किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोहिल ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने एक ऐसा ढांचा तैयार किया है, जिसके तहत ‘समुद्र मंथन’ योजना के जरिए अडानी समूह को मदद पहुंचाई जाएगी। गोहिल ने बिना ज्यादा विस्तार से आरोप लगाया कि ‘समुद्र मंथन’ योजना गौतम अडानी की कंपनी ‘वेल स्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड’ को फायदा पहुंचाने के लिए तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत सरकार खोज और अन्वेषण से जुड़े खर्च में 50 प्रतिशत तक की आर्थिक मदद देगी। गोहिल ने बताया कि सरकार ने खुद माना है कि यह योजना तेल और गैस की खोज से जुड़े जोखिम को कम करने तथा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई है। लेकिन सरकार ने यह साफ नहीं किया है कि यह योजना गौतम अदाणी को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई गई है। गोहिल ने दावा किया कि यह योजना खास तौर पर अडानी समूह को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
'AWEL में अदाणी की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी'
गोहिल ने कहा कि वेल स्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड में अडानी की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जिसे उन्होंने वर्ष 2005 में खरीदा था। बाकी 35 प्रतिशत हिस्सेदारी ‘वेल स्पन ग्रुप’ के पास है।
‘समुद्र मंथन’ अडानी समूह के लिए ‘अमृत काल’ साबित होगा। बता दें कि ‘समुद्र मंथन’ योजना के तहत भारत सरकार गहरे समुद्र में कुओं की ड्रिलिंग, 2D और 3D सिस्मिक सर्वे, मौजूदा भूवैज्ञानिक डेटा की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित री-प्रोसेसिंग, ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और अडानी के नेतृत्व वाली AWEL द्वारा की जाने वाली सभी संबंधित व्यावसायिक गतिविधियों की लागत का 50 प्रतिशत उठाएगी।
गहरे समुद्र में एक कुएं की खोज पर 1,100 करोड़ से ज्यादा खर्च
कांग्रेस नेता ने कहा कि तेल और गैस की खोज का काम बेहद महंगा होता है। उनके मुताबिक, औसतन गहरे समुद्र में सिर्फ एक कुएं की खोज पर 1,100 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आता है। अदाणी की कंपनी AWEL के पास मुंबई ऑफशोर बेसिन के B-9 क्लस्टर, MB-OSN-2005/2 ब्लॉक, तापी-दमन और कच्छ में खोज करने के अधिकार हैं। जबकि AWEL ने घोषणा की है कि वह अगले कुछ महीनों में बड़े पैमाने पर तेल और गैस की खोज का काम शुरू करेगी।
सरकारी फंड और संसाधनों के इस्तेमाल का आरोप
गोहिल ने आरोप लगाया कि AWEL अब केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड और पाइपलाइन सहित अन्य सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल कर अपना कामकाज शुरू कर सकती है। आखिर इस राष्ट्रीय मिशन में ONGC को मुख्य भूमिका क्यों नहीं दी जा रही है? मोदी सरकार सिर्फ एक निजी कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए अपनी ही कंपनी ONGC के हितों को नुकसान क्यों पहुंचा रही है, जबकि ONGC के पास दशकों से तेल और गैस की खोज का अनुभव है।
'योजना रद्द हो या ONGC को मिले पूरी रकम'
गोहिल ने कहा कि हमारी मांग है कि ‘समुद्र मंथन’ योजना को रद्द कर दिया जाए या 84,084 करोड़ रुपये की पूरी राशि सरकार की अपनी सार्वजनिक क्षेत्र की बड़ी ऊर्जा कंपनी ONGC को दी जाए, ताकि नौकरियां पैदा हों और तेल-गैस की खोज का काम आसान हो सके।
केंद्रीय कैबिनेट ने दी ‘समुद्र मंथन’ योजना को मंजूरी
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ यानी राष्ट्रीय ऑफशोर खोज योजना को मंजूरी दी है। यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केंद्रीय योजना है। इसे वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू किया जाना है और इसके लिए 84,084 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है।
ये भी पढ़ें: गुजरात: नवरात्रि की रात नाबालिग से हुआ था सामूहिक दुष्कर्म, वडोदरा कोर्ट ने दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा
ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में अहम कदम
सरकार की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, 'यह योजना प्रधानमंत्री के उस विजन को साकार करती है, जिसे उन्होंने 2025 में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से ‘आधुनिक समुद्र मंथन’ के तौर पर पेश किया था, ताकि भारत की विशाल ऑफशोर ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल किया जा सके।' सरकार के मुताबिक, यह योजना भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, घरेलू स्तर पर तेल और गैस की खोज एवं उत्पादन में तेजी लाने, तकनीकी नेतृत्व को बढ़ावा देने और ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक 'अहम कदम' है।