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अदालत से अभिषेक बनर्जी को आंशिक राहत: अमातला में पार्टी ऑफिस गिराने पर रोक, कलकत्ता हाई कोर्ट ने क्या कहा?
Sun, 19 Jul 2026 04:20 PM IST
Pavan
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: Pavan
Updated Sun, 19 Jul 2026 04:20 PM IST
सार
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दक्षिण 24 परगना के अमातला में तृणमूल कांग्रेस के ऑफिस पर कार्रवाई के मामले में पार्टी के सांसद अभिषेक बनर्जी को आंशिक राहत दी है। हाईकोर्ट ने मामले में तोड़-फोड़ अभियान पर रोक लगा दी है। पढ़ें कोर्ट ने क्या कुछ कहा है...
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कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा आदेश
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद अभिषेक बनर्जी के दक्षिण 24 परगना जिले के आमतला स्थित डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र के कार्यालय को गिराने की कार्रवाई पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत ने रविवार को मामले की विशेष सुनवाई करते हुए जुलाई महीने के अंत तक भवन को लेकर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। न्यायमूर्ति राजा बसु चौधरी ने रविवार को विशेष बैठक के दौरान राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह आमतला स्थित इस भवन से जुड़े सभी दस्तावेज अदालत में पेश करे। अदालत ने कहा कि मामले की अगली सुनवाई नियमित पीठ के समक्ष होगी।
यह भवन 'लीप्स एंड बाउंड्स' कंपनी का बताया जा रहा है। इसी कंपनी ने भवन तोड़े जाने की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक अन्य मामले में अभिषेक बनर्जी को इस कंपनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बताया है।
यह भी पढ़ें- Rajya Sabha: पिछले दो साल में राज्यसभा सांसदों पर 262 करोड़ रुपये से अधिक किया गया खर्च, RTI में हुआ खुलासा
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शनिवार को शुरू हुई थी बुलडोजर कार्रवाई
दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने शनिवार को आमतला स्थित इस कार्यालय को गिराने की कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन का कहना था कि भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाया गया है और निर्माण में लागू नियमों का उल्लंघन किया गया है। इसी आधार पर इसे अवैध निर्माण मानते हुए कार्रवाई की गई।
अभिषेक बनर्जी ने बताया था वैध निर्माण
अभिषेक बनर्जी ने प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि यह उनका संसदीय क्षेत्र का कार्यालय है। उनका कहना है कि भवन खरीदी गई जमीन पर बनाया गया है और इसके लिए सभी जरूरी सरकारी अनुमति ली गई थी। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को अनुचित बताया था।
यह भी पढ़ें- मानसून सत्र: चढ़ावा चोरी से वांगचुक के मुद्दों पर सरकार को घेरेगा विपक्ष, अमित शाह पेश करेंगे कौन सा विधेयक?
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जुलाई के अंत तक भवन पर किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। इस दौरान राज्य सरकार को निर्माण से जुड़े सभी रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश करने होंगे, जिसके बाद नियमित पीठ इस मामले में आगे का फैसला करेगी।
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यह भवन 'लीप्स एंड बाउंड्स' कंपनी का बताया जा रहा है। इसी कंपनी ने भवन तोड़े जाने की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक अन्य मामले में अभिषेक बनर्जी को इस कंपनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बताया है।
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शनिवार को शुरू हुई थी बुलडोजर कार्रवाई
दक्षिण 24 परगना जिला प्रशासन ने शनिवार को आमतला स्थित इस कार्यालय को गिराने की कार्रवाई शुरू की थी। प्रशासन का कहना था कि भवन बिना स्वीकृत नक्शे के बनाया गया है और निर्माण में लागू नियमों का उल्लंघन किया गया है। इसी आधार पर इसे अवैध निर्माण मानते हुए कार्रवाई की गई।
अभिषेक बनर्जी ने बताया था वैध निर्माण
अभिषेक बनर्जी ने प्रशासन के दावों को खारिज करते हुए कहा था कि यह उनका संसदीय क्षेत्र का कार्यालय है। उनका कहना है कि भवन खरीदी गई जमीन पर बनाया गया है और इसके लिए सभी जरूरी सरकारी अनुमति ली गई थी। उन्होंने प्रशासन की कार्रवाई को अनुचित बताया था।
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अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद जुलाई के अंत तक भवन पर किसी तरह की तोड़फोड़ नहीं की जाएगी। इस दौरान राज्य सरकार को निर्माण से जुड़े सभी रिकॉर्ड अदालत के सामने पेश करने होंगे, जिसके बाद नियमित पीठ इस मामले में आगे का फैसला करेगी।