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West Bengal: बंगाल में अवैध मदरसों पर बड़े एक्शन की तैयारी, समीक्षा के लिए 18 सदस्यीय समिति गठित
Sun, 12 Jul 2026 03:33 PM IST
नितिन गौतम
आईएएनएस, अमर उजाला
आईएएनएस, अमर उजाला
Published by: नितिन गौतम
Updated Sun, 12 Jul 2026 03:33 PM IST
सार
बंगाल सरकार पर अवैध मदरसों के खिलाफ एक्शन की तैयारी कर रही है। इसके तहत एक 18 सदस्यीय समिति गठित की गई है, जो राज्य में मदरसों की समीक्षा करेगी।
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मदरसा।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम बंगाल के अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग ने राज्य के 12 जिलों में संचालित अवैध और गैर-मान्यता प्राप्त मदरसों की पहचान के लिए चल रहे सर्वेक्षण की समीक्षा हेतु 18 सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिन्हें आमतौर पर 'खारिजी मदरसा' कहा जाता है। जानकारी के अनुसार यह समिति 15 जुलाई से संबंधित जिलों का दौरा शुरू करेगी और 21 जुलाई तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग को सौंपेगी। समिति की सिफारिशों के आधार पर विभाग आगे की प्रशासनिक कार्रवाई करेगा।
इन जिलों में अवैध मदरसों की समीक्षा होगी
जिन 12 जिलों में समीक्षा की जाएगी, उनमें कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, नदिया, हुगली, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना शामिल हैं। जून के पहले सप्ताह में राज्य सरकार ने जिला अधिकारियों (डीएम) को निर्देश जारी कर अपने-अपने जिलों में संचालित मदरसों की विस्तृत रिपोर्ट 5 जुलाई तक राज्य सचिवालय नबान्न को भेजने को कहा था। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जिला अधिकारियों से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर इन 12 जिलों की पहचान की गई है, जहां बड़ी संख्या में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित होने की आशंका है। इसी वजह से अंतिम प्रशासनिक निर्णय लेने से पहले इन जिलों में दूसरी बार विस्तृत समीक्षा कराने का फैसला किया गया है।
मदरसों से मांगी गई ये जानकारियां
पहले जारी निर्देश में जिला अधिकारियों से प्रत्येक मदरसे की स्थापना तिथि, अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग में उसका पंजीकरण, पंजीकरण का विवरण, छात्र-छात्राओं की संख्या, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की जानकारी, मदरसा आवासीय है या नहीं तथा वहां पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। उससे पहले, इसी साल मई में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित पश्चिम बंगाल की नई सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, खुदीराम टुडू ने घोषणा की थी कि राज्य प्रशासन अवैध रूप से संचालित मदरसों पर कार्रवाई करेगा।
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उन्होंने यह भी कहा कि एक बार पहचान हो जाने पर, ऐसे अवैध रूप से संचालित मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, और मदरसों के नाम पर ऐसी अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को भी दंडित किया जाएगा।
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इन जिलों में अवैध मदरसों की समीक्षा होगी
जिन 12 जिलों में समीक्षा की जाएगी, उनमें कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर, नदिया, हुगली, हावड़ा, उत्तर 24 परगना और दक्षिण 24 परगना शामिल हैं। जून के पहले सप्ताह में राज्य सरकार ने जिला अधिकारियों (डीएम) को निर्देश जारी कर अपने-अपने जिलों में संचालित मदरसों की विस्तृत रिपोर्ट 5 जुलाई तक राज्य सचिवालय नबान्न को भेजने को कहा था। सरकारी अधिकारियों के अनुसार, जिला अधिकारियों से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्टों के आधार पर इन 12 जिलों की पहचान की गई है, जहां बड़ी संख्या में गैर-मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित होने की आशंका है। इसी वजह से अंतिम प्रशासनिक निर्णय लेने से पहले इन जिलों में दूसरी बार विस्तृत समीक्षा कराने का फैसला किया गया है।
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मदरसों से मांगी गई ये जानकारियां
पहले जारी निर्देश में जिला अधिकारियों से प्रत्येक मदरसे की स्थापना तिथि, अल्पसंख्यक मामलों एवं मदरसा शिक्षा विभाग में उसका पंजीकरण, पंजीकरण का विवरण, छात्र-छात्राओं की संख्या, शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की जानकारी, मदरसा आवासीय है या नहीं तथा वहां पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी मांगी गई थी। उससे पहले, इसी साल मई में, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित पश्चिम बंगाल की नई सरकार में अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, खुदीराम टुडू ने घोषणा की थी कि राज्य प्रशासन अवैध रूप से संचालित मदरसों पर कार्रवाई करेगा।
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उन्होंने यह भी कहा कि एक बार पहचान हो जाने पर, ऐसे अवैध रूप से संचालित मदरसों को बंद कर दिया जाएगा, और मदरसों के नाम पर ऐसी अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों को भी दंडित किया जाएगा।