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Bengal: SIR को लेकर मतुआ समुदाय में आक्रोश, आज राज्यभर में विरोध प्रदर्शन का एलान; जानें क्या है मुख्य मांगें

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: शुभम कुमार Updated Mon, 05 Jan 2026 01:04 AM IST
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सार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासत गरमा गई है। मतुआ समुदाय ने वैध नाम हटाए जाने और एक गोसाय पर कथित हमले का आरोप लगाया है। इसी के विरोध में टीएमसी समर्थित मतुआ समुदाय ने राज्यभर में सड़क जाम का एलान किया है।

West Bengal Matua community is outraged over the SIR and has announced protests across the state today
सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार

पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य में हो रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सियासी गर्माहट तेज हो गई है। खासतौर पर मतुआ समुदाय में नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी गुस्से के चलते टीएमसी समर्थित ऑल इंडिया मतुआ महासंघ के एक गुट ने सोमवार को पूरे राज्य में सड़क जाम का आह्वान किया है। मतुआ महासंघ का आरोप है कि राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। उनका कहना है कि इससे मतुआ समुदाय को खास तौर पर नुकसान हो रहा है।

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इस विरोध की तात्कालिक वजह की बात करें तो, इसकी बड़ा कारण श्यामनगर के एक मतुआ ‘गोसाय’ (धार्मिक गुरु) पर हुआ कथित हमला है। बताया गया कि गोसाय अपना नाम वोटर लिस्ट से हटने के बाद जवाब मांगने के लिए उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर मंदिर परिसर पहुंचे थे, जहां उनके साथ कथित तौर पर मारपीट हुई।
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क्या होगी महासंघ की मांगे?
मतुआ महासंघ का आरोप है कि भाजपा और आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं ने केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के इशारे पर मतुआ धार्मिक नेताओं पर सुनियोजित हमला किया। महासंघ ने कहा कि सोमवार को होने वाले सड़क जाम के दौरान गोसाय पर हुए हमले की तुरंत जांच और वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को दोबारा जोड़ने की मांग की जाएगी।

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मतुआ ने शांतनु ठाकुर पर लगाया आरोप
मामले में टीएमसी समर्थित मतुआ नेताओं ने आरोप लगाया कि यह हमला केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर के समर्थकों ने किया। हालांकि, भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। बता दें कि ये पहली बार नहीं है जब ऐसे किसी मामले में बवाल हुआ हो। इससे पहले मतुआ में बीते 24 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के विरोध में प्रदर्शन हुआ था। 

इस दौरान ठाकुरनगर मंदिर इलाका टकराव का केंद्र बन गया था। टीएमसी नेताओं का दावा है कि इस झड़प में राज्यसभा सांसद ममता ठाकुर के कई समर्थक घायल हुए थे। इसके बाद से मतुआ समुदाय के एक हिस्से में नाराजगी और गहरी हो गई है। समुदाय के नेताओं ने इस घटना को गोसायों का अपमान बताया है।

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अभी तक मतदाता सूची से कितने नाम हटे?

गौरतलब है कि राज्य में जारी एसआईआर के दौरान अभी तक 58 लाख से ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, पूरे पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 58,20,898 नाम हटाए गए हैं, जिससे मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 7.08 करोड़ रह गई है।

इसके अलावा करीब 1.36 करोड़ नामों में गड़बड़ी पाई गई है और लगभग 30 लाख मतदाताओं को ‘अनमैप्ड’ बताया गया है। इस तरह लगभग 1.66 करोड़ लोगों को दूसरे चरण की सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। मतुआ नेताओं का दावा है कि इनमें बड़ी संख्या मतुआ समुदाय के लोगों की है।

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