बंगाल उपचुनाव में बागी टीएमसी गुट का दांव: नंदीग्राम और रेजीनगर से मुस्लिम चेहरों को उतारा, किसे मिला टिकट?
पश्चिम बंगाल के आगामी विधानसभा उपचुनाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों का एलान कर दिया है। गुट ने रेजीनगर से मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारा है। ऐसे में सवाल है कि बागी गुट ने दोनों अहम सीटों पर मुस्लिम चेहरों पर ही भरोसा क्यों जताया है और इसका चुनावी असर क्या हो सकता है। ममत के उम्मीदवारों के लिए कितना अहम? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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विस्तार
ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट ने सोमवार को छह अक्तूबर को होने वाले विधानसभा उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। पूर्व मेदिनीपुर जिले की नंदीग्राम सीट से मोहम्मद एतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि मुर्शिदाबाद की रेजीनगर सीट से सफीउद्दीन शेख चुनाव लड़ेंगे। दोनों नामों के एलान के साथ ही इन दोनों सीटों पर टीएमसी के दो गुट आमने-सामने आ गए हैं। यह मुकाबला इसलिए भी अहम है क्योंकि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी की हार के बाद पार्टी में विभाजन हुआ था। इसके बाद यह बागी गुट का पहला बड़ा चुनावी मुकाबला है।
ममता बनर्जी के चुनाव न लड़ने से क्या बदला?
- बागी गुट ने पहले कहा था कि अगर ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ती हैं तो वह इस सीट पर अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा। अब ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से चुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया है। इसके बाद बागी गुट ने मोहम्मद एतेशामुल हक को मैदान में उतार दिया।
- वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने रविवार को नंदीग्राम से नए चेहरे संचित प्रधानी डे को उम्मीदवार बनाया था। रेजीनगर से इस गुट ने पूर्व विधायक रबीउल आलम चौधरी को टिकट दिया है। इस तरह दोनों सीटों पर टीएमसी के दोनों गुटों के उम्मीदवार आमने-सामने होंगे।
क्या उपचुनाव टीएमसी के दो गुटों की ताकत की परीक्षा बन गया है?
नंदीग्राम और रेजीनगर के उपचुनाव अब केवल विधानसभा सीटों का मुकाबला नहीं रह गए हैं। दोनों गुट इन चुनावों के जरिए खुद को असली तृणमूल कांग्रेस साबित करने की कोशिश करेंगे। पार्टी के नाम, संगठन पर नियंत्रण और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद पहले से चल रहा है। निर्वाचन आयोग दोनों गुटों के दावों पर सुनवाई कर चुका है। दोनों पक्ष टीएमसी के नाम, संगठनात्मक ढांचे, संपत्तियों और 'जोड़ा घास फूल' चुनाव चिह्न पर अपना दावा कर रहे हैं। ऐसे में उपचुनाव के नतीजे दोनों गुटों की राजनीतिक पकड़ का शुरुआती संकेत दे सकते हैं। दूसरी ओर भाजपा भी टीएमसी में हुई इस टूट का फायदा उठाने की कोशिश करेगी।