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समुद्र में बढ़ेगी महाशक्तियों की टक्कर?: नौसेना प्रमुख ने हिंद-प्रशांत की सुरक्षा पर चेताया, जानें क्या कहा?

Thu, 05 Nov 2026 12:15 AM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 05 Nov 2026 12:15 AM IST
सार

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धा के बीच नौसेना प्रमुख ने समुद्री सुरक्षा मजबूत करने, तकनीकी सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय देशों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जरूरत बताई है। इसके साथ ही एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि अब जरूरत केवल साझा हितों की बात करने की नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की है।

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Will clash between superpowers intensify at sea Navy Chief warns about security in Indo Pacific what he said
कृष्णा स्वामीनाथन, नौसेना प्रमुख - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग (IPRD) 2026 में नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है। देशों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, शक्ति संतुलन बदल रहा है और तकनीक के क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं। इन सबका असर समुद्र पर भी पड़ रहा है। समुद्री क्षेत्र अब केवल व्यापार और आवाजाही का रास्ता नहीं, बल्कि दुनिया के रणनीतिक हितों का अहम केंद्र बन चुका है।

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समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करना जरूरी
नौसेना प्रमुख ने कहा कि मौजूदा हालात में यह समझना बेहद जरूरी है कि समुद्र की सुरक्षा किन-किन चीजों से प्रभावित होती है। इसके लिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र के देशों को आपसी सहयोग बढ़ाना होगा और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि इंडो-पैसिफिक रीजनल डायलॉग इस दिशा में अहम भूमिका निभा सकता है।
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प्रधानमंत्री मोदी की पहल का किया जिक्र
एडमिरल स्वामीनाथन ने अपने संबोधन में इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव (IPOI) का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर 2019 में बैंकॉक में आयोजित 14वें ईस्ट एशिया समिट के दौरान इस पहल की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य सात प्रमुख क्षेत्रों के तहत समुद्री सहयोग को बढ़ावा देना है। इस साल के संवाद की थीम विज्ञान, तकनीक और शैक्षणिक सहयोग भी इसी पहल के एक प्रमुख स्तंभ से जुड़ी है।
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हिंद और प्रशांत महासागर प्रकृति से जुड़े हैं
नौसेना प्रमुख ने कहा कि हिंद-प्रशांत की अवधारणा रणनीतिक चर्चाओं में लोकप्रिय होने से बहुत पहले ही प्रकृति इन दोनों महासागरों को जोड़ चुकी थी। समुद्र की धाराएं और जलवायु दोनों महासागरों के बीच गहरा संबंध बनाते हैं। उन्होंने बताया कि इंडोनेशियाई द्वीपसमूह के रास्ते हर सेकंड करीब 1.5 करोड़ घन मीटर पानी प्रशांत महासागर से हिंद महासागर में पहुंचता है। यह दोनों महासागरों के बीच प्राकृतिक जुड़ाव की एक बड़ी मिसाल है।


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साझा हितों को ठोस नतीजों में बदलने पर जोर
एडमिरल स्वामीनाथन ने कहा कि अब जरूरत केवल साझा हितों की बात करने की नहीं, बल्कि उन्हें जमीन पर उतारने की है। इससे क्षेत्रीय देशों के बीच लंबे समय तक सहयोग की संभावनाएं मजबूत होंगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह संवाद इस दिशा में छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी IPRD 2026 के एक सत्र में हिस्सा लिया।

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