{"_id":"6ae8d11a4943f6a1b70eb55d","slug":"jharkhand-news-merely-reaching-the-court-does-not-constitute-justice-said-cji-2026-11-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"झारखंड: 'सिर्फ अदालत पहुंचना न्याय नहीं, हर नागरिक को अधिकारों का लाभ मिलना जरूरी': मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
झारखंड: 'सिर्फ अदालत पहुंचना न्याय नहीं, हर नागरिक को अधिकारों का लाभ मिलना जरूरी': मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत
Tue, 03 Nov 2026 06:36 AM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Tue, 03 Nov 2026 06:36 AM IST
सार
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने झारखंड में विधिक सेवा शिविर के दौरान कहा कि जरूरतमंदों को अधिकारों और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना ही सच्चा न्याय है। उन्होंने स्थानीय भाषाओं में जागरूकता, त्वरित समाधान और अधिकारियों की जवाबदेही पर जोर दिया।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत
- फोटो : ANI
विस्तार
राज्य स्तरीय विधिक सेवा-सह-सशक्तीकरण शिविर में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्याय का वास्तविक अर्थ केवल अदालत के दरवाजे तक पहुंचना नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक को उसके अधिकारों का वास्तविक लाभ मिलना ही सच्चा न्याय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब किसी वृद्ध महिला को उसकी रुकी हुई पेंशन मिलती है, किसी श्रमिक को उसकी मेहनत की पूरी मजदूरी प्राप्त होती है, किसी बच्चे को आगे की शिक्षा जारी रखने का अवसर मिलता है और किसी पीड़ित परिवार को समय पर सहायता मिलती है, तभी न्याय की सार्थक अभिव्यक्ति होती है।
विधिक अधिकारों का वास्तविक लाभ ही सच्चा न्याय
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने विधिक सेवा संस्थाओं से आह्वान किया कि वे सहायता मांगने वालों की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं जरूरतमंद लोगों तक पहुंचें। संस्थाएं दूर-दराज के इलाकों में जाकर आम लोगों की समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनें और उनका त्वरित समाधान करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिविर की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब वहां आने वाला हर पीड़ित व्यक्ति अपने मन में यह अटूट विश्वास लेकर वापस लौटे कि पूरी व्यवस्था और संस्थाएं उसकी समस्या को हल करने के लिए उसके साथ मजबूती से खड़ी हैं।
कल्याणकारी योजनाओं और अभियानों की सराहना
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने झारखंड में चलाए जा रहे 'प्रोजेक्ट शिशु' की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों के कल्याण के लिए बनी इस तरह की बेहतरीन योजनाओं को पूरे देश में लागू करने की बहुत सख्त जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने देश के वीर सैनिकों और उनके परिजनों के लिए शुरू की गई 'नालसा वीर परिवार सहायता योजना' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने लंबित अदालती विवादों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलझाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 'मीडिएशन फॉर द नेशन' अभियान की भी खुलकर तारीफ की।
विज्ञापन
स्थानीय भाषाओं में विधिक जागरूकता पर जोर
झारखंड की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने जनजातीय और सुदूर क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं के माध्यम से कानूनी जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पलामू और रांची में संचालित विधिक सहायता क्लिनिकों की उपयोगिता को रेखांकित किया और पारा विधिक स्वयंसेवकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने संबंधित प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि शिविर समापन के बाद भी प्राप्त लंबित आवेदनों की नियमित रूप से समीक्षा की जाए और कार्य में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
विज्ञापन
विधिक अधिकारों का वास्तविक लाभ ही सच्चा न्याय
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने विधिक सेवा संस्थाओं से आह्वान किया कि वे सहायता मांगने वालों की प्रतीक्षा करने के बजाय स्वयं जरूरतमंद लोगों तक पहुंचें। संस्थाएं दूर-दराज के इलाकों में जाकर आम लोगों की समस्याओं को पूरी संवेदनशीलता के साथ सुनें और उनका त्वरित समाधान करें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिविर की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी जब वहां आने वाला हर पीड़ित व्यक्ति अपने मन में यह अटूट विश्वास लेकर वापस लौटे कि पूरी व्यवस्था और संस्थाएं उसकी समस्या को हल करने के लिए उसके साथ मजबूती से खड़ी हैं।
विज्ञापन
कल्याणकारी योजनाओं और अभियानों की सराहना
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने झारखंड में चलाए जा रहे 'प्रोजेक्ट शिशु' की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों के कल्याण के लिए बनी इस तरह की बेहतरीन योजनाओं को पूरे देश में लागू करने की बहुत सख्त जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने देश के वीर सैनिकों और उनके परिजनों के लिए शुरू की गई 'नालसा वीर परिवार सहायता योजना' का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने लंबित अदालती विवादों को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सुलझाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे 'मीडिएशन फॉर द नेशन' अभियान की भी खुलकर तारीफ की।
विज्ञापन
स्थानीय भाषाओं में विधिक जागरूकता पर जोर
झारखंड की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने जनजातीय और सुदूर क्षेत्रों में स्थानीय भाषाओं के माध्यम से कानूनी जागरूकता फैलाने के निर्देश दिए। उन्होंने पलामू और रांची में संचालित विधिक सहायता क्लिनिकों की उपयोगिता को रेखांकित किया और पारा विधिक स्वयंसेवकों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने संबंधित प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि शिविर समापन के बाद भी प्राप्त लंबित आवेदनों की नियमित रूप से समीक्षा की जाए और कार्य में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।