यूपी टीजीटी भर्ती में आरक्षण पर विवाद: कैसे हुआ 17735 पदों का बंटवारा? अफवाहों पर आयोग का स्पष्टीकरण आया
यूपी टीजीटी भर्ती 2026 में आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों पर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने स्पष्टीकरण जारी किया है। इस भर्ती के माध्यम से कुल 17,735 पद भरे जाने हैं। आरोपों में ओबीसी, एससी और एसटी को तय आरक्षण से कम रिक्तियां मिलने का दावा किया गया, वहीं ईडब्ल्यूएस को तय आरक्षण से अधिक रिक्तियां मिलने का आरोप है। जानें आयोग ने इन आरोपों पर क्या सफाई दी...
विस्तार
उत्तर प्रदेश में टीजीटी भर्ती 2026 की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अहम खबर है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज ने सहायक अध्यापक (स्नातक स्तर) भर्ती में आरक्षण व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही खबरों को भ्रामक बताया है और आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है।
आयोग के स्पष्टीकरण के अनुसार, भर्ती के तहत कुल 17,735 पदों के लिए 23 अक्तूबर 2026 को विज्ञापन जारी किया गया था। इसके बाद कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं द्वारा पदों तथा आरक्षण व्यवस्था को लेकर सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर भ्रामक जानकारी प्रसारित किए जाने की बात आयोग के संज्ञान में आई।
यूपी टीजीटी भर्ती 2026 में आरक्षण विवाद की मुख्य बातें
- 17,735 पदों पर भर्ती: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सहायक अध्यापक (TGT) भर्ती 2026 के लिए 23 अक्तूबर को विज्ञापन जारी किया।
- आरक्षण पर विवाद: ओबीसी, एससी और एसटी को निर्धारित आरक्षण से कम पद मिलने और ईडब्ल्यूएस को निर्धारित आरक्षण से अधिक पद मिलने के आरोप लगाए गए।
- आयोग का स्पष्टीकरण: आयोग ने 27 अक्तूबर 2026 को विज्ञप्ति जारी कर आरक्षण व्यवस्था को लेकर फैल रही भ्रामक खबरों पर स्थिति स्पष्ट की।
- विद्यालयवार आरक्षण बताया: आयोग के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आरक्षण का निर्धारण प्रत्येक विद्यालय के पदों और लागू नियमों के आधार पर किया जाता है, न कि सभी विद्यालयों के कुल पदों को एक इकाई मानकर।
- पिछली भर्तियों का भी जिक्र: आयोग ने विज्ञापन संख्या 01/2022 और 02/2022 का हवाला देते हुए कहा कि उनकी भर्ती प्रक्रिया निर्धारित व्यवस्था के अनुसार पूरी की गई थी।
क्या आपत्तियां उठाईं जा रहीं थी?
कई विपक्षी दलो, सोशल मीडिया यूजर्स और अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती में पदों का वितरण करने के लिए तय आरक्षण नियमों का पालन नहीं किया गया है। आरोपों में ओबीसी, एससी और एसटी को तय आरक्षण से कम रिक्तियां मिलने का दावा किया गया, वहीं ईडब्ल्यूएस को तय आरक्षण से अधिक रिक्तियां मिलने का आरोप है। इस तालिका से समझें आखिर पदों के बंटवारें का पूरा मामला क्या है:
| वर्ग / श्रेणी | विज्ञापित पद (संख्या) | विज्ञापन के अनुसार प्रतिशत | तय आरक्षण प्रतिशत (नियम) | दावा/आरोप (अंतर) |
|---|---|---|---|---|
| अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) | 4,438 | 25.02% | 27% | 351 पद कम |
| आर्थिक रूप से कमजोर (EWS) | 2,882 | 16.25% | 10% | 1,109 पद ज्यादा |
| अनारक्षित (General) | 6,704 | 37.80% | - | - |
| अनुसूचित जाति (SC) | 3,698 | 20.85% | 21% | 27 पद कम |
| अनुसूचित जनजाति (ST) | 13 | 0.07% | 2% | 342 पद कम |
| कुल पद | 17,735 | 100% | 100% | - |
आरक्षण को लेकर विवाद पर आयोग ने दी क्या सफाई?
आयोग ने स्पष्ट किया कि पदों का अधियाचन संबंधित विद्यालयों से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। आरक्षण का निर्धारण सभी विद्यालयों के कुल पदों को एक साथ जोड़कर नहीं, बल्कि संबंधित नियमों के अनुसार विद्यालयवार किया जाता है।
आयोग के अनुसार, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में संचालित अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से पदों की जानकारी जुटाई थी। इसमें विद्यालयवार, विषयवार और आरक्षणवार यानी श्रेणीवार रिक्त पदों की पहचान करके उनका विवरण आयोग को भेजा गया।
आयोग ने बताया कि भर्ती के पद इसी अधियाचन के आधार पर निर्धारित किए गए हैं। इसलिए आरक्षण व्यवस्था को समझने के लिए केवल कुल 17,735 पदों की संख्या देखना पर्याप्त नहीं है। संबंधित विद्यालय और लागू नियमों के आधार पर पदों का निर्धारण किया जाता है।
टीजीटी भर्ती में विद्यालयवार आरक्षण क्यों लागू होता है?
आयोग के स्पष्टीकरण के अनुसार, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को आरक्षण निर्धारण के उद्देश्य से अलग-अलग इकाई के रूप में माना जाता है। विद्यालय में प्रबंधन नियुक्ति प्राधिकारी होता है। इसी वजह से आरक्षण के प्रचलित नियमों के तहत पदों का निर्धारण विद्यालयवार किया जाता है, न कि निदेशालय को प्राप्त सभी विद्यालयों के पदों को जोड़कर एक ही इकाई मानते हुए।
सरल शब्दों में समझें तो हर विद्यालय में उपलब्ध पदों और लागू नियमों के आधार पर आरक्षण का निर्धारण किया जाता है। सभी विद्यालयों के कुल पदों पर सीधे एक समान अनुपात लागू करके ही आरक्षण तय नहीं किया जाता।
आयोग का स्पष्टीकरण:
पहले की भर्तियों का भी दिया गया हवाला
आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में विज्ञापन संख्या 01/2022 और 02/2022 का भी उल्लेख किया है। आयोग के अनुसार, इन भर्तियों की प्रक्रिया पिछले महीनों में शासन की अपेक्षाओं के अनुरूप पारदर्शी तरीके से और निर्धारित व्यवस्था के तहत पूरी की गई थी।
आयोग ने वर्तमान भर्ती में आरक्षण व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों के संदर्भ में पिछली भर्ती प्रक्रियाओं का उदाहरण देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
शासन ने भी सोशल मीडिया पर दी जानकारी विज्ञप्ति में आयोग ने यह भी बताया कि शासन की ओर से सोशल मीडिया अकाउंट E-Gyan Ganga-U.P. पर इस मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की गई है।
आयोग ने अभ्यर्थियों और आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से मिलने वाली अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें। ऐसी जानकारी को बिना सत्यापन आगे साझा करने से भी बचें।
अभ्यर्थियों से आयोग की क्या अपील?
यूपी टीजीटी भर्ती 2026 के उम्मीदवारों को निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- भर्ती और आरक्षण से जुड़ी जानकारी के लिए आयोग की आधिकारिक विज्ञप्ति देखें।
- सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले दावों को आधिकारिक सूचना से मिलाएं।
- अपने विषय, विद्यालय और श्रेणी से संबंधित पदों की जानकारी भर्ती विज्ञापन में देखें।
- आवेदन, पात्रता और चयन प्रक्रिया से जुड़े नियमों के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन को प्राथमिकता दें।