आएगा वो दिन, जब तुम भी एक दिन पिता बनोगे,
बचपन की गलियों में फिर लौट-लौटकर चलोगे।
याद आएगा वो आँगन, वो ममता की ठंडी छाया,
तब शायद तुम सोचोगे—माँ-बाप ने क्या-क्या पाया?
खुद बिन खाए सो जाते थे, तुमको भोजन करवाते थे...और पढ़ें
सप्तपदी जब तुम वामांगिनी बनी
मंगल-ध्वनि से द्वार सजा था,
वेद-मंत्र दोहराते थे।
अग्नि-साक्षी, हाथ में हाथ,
दो कुल पास में आते थे।
माँग तुम्हारी जब सजी थी,
मन में दीपक जलते थे।
सप्तपदी के...और पढ़ें
कई बार मैंने कोशिश की
इस बाढ़ में से अपना एक हाथ निकालने की
कई बार भरोसा हुआ
कई बार दिखा यह है अंत
मैं कहना चाहता था
एक या दो मालूमी शब्द
जिन पर फ़िलहाल विश्वास किया जा सके
जो सबसे ज़रूरी हों फ...और पढ़ें
ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो' थी नहीं कुछ कम है
हर घड़ी होता है एहसास कहीं कुछ कम है
घर की ता'मीर तसव्वुर ही में हो सकती है
अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है
बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फ...और पढ़ें
तुम्हारे साथ चलते-चलते
मैंने जाना है—
प्रेम केवल
हाथ थाम लेने का नाम नहीं,
यह तो उस मौन को समझना है
जहाँ शब्द पहुँच नहीं पाते।
जीवन की राह में
हर दिन फूल नहीं खिलते,
कुछ रास्ते पथरीले भी...और पढ़ें
सामान तो सारा बांध लिया,
पर यादें ले जाना भूल गए।
जल्दी में थे तुम जाने की,
दरवाज़ा लगाना भूल गए।
अलमारी के एक कोने में,
कुछ सूखे फूल अभी बाकी हैं।
जिस राह से तुम हो कर गुज़रे,
उस राह की धूल अभी बाकी ह...और पढ़ें
तेरे बग़ैर थमी है ज़िन्दगी जैसे,
एक मुलाक़ात लाज़मी है जैसे।
तू नहीं तो कोई कमी नहीं लेकिन,
फिर भी लगती है कोई कमी जैसे।
तेरी पलकें झुकी झुकी क्यों हैं,
और आंखों में है एक नमी जैसे।
सब...और पढ़ें
छोटे बच्चे की प्यारी किलकारी,
लगती जैसे खुशियों की फुलवारी।
उसकी हँसी में जादू ऐसा,
महक उठे घर-आँगन सारा।
नन्हे हाथों की मीठी शरारत,
आँखों में सपनों की है आहट।
कभी हँसता, कभी मुस्काता,
सबके दिल...और पढ़ें
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- श्रीहीन, जिसका अर्थ है- जो तेज से हीन हो या जिसमें तेज न हो। प्रस्तुत है जगदीश गुप्त की कविता- हो गयी सांझ जीवन में
जिस दिन से संज्ञा आई
छा गयी उदासी मन में
ऊषा के दृग...और पढ़ें
पंख खोले जीवन की तलाश में
आकाश में ऊंची उड़ान के लिए
निकले नीड़ को छोड़कर पक्षीं,
दबे मलवे के बीच ले रहे हैं, अंतिम सांसें
जिस महल में दबकर वह मर रहे हैं पल-पल
वहाँ वह नए जीवन की तलाश में आए थे ।
आज वह बनते ज...और पढ़ें