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                                                                           इस्तेमाल

न ढोलक बजी, न बजे नगाड़े,
न लड्डू बँटे, न लोरी के सुर उठे,
छाई चहुँ ओर उदासी
मानो आ गई है
कोई अनचाही ।

पलती रही, बढ़ती रही
सहेजती रही...
निर्दोष स्वप्न,निर्दोष रिश्तेऔर पढ़ें
1 day ago
                                                                           वर्षा-
मानो बादलों के हृदय में उमड़ा कोई अव्यक्त विषाद,
जो बूंदों का वेश धरकर धरती पर उतर आया हो।

यह आकाश की भीगी हुई उदासी है,
जो चुपके से खेतों, पत्तों और गलियों में बिखर जाती है।

कितना विचित्र है...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           कुछ कहूं क्या ....
यूं न रहूं लबों से खामोश
कुछ कहूं क्या।
मुखड़े पे उदासी न रहे तुम्हारे
आ जाये मुस्कुराहट
कुछ ऐसी बात करूं क्या।
बहारों को रोक लूं गुंचाये बागों में
नजारों को आंखों में भर दूं
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2 days ago
                                                                           उसकी खिड़की खुली है,
उसके आँगन में गूँज रहा है दुख,
उसके दरवाज़े लाचार खड़ा है प्रेम।

उसकी सुन्दरता ने बनाया है घर,
उसकी चाहत ने डाला है छप्पर,
उसकी उदासी ने खींचे हैं परदे।

वह कुछ कहती नहीं ह...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           शाम आते ही तुम आ जाती हो,
जाने किस पगडंडी से मेरे मन में उतर आती हो।
जब दिन की थकी हुई धूप
आँगन के किसी कोने में बैठकर
अपने सुनहरे पंख समेटने लगती है,
जब लौटते हुए पंछियों की कतारें
आकाश पर उदासी की इबारत लिख...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           ना दिन का पता रहता है अब
रात कब आयी और ना जाने कब गयी
जैसे शुरु हुआ था दिन...
वेसें ही रात सिमट गयी
इतनी परेशा हुँ मेँ आजकल
मुस्कान भी उदासी मेँ बदल गयी
नाम और चेहरे सबके
अनजान सें लगते है मुझको
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1 week ago
                                                                           नवजात बनी जब जग में आई,
नयनों में था नूतन प्रकाश।
रोकर अपनी बात बताती,
ममता ही था उसका निवास॥
शिशु बनी तो हँसी बिखेरी,
हर वस्तु में कौतूहल पाया।
माँ की उँगली थाम-थाम कर,
चलना और गिरना सीखाया॥
कन...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           धार की भोजशाला में
सदियों तक काली घटाएं थी छाई।
15मई 2026से
भोजशाला में नई रौनक आयी।।

धार की भोजशाला में
हिन्दुओं की पूजा पर थी पाबंदी।
धर्मनिरपेक्षता की आड़ में
हिन्दुओं के अधिकार पर थी बंदी।।...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           कहाँ खोए रहते हो कुछ खो गया है क्या !
नज़र फ़ेर लेने से उदासी में इजाफ़ा हुआ।।

इस तरह का हाल दिल टूटने से है सम्भव।
किससे कहे बिना खत का लिफाफा हुआ।।

मानो उसका जबाव आया भी आया नही।
इससे इज़्ज़त का फ़...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           हलक तक डूबा रिश्वत के दलदल में ऐ महकमा सरकारी है,
सब झूठ के पुलिंदों में बंधी फाइलें अफसरों की कारगुजारी है,
जद्दोजहद जिंदगी की हर आदमी पिस रहा सिस्टम की चक्की में,
हर दौर में बस लड़ते रहना यहां इंसानों की लाचारी है,
सबके...और पढ़ें
1 week ago
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