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                                                                           अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली ...और पढ़ें
                                                
2 days ago
                                                                           क़तरा क़तरा तलाश करता है,
ये समंदर भी कितना प्यासा है।

हमको है एक शख़्स की चाहत,
उसकी ख़्वाहिश तमाम दुनिया है।

तुझसे मिलने की आज ख़्वाहिश है
रात ख़्वाबों में तुझको देखा है

मेरी मंज़िल...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           आसमान की छाती को चीरता
वो निकलता है क्षितिज से
गेरुए रंग के वस्त्र ओढ़े
शांत, सहज,निर्मल, पवित्र
किसी पुजारी की चादर सा, दिव्य आभा को समेटे

धीरे-धीरे बिखेर देता है
अपनी स्वर्णिम आभा को प्रकृति के कण-कण...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           अपनी मर्जी से रुखसत किया है मुझे,
आंख तेरी क्यों फिर आज भर आई है,
कभी ख्वाबों में भी जो न आने दिया,
वो उदासी क्यों फिर से नज़र आई है,,.. कभी ..
तेरी खुशियों की खातिर ही जिंदा हूं मैं,
मुझ को इस जमाने की परवाह नहीं...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           प्यास बुझती नहीं,भूख मिटती नहीं
जिंदगी ऐसी बिखरी,सिमटती नहीं
मुद्दतों से ये आलम चला आ रहा
दिन गुजरता नही,रात कटती नहीं
हो गई कोई,नासूर अब जिंदगी
जख्म भरते नहीं,धरती फटती नहीं
पात झड़ने लगे, कलियां खिलती नहीं...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           जिंदगी की ढलती शाम

जब उदासी छाई हो सांसो में
जिंदगी एक ढलती शाम बन जाती है
कहती नहीं कुछ किसी को भी पर
जिंदगी की ढलती शाम
उभरकर सामने आ जाती है।
कुछ कह देते कि 'कुछ नहीं', बात है छोटी सी
...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           जब उदासी छाई हो सांसो में
जिंदगी एक ढलती शाम बन जाती है
कहती नहीं कुछ किसी को भी पर
जिंदगी की ढलती शाम
उभरकर सामने आ जाती है।
कुछ कह देते कि 'कुछ नहीं', बात है छोटी सी
पर कहीं छोटी बात बड़ी बन जाती है...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           रक्त-संबंध अब मौन सिसकते,
प्राण-प्रिय भी दूर छिटकते।
स्नेह-नीड़ जो कभी बना था,
वहाँ आज बस स्वप्न भटकते।

शुष्क हुई ममता की धारा,
अस्त हुआ वह ध्रुव-तारा।
बंधु-जनों की इस संसृति में,
हृदय हुआ है आज...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           एक पल खुशी, फिर उदासी है
एक सांस हल्की, एक भारी है।

आतिश-ए-दिल की, जरा शीतल कर ले
लब पे लेके आ, जो दिल में गाली है।

हमने चाहा जिस सुमन को बागों में
उसे ही बेचा गैर को, जो माली है।

क्या...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           बीती बातों में
क्या रखा है
खुद को संभालो
आज में सब है
उदासी छीन लेगी
चेहरे की हंसी
गमों में क्यों है
जिंदगी फंसी
खुशी ढूंढो
आगे बढ़ो
खूबसूरत हो
जाएगी
जिंदगी है जो बची...और पढ़ें
6 days ago
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