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                                                                           धूप ने पूछा था मेरा पता
मैंने कहा—
जहाँ उदासी जूते उतारती है,
वहीं मेरा घर है।
नदी ने लिखा था खत
पत्तों की पीठ पर,
मैं पढ़ न सका
क्योंकि आँखों में शहर भरा था।...और पढ़ें
16 hours ago
                                                                           ऐ दिल! तन्हाई का बड़ा सहारा है!
सिवा इस के और कौन हमारा है??

जब कभी इस दिल पे चोट खाई हम ने!
तड़प के अपने-आप को पुकारा है!!

तुम तो चली गई ख़ुदा हाफ़िज़ कह के!
मेरा दिल उसी दिन से बे-सहारा है!!
...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           था नहीं द्वार पर कोई अपना वहाँ
तो ये किसने वहाँ पर बुलाया हमें
दिल की नगरी वही छोड़ आये थे हम
बाद गलियों ने कितना सताया हमें


हम जहाँ भी गये रात ही रात थी
रौशनी ने हमेशा की चालाकियाँ
ख़ुशबुओं न...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           हर रोज़ की दौड़ थकाने लगी है,
ये Metro भी अब सताने लगी है।

ना नींदें रही हैं, न सपने वही हैं,
ज़िंदगी हमें आजमाने लगी है।

वो खिड़की के कोने का शांत सा मंज़र,
अब आँखों में धुँधलाने लगी है।
...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           
थके लोगों को मजबूरी में चलते देख लेता हूँ
मैं बस की खिड़कियों से ये तमाशे देख लेता हूँ

कभी दिल में उदासी हो तो उन में जा निकलता हूँ
पुराने दोस्तों को चुप से बैठे देख लेता हूँ

छुपाते हैं बहुत वो गर्म...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           क्या जिंदगी मेरी ,है मुझसे चाहे,
नहीं समझ में कुछ आ रहा है,,
बहुत अजीब सा ,है हो रहा मन,
धड़कन जैसे कोई वापस बुला रहा है।।
क्या चाहता है , भाग्य मेरा,
खड़ी निशा क्यों बुला रही है,
तकलीफ में क्यों चुभन नहीं है...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           पाँव धरती पे रख के गगन देखिए
दिल का खिलता हुआ-सा चमन देखिए।

आजकल गीत गजलों की भरमार है
नौजवानों में उभरा है फन देखिए।

लोग सूरत पे मरने लगे आजकल
प्यार में मैं कहूँगा कि मन देखिए।

सिर्फ...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           ईक सुरत उस आनन की
जिसमें घोर उदासी थी
और ईक सुरत उस आनन की
जिसमें रंग तरुणाई थी

ईक ओर जहाँ शोर था शामिल
मौन अंगीठी आँच हाँ मद्धम
अंधियारे के इर्द-गिर्द
चाँद उजियारा ले आई थी

कहने...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           ना जाने किस दौर मेँ हुँ
रात मेँ हुँ या भौर मेँ हुँ
मुझें मेरा ही पता नही
मुझें मेरा पता दे दो कोई
ख़ो गयी हुँ जाने कहा मेँ
मुझें मुझसे ही मिलवा दो कोई
मुस्कुराहट मेरे पास आती ही कहाँ है
ये उदासी मेरे पा...और पढ़ें
1 week ago
                                                                           तेरी नज़रें झुकी झुकी क्यों हैं,
इस क़दर हमसे बेरुख़ी क्यों है।

क्या सबब है तेरी उदासी का,
और आंखों में ये नमी क्यों है।

साथ बैठे हो कुछ तो बात करो,
लबों पे इतनी ख़ामुशी क्यों है।

सामन...और पढ़ें
1 week ago
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