धूप ने पूछा था मेरा पता
मैंने कहा—
जहाँ उदासी जूते उतारती है,
वहीं मेरा घर है।
नदी ने लिखा था खत
पत्तों की पीठ पर,
मैं पढ़ न सका
क्योंकि आँखों में शहर भरा था।...और पढ़ें
ऐ दिल! तन्हाई का बड़ा सहारा है!
सिवा इस के और कौन हमारा है??
जब कभी इस दिल पे चोट खाई हम ने!
तड़प के अपने-आप को पुकारा है!!
तुम तो चली गई ख़ुदा हाफ़िज़ कह के!
मेरा दिल उसी दिन से बे-सहारा है!!
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था नहीं द्वार पर कोई अपना वहाँ
तो ये किसने वहाँ पर बुलाया हमें
दिल की नगरी वही छोड़ आये थे हम
बाद गलियों ने कितना सताया हमें
हम जहाँ भी गये रात ही रात थी
रौशनी ने हमेशा की चालाकियाँ
ख़ुशबुओं न...और पढ़ें
हर रोज़ की दौड़ थकाने लगी है,
ये Metro भी अब सताने लगी है।
ना नींदें रही हैं, न सपने वही हैं,
ज़िंदगी हमें आजमाने लगी है।
वो खिड़की के कोने का शांत सा मंज़र,
अब आँखों में धुँधलाने लगी है।
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थके लोगों को मजबूरी में चलते देख लेता हूँ
मैं बस की खिड़कियों से ये तमाशे देख लेता हूँ
कभी दिल में उदासी हो तो उन में जा निकलता हूँ
पुराने दोस्तों को चुप से बैठे देख लेता हूँ
छुपाते हैं बहुत वो गर्म...और पढ़ें
क्या जिंदगी मेरी ,है मुझसे चाहे,
नहीं समझ में कुछ आ रहा है,,
बहुत अजीब सा ,है हो रहा मन,
धड़कन जैसे कोई वापस बुला रहा है।।
क्या चाहता है , भाग्य मेरा,
खड़ी निशा क्यों बुला रही है,
तकलीफ में क्यों चुभन नहीं है...और पढ़ें
पाँव धरती पे रख के गगन देखिए
दिल का खिलता हुआ-सा चमन देखिए।
आजकल गीत गजलों की भरमार है
नौजवानों में उभरा है फन देखिए।
लोग सूरत पे मरने लगे आजकल
प्यार में मैं कहूँगा कि मन देखिए।
सिर्फ...और पढ़ें
ईक सुरत उस आनन की
जिसमें घोर उदासी थी
और ईक सुरत उस आनन की
जिसमें रंग तरुणाई थी
ईक ओर जहाँ शोर था शामिल
मौन अंगीठी आँच हाँ मद्धम
अंधियारे के इर्द-गिर्द
चाँद उजियारा ले आई थी
कहने...और पढ़ें
ना जाने किस दौर मेँ हुँ
रात मेँ हुँ या भौर मेँ हुँ
मुझें मेरा ही पता नही
मुझें मेरा पता दे दो कोई
ख़ो गयी हुँ जाने कहा मेँ
मुझें मुझसे ही मिलवा दो कोई
मुस्कुराहट मेरे पास आती ही कहाँ है
ये उदासी मेरे पा...और पढ़ें
तेरी नज़रें झुकी झुकी क्यों हैं,
इस क़दर हमसे बेरुख़ी क्यों है।
क्या सबब है तेरी उदासी का,
और आंखों में ये नमी क्यों है।
साथ बैठे हो कुछ तो बात करो,
लबों पे इतनी ख़ामुशी क्यों है।
सामन...और पढ़ें