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                                                                           पापा का घर—
यह नाम सुनते ही
मन में एक हलचल-सी होने लगती है।

आज भी जब कोई
उस गाँव का नाम लेता है,
मेरी आँखों के सामने
वही पुरानी हवेली खड़ी हो जाती है।

वह हवेली,
जो अब खंडहर होने...और पढ़ें
4 hours ago
                                                                           तेरा शीतल मन क्यों रूठ गया है?
चलो, तुम्हें बंजारों की खूब पकाई गई चाय पिलवाता हूँ।
स्कूल के आगे जो पहाड़ी है,
उसी की तलहटी में एक बंजारों की बस्ती है।
अगले मोड़ पर वहीं उनका छोटा-सा चाय का ढाबा है।
एक बार श्रीकांत...और पढ़ें
4 hours ago
                                                                           कमरे के इस एकांत कोने में,
मैं हूँ।
कुछ बिखरा हुआ सामान है।
और सामने से आती हुई धूप की
एक पतली-सी लकीर...
जो फर्श पर पड़े सामान को
धीरे-धीरे छू रही है,
जैसे कोई पुराना दोस्त
दबे पाँव कमरे में चलऔर पढ़ें
1 day ago
                                                                           मैं पतझर का रुक्ष तना हूँ तुम वसंत की कोमल बेला
मैं भटका सा एक बटोही तुम हो एक सुहाना मेला
बँध भी गए प्रेम धागों में तो भी यह समझाओ मुझको
अपनी दो विपरीत दिशाएँ बोलो साथ निभेगा कैसे

मेरे आँगन में पसरी है बरसों से इक...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           नहीं है कोई और सहारा,
बस यही मेरा संसार है,
किताबों के पन्नों में ही,
मेरा सारा प्यार है।
ना कोई भाई,
ना कोई मित्र,
ना कोई दूजा सखा,
इनके मौन शब्दों में ही,
जीवन का सुख लिखा।
जब कोई नहीं...और पढ़ें
2 days ago
                                                                           बहुत कुछ कहना था लेकिन किसे जज़्बात कहते
नहीं तुम पास किससे अपने हम हालात कहते

तेरी नाराजगी से जश्न भी मातम बना है
मेरा निकला जनाज़ा कैसे हम बारात कहते

ग़म-ए-दिल के ये अंधेरे सताते हैं बहुत अब
ख़ुशी...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           तुम्हारी याद के बादल ज़हन में छा गए फिर से
लो अब मौसम उदासी के मेरे घर आ गए फिर से

बहुत मुश्किल से निकला था मैं अपने इस ग़म-ए-दिल से
और एक तुम हो तराने इश्क के क्यों गा गए फिर से

यहां मैं तो तुम्हारी खैरियत...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           ये उदासी आपके चेहरे पर अच्छी नही लगती
पापा आप पत्रकार हैं कोई भगवान तो नही जो
उनके मुताबिक कार्य करे आपका काम हैं खबर इकठ्ठा करना दुनियाँ को सच सें अवगत कराना...

आप शांत चुप होकर सून रहे थे बच्चे लूजर - लूजर
कह करऔर पढ़ें
4 days ago
                                                                           मोहब्बत के सफ़र में कोई भी रस्ता नहीं देता
ज़मीं वाक़िफ़ नहीं बनती फ़लक साया नहीं देता

ख़ुशी और दुख के मौसम सब के अपने अपने होते हैं
किसी को अपने हिस्से का कोई लम्हा नहीं देता

न जाने कौन होते हैं जो बाज़ू थ...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           क्यूँ छिपाए हुए हो नमी आज तुम दीद में
वक़्त बर्बाद करते क्यूँ हो ज़िक्रे-तम्हीद में

है उदासी का साया यहाँ शहर के हर तरफ़
माह-ए-नौ का तबस्सुम भी गुम है कहीं ईद में

मज़हबी नफ़रतें घुल चुकी हैं फ़िज़ाओं में यू...और पढ़ें
6 days ago
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