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                                                                           मोहब्बत के बाद कुछ भी पहले-सा नहीं रहता

कभी-कभी कोई व्यक्ति
हमारी ज़िंदगी में इस तरह आता है,
जैसे किसी बंद कमरे की खिड़की से
अचानक धूप का एक टुकड़ा भीतर उतर आए।
न कोई आहट होती है,
न आने की कोई वजह समझ...और पढ़ें
23 hours ago
                                                                           सितारों भरी वो रात बर्फ़-सी जमी हुई क्यों है,
ख़ामोश आसमान में ये उदासी-सी क्यों है,
दूर से लगा कि ठंड ने हर शय को जमा दिया,
पास जाकर देखा तो लगा, कोई गर्मी भी वहीं है।

जब ग़ौर से देखा तो धुआँ-सा उठने लगा,
ज...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           तेरे हर दर्द की ख़ामोश निशानी बन जाऊँ मैं।
तू रोए भी तो तेरी पलकों पे ठहर जाऊँ,
तेरी हर अश्क में छुपी ज़िंदगानी बन जाऊँ मैं।

तेरी आँखों में कभी ग़म का समंदर न रहे,
तेरे चेहरे पे उदासी का कोई मंज़र न रहे।
तू...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           एक रोज़ क़यामत की आयी
सब कतरा कतरा बिखर गया।
उठी दिल में कसक गये नैन छलक
ख़ामोशी लब पर पसर गया।
कई रात कटी सदियां जैसी
नींदे आंखों से दूर भये।
प्यार गया एतबार गया
खुशियों से भरे दिन रैन गये।
आंख...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           तू है जहाँ, वहाँ आ पाना
तन के वश की बात नहीं है,
इस तन से नाता टूटे तो
तुझसे मिलना हो सकता है!

आँखों में तैरती उदासी, लहराती आँसू की छाया,
ऐसा लगे, कि मेरी काया में तेरी उतरी है तेरी काया;
दर्पण ने इस...और पढ़ें
3 days ago
                                                                           तेरी आँखों के लाल डोरे, रात की कहानी कहते हैं,
दिल में उठते तूफ़ानों की, ख़ामोशी में रवानी कहते हैं।
बात करने का मन हो तो, फ़ोन मिला लिया करो,
क्यों तन्हाई में बैठकर, ख़ुद को यूँ सज़ा दिया करो।

तेरी बेचैनी चेहरे से...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           हम टूट जाते हैं तुम्हें मनाते मनाते
बात बिगड़ जाती है यूं,बात बनाते बनाते

ये जो उदासी है महज तेरी ही कमी है
चाँद बुझ जाता है यूं, याद दिलाते दिलाते

तूने कहा था लौट आऊँगा किसी शाम मैं
शाम ढल जाती है य...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           आइना सामने रख्खोगे तो याद आऊँगा
अपनी ज़ुल्फ़ों को सँवारोगे तो याद आऊँगा

रंग कैसा हो ये सोचोगे तो याद आऊँगा
जब नया सूट ख़रीदोगे तो याद आऊँगा

भूल जाना मुझे आसान नहीं है इतना
जब मुझे भूलना चाहोगे तो याद...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           मैं बढ़ा ही जा रहा हूँ, पर तुम्हें भूला नहीं हूँ।

चल रहा हूँ, क्योंकि चलने से थकावट दूर होती,
जल रहा हूँ क्योंकि जलने से तिमिस्रा चूर होती,
गल रहा हूँ क्योंकि हल्का बोझ हो जाता हृदय का,
ढल रहा हूँ क्योंकि ढलकर साथ...और पढ़ें
5 days ago
                                                                           ' दो शहरों के बीच धड़कता एक घर '

बीजापुर की धरती पर
तुम ज्ञान के दीप जलाते हो,
बालोद की कक्षाओं में
मैं भी भविष्य के स्वप्न सजाती हूँ।
तुम्हारे पास विद्यार्थियों का संसार,
मेरे पास बच्चों की क...और पढ़ें
1 week ago
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