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                                                                           आएगा वो दिन, जब तुम भी एक दिन पिता बनोगे,
बचपन की गलियों में फिर लौट-लौटकर चलोगे।
याद आएगा वो आँगन, वो ममता की ठंडी छाया,
तब शायद तुम सोचोगे—माँ-बाप ने क्या-क्या पाया?

खुद बिन खाए सो जाते थे, तुमको भोजन करवाते थे...और पढ़ें
20 hours ago
                                                                           सप्तपदी जब तुम वामांगिनी बनी

मंगल-ध्वनि से द्वार सजा था,
वेद-मंत्र दोहराते थे।
अग्नि-साक्षी, हाथ में हाथ,
दो कुल पास में आते थे।

माँग तुम्हारी जब सजी थी,
मन में दीपक जलते थे।
सप्तपदी के...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           कई बार मैंने कोशिश की
इस बाढ़ में से अपना एक हाथ निकालने की
कई बार भरोसा हुआ
कई बार दिखा यह है अंत

मैं कहना चाहता था
एक या दो मालूमी शब्द
जिन पर फ़िलहाल विश्वास किया जा सके
जो सबसे ज़रूरी हों फ...और पढ़ें
1 day ago
                                                                           
ज़िंदगी जैसी तवक़्क़ो' थी नहीं कुछ कम है
हर घड़ी होता है एहसास कहीं कुछ कम है

घर की ता'मीर तसव्वुर ही में हो सकती है
अपने नक़्शे के मुताबिक़ ये ज़मीं कुछ कम है

बिछड़े लोगों से मुलाक़ात कभी फ...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           तुम्हारे साथ चलते-चलते
मैंने जाना है—
प्रेम केवल
हाथ थाम लेने का नाम नहीं,
यह तो उस मौन को समझना है
जहाँ शब्द पहुँच नहीं पाते।

जीवन की राह में
हर दिन फूल नहीं खिलते,
कुछ रास्ते पथरीले भी...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           सामान तो सारा बांध लिया,
पर यादें ले जाना भूल गए।
जल्दी में थे तुम जाने की,
दरवाज़ा लगाना भूल गए।
अलमारी के एक कोने में,
कुछ सूखे फूल अभी बाकी हैं।
जिस राह से तुम हो कर गुज़रे,
उस राह की धूल अभी बाकी ह...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           तेरे बग़ैर थमी है ज़िन्दगी जैसे,
एक मुलाक़ात लाज़मी है जैसे।

तू नहीं तो कोई कमी नहीं लेकिन,
फिर भी लगती है कोई कमी जैसे।

तेरी पलकें झुकी झुकी क्यों हैं,
और आंखों में है एक नमी जैसे।

सब...और पढ़ें
4 days ago
                                                                           छोटे बच्चे की प्यारी किलकारी,
लगती जैसे खुशियों की फुलवारी।
उसकी हँसी में जादू ऐसा,
महक उठे घर-आँगन सारा।

नन्हे हाथों की मीठी शरारत,
आँखों में सपनों की है आहट।
कभी हँसता, कभी मुस्काता,
सबके दिल...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- श्रीहीन, जिसका अर्थ है- जो तेज से हीन हो या जिसमें तेज न हो। प्रस्तुत है जगदीश गुप्त की कविता- हो गयी सांझ जीवन में

जिस दिन से संज्ञा आई
छा गयी उदासी मन में
ऊषा के दृग...और पढ़ें
6 days ago
                                                                           पंख खोले जीवन की तलाश में
आकाश में ऊंची उड़ान के लिए
निकले नीड़ को छोड़कर पक्षीं,
दबे मलवे के बीच ले रहे हैं, अंतिम सांसें
जिस महल में दबकर वह मर रहे हैं पल-पल
वहाँ वह नए जीवन की तलाश में आए थे ।
आज वह बनते ज...और पढ़ें
1 week ago
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