क़तरा क़तरा तलाश करता है,
ये समंदर भी कितना प्यासा है।
हमको है एक शख़्स की चाहत,
उसकी ख़्वाहिश तमाम दुनिया है।
तुझसे मिलने की आज ख़्वाहिश है
रात ख़्वाबों में तुझको देखा है
मेरी मंज़िल...और पढ़ें
आसमान की छाती को चीरता
वो निकलता है क्षितिज से
गेरुए रंग के वस्त्र ओढ़े
शांत, सहज,निर्मल, पवित्र
किसी पुजारी की चादर सा, दिव्य आभा को समेटे
धीरे-धीरे बिखेर देता है
अपनी स्वर्णिम आभा को प्रकृति के कण-कण...और पढ़ें
अपनी मर्जी से रुखसत किया है मुझे,
आंख तेरी क्यों फिर आज भर आई है,
कभी ख्वाबों में भी जो न आने दिया,
वो उदासी क्यों फिर से नज़र आई है,,.. कभी ..
तेरी खुशियों की खातिर ही जिंदा हूं मैं,
मुझ को इस जमाने की परवाह नहीं...और पढ़ें
प्यास बुझती नहीं,भूख मिटती नहीं
जिंदगी ऐसी बिखरी,सिमटती नहीं
मुद्दतों से ये आलम चला आ रहा
दिन गुजरता नही,रात कटती नहीं
हो गई कोई,नासूर अब जिंदगी
जख्म भरते नहीं,धरती फटती नहीं
पात झड़ने लगे, कलियां खिलती नहीं...और पढ़ें
जिंदगी की ढलती शाम
जब उदासी छाई हो सांसो में
जिंदगी एक ढलती शाम बन जाती है
कहती नहीं कुछ किसी को भी पर
जिंदगी की ढलती शाम
उभरकर सामने आ जाती है।
कुछ कह देते कि 'कुछ नहीं', बात है छोटी सी
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जब उदासी छाई हो सांसो में
जिंदगी एक ढलती शाम बन जाती है
कहती नहीं कुछ किसी को भी पर
जिंदगी की ढलती शाम
उभरकर सामने आ जाती है।
कुछ कह देते कि 'कुछ नहीं', बात है छोटी सी
पर कहीं छोटी बात बड़ी बन जाती है...और पढ़ें
रक्त-संबंध अब मौन सिसकते,
प्राण-प्रिय भी दूर छिटकते।
स्नेह-नीड़ जो कभी बना था,
वहाँ आज बस स्वप्न भटकते।
शुष्क हुई ममता की धारा,
अस्त हुआ वह ध्रुव-तारा।
बंधु-जनों की इस संसृति में,
हृदय हुआ है आज...और पढ़ें
एक पल खुशी, फिर उदासी है
एक सांस हल्की, एक भारी है।
आतिश-ए-दिल की, जरा शीतल कर ले
लब पे लेके आ, जो दिल में गाली है।
हमने चाहा जिस सुमन को बागों में
उसे ही बेचा गैर को, जो माली है।
क्या...और पढ़ें
बीती बातों में
क्या रखा है
खुद को संभालो
आज में सब है
उदासी छीन लेगी
चेहरे की हंसी
गमों में क्यों है
जिंदगी फंसी
खुशी ढूंढो
आगे बढ़ो
खूबसूरत हो
जाएगी
जिंदगी है जो बची...और पढ़ें