बोनट पर बैठने के कितने लिए प्रियंका ने?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बॉलीवुड के सितारों और तारिकाओं का महंगी गाड़ियों का शौक काफी पुराना है और अब यही गाड़ियां उन्हें मोटा पैसा कमाने का मौका दे रही हैं। ऑटो एक्सपो में कुछ ऐसा ही जलवा देखने को मिल रहा है।
दिल्ली एनसीआर में शबाब पर आए ऑटो एक्सपो में हर रोज फिल्मी दुनिया के चमकते सितारे पहुंच रहे हैं। वे ऑटो ब्रांड को एंडोर्स करने के लिए पहुंच रहे हैं और इसके बदले मोटा पैसा कमा रहे हैं।
करीना कपूर ने हाल में एक टॉप-लाइन एसयूवी से परदा हटाया, वहीं प्रियंका चोपड़ा ने गाड़ी के बोनट पर बैठकर खूब तस्वीरें खिंचवाईं। इसके अलावा भीड़ रणबीर कपूर को लेकर भी दीवाना हुई, जो एक दोपहिया कंपनी के प्रोडक्ट लॉन्च करने पहुंचे थे। शुक्रवार को बाइक-बॉय जॉन अब्राहम ऑटो एक्सपो में पहुंचे।
लाखों की मुस्कुराहट?
आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे इन सितारों का कार या बाइक-स्कूटर के बराबर में खड़े होकर कुछ पलों के लिए कैमरों के सामने मुस्कुराना और प्रशंसकों के लिए हाथ हिलाना ऑटो कंपनियों को काफी महंगा पड़ता है।
एचटी की खबर के मुताबिक इंडस्ट्री के इनसाइडर ने कहा, "अगर स्टोर व्हीकल के साथ पोज देता है, वहां मौजूद भीड़ के लिए हाथ हिलाता है और ऑटोमोबाइल के साथ तस्वीरें क्लिक कराता है, तो स्टार के दर्जे के हिसाब से इसका खर्च 30 से 80 लाख रुपए आता है।"
इसके अलावा स्टार को 3 से 5 बिजनेस क्लास के रिटर्न टिकट मुहैया कराए जाते हैं। साथ ही लग्जरी पांच सितारा होटल में बॉलीवुड स्टार और उसके स्टाफ के लिए रूम बुक कराए जाते हैं।
प्रियंका ने 40 लाख, करीना ने 35 लाख लिए
एक्सपो में इन सितारों पर कितने लाख का दांव लगा है, इस पर एक स्टार के मैनेजर ने कहा, "15 से 20 मिनट के लिए आने के लिए करीना कपूर जैसी सितारा 30-35 लाख और प्रियंका चोपड़ा 40 लाख रुपए लेती हैं।"
उन्होंने कहा, "हालांकि, जॉन अब्राहम और रणबीर कपूर पहले से उन ब्रांड का एंडोर्समेंट कर रहे हैं, जिनके लिए वे ऑटो एक्सपो में पहुंचे थे। और इस डील के दाम 10 से 12 करोड़ रुपए के बीच हैं।"
इसे समझाते हुए अलकेमिस्ट टैलेंट सॉल्यूशन के मैनेजिंग डायरेक्टर मनीष पॉरवाल ने कहा, "अगर स्टार ब्रांड एम्बेसेडर है, तो उसे ब्रांड के प्रमोशन के लिए सात से 12 दिन खाली रखने के लिए कहा जाता है। इसलिए कई कंपनियां इन दिनों को ऑटो एक्सपो जैसे इवेंट के लिए इस्तेमाल करती हैं।"
अब बात कार-बाइक के साथ खड़ीं मॉडल की
यह दिलचस्प है कि फिल्मी जगत से उलट ऑटो एक्सपो में अभिनेत्रियों को हीरो के बराबर ही भुगतान किया जाता है। जाहिर है, इसकी वजह यह है कि ग्लैमर मीडिया और आम लोगों, दोनों की निगाहें खींचता है।
यह तो बात हुई फिल्मी सितारों की। अब जिक्र करते हुए उन खूबसूरत और ग्लैमरस लड़कियों का जो बॉलीवुड से नहीं आतीं, लेकिन गाड़ियों की चमक के साथ अपनी चमक बिखेरकर माहौल में गर्माहट पैदा कर रही हैं।
डिजाइनर कपड़े और भारी मेकअप लिए खड़ी इन युवतियों का काम है कैमरो के लिए मुस्कुराना। साथ ही पवेलियन में घूमने वाले लोगों की तरफ इस अदा से देखना कि वह उन्हीं के स्टॉल से आगे न बढ़ सकें। हालांकि, काम सिर्फ मुस्कुराने का नहीं है। गजब का आत्मविश्वास भी उनके पास है।
एक दिन में मिलते हैं 25 हजार
सवाल जहन में आ सकता है कि इन मॉडलों को कितना भुगतान किया जाता है। दरअसल, इन्हें हर रोज का 10 से 25 हजार रुपए मिलते हैं। लेकिन इनकी मुश्किलें भी कम नहीं हैं।
कई बार भीड़ उनके लिए दिक्कत पैदा कर देती हैं। कुछ लोग पहुंचते हैं गाड़ियां देखने, लेकिन उनके नंबर मांगने लगते हैं। और इन ग्लैमरस चेहरों के पीछे छिपी है ऑटोमोटिव कंपनियों की गहरी सोच और ब्रांड मैनेजमेंट, जो इन युवतियों को अपनी कंपनी, व्हीकल के बारे में सारी जानकारी देते हैं।
एक मॉडल कोऑर्डिनेटिंग कंपनी के प्रमुख ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बताया, "बाइक कियोस्क पर खड़ी युवतियों की बॉडी लैंग्वेज, कार लॉन्च के दौरान मौजूद मॉडल की तुलना में अलग हो सकती है।"
काम मुश्किल है, भीड़ तंग करती है
अब सवाल आता है कि ऐसी मॉडल बनने के लिए क्या गुण चाहिए? जापानी कार कंपनी होंडा का ब्रांड मैनेजमेंट का काम देख रही कंपनी के चीफ एग्जिक्यूटिव संजीव पसरीचा ने कहा, "सबसे जरूरी गुण है, बातचीत का अच्छा लहजा...इन लड़कियों को कम से कम उस कार के बारे में जानकारी होनी चाहिए, जो लॉन्च की जा रही है।"
उन्होंने कहा, "केवल खूबसूरत चेहरे से कंपनी की ब्रांड इमेज नहीं चमक सकती।" ब्रांड मैनेजर इस बात में काफी अहम किरदार अदा करते हैं कि इवेंट में मॉडल वाहनों को किस तरह पेश करेंगी।
इनमें से ज्यादातर युवतियां कॉलेज में पढ़ती हैं और मॉडल बनना चाहती हैं, ऐसे में कम वक्त में मिलने वाला ठीकठाक पैसा भी अच्छा लगता है। काम मुश्किल और एकरूपता वाला है, लेकिन पैसा ठीक है।