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सुपर कंप्यूटर के निर्माण में चीन को टक्कर देगा भारत
नई दिल्ली/बृजेश सिंह
Updated Sun, 03 Mar 2013 12:05 AM IST
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सुपर कंप्यूटर के निर्माण में भारत जल्द ही चीन को टक्कर देने के लिए कदम आगे बढ़ाएगा। इसके लिए देश में जल्द हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) लैब नेटवर्क स्थापित किया जाएगा।
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केंद्रीय विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय को इस योजना पर काम शुरू करने के लिए बजट में पहली बार 75 करोड़ रुपये दिए गए हैं। बारहवीं पंचवर्षीय योजना में सुपर कंप्यूटिंग के लिए कुल 5000 करोड़ निवेश की योजना है।
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सुपर कंप्यूटर के निर्माण को बढ़ावा देने के केंद्र के इस प्रयास को आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. आरके. शेवगांवकर सही दिशा में उठाया गया कदम मानते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे कौशल में कोई कमी नहीं है। मगर सुपर कंप्यूटर के निर्माण एवं अनुसंधान के लिए वर्तमान सुविधाओं में सौ गुना वृद्धि किए जाने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत अगले पांच सालों में इस दिशा में अच्छी प्रगति करेगा।
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1980 में जब अमेरिका ने भारत को सुरक्षा कारणों से सुपर कंप्यूटर देने से मना कर दिया तब देश ने खुद ही इसके निर्माण की पहल शुरू की थी। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस कंप्यूटिंग (सीडैक) की स्थापना उसी समय की गई थी।
सीडैक के अलावा देश में इसरो, आईआईटी मद्रास, सीआरएल आदि संस्थाएं अभी तक सुपर कंप्यूटर का निर्माण कर चुकी हैं। सुपर कंप्यूटर के अनुसंधान एवं विकास के लिए देश में तीन स्तर पर हाई परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने की योजना है।
देश में बड़ी संख्या में स्मॉल स्केल एचपीसी लैब स्थापित की जाएंगी, जबकि मध्यम स्तर की लैब रीजनल स्तर पर स्थापित की जाएंगी। इसके अलावा देश में कुछ स्थानों पर उच्च स्तरीय एचपीसी लैब भी खोलने की योजना है।
सभी एचपीसी लैब को नेशनल नॉलेज नेटवर्क से जोड़ा जाएगा ताकि अनुसंधान से जुड़ी ऐसी प्रयोगशालाएं जिनके पास सुपर कंप्यूटर नहीं हैं वे भी इसका फायदा उठा सकें। देश में सुपर कंप्यूटिंग के अनुसंधान नेटवर्क खड़ा करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस के प्रो. बालकृष्णन मंत्रालय के साथ विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं।
रोचक तथ्य:-
विश्व के शीर्ष 500 सुपर कंप्यूटरों में सर्वाधिक 250 कंप्यूटर अमेरिका के पास हैं। उसके बाद चीन (74) का नंबर आता है। आठ कंप्यूटरों के साथ भारत आठवें स्थान पर है।