Shani Sade Sati: ज्योतिष शास्त्र में शनि को सबसे महत्वपूर्ण ग्रह माना जाता है, क्योंकि वह साधक को कर्म के आधार पर फल देते हैं। यही नहीं शनि सबसे धीमी गति से चाल चलने वाले ग्रह भी हैं, इसलिए व्यक्ति पर उनका शुभ-अशुभ प्रभाव भी लंबे समय तक रहता है। यही कारण है कि, शनि की साढ़ेसाती भी बेहद प्रभावशाली होती है, जिसका असर व्यक्ति के करियर-कारोबार से लेकर प्रेम जीवन व सेहत पर दिखाई देता है। ज्योतिषियों के अनुसार, शनि की साढ़ेसाती कुल साढ़े सात वर्ष की होती हैं। यह समय व्यक्ति के लिए कष्टकारी और धैर्य की परीक्षा का माना जाता है। वर्तमान में तीन राशियों पर इसका प्रभाव बना हुआ है। लेकिन मीन राशि वालों पर यह 2032 तक रहने वाली हैं। ऐसे में यह अवधि मीन राशि वालों के लिए कैसी रहेगी, आइए जानते हैं।
Shani Sade Sati: 2032 तक इस एक राशि पर रहेगी शनि की नजरें, सेहत-कारोबार को लेकर रहें अलर्ट
Shani Sade Sati: शनि की साढ़े साती का समय मुश्किलों भरा होता है। इस दौरान जातकों को करियर-कारोबार से लेकर सेहत के मामले में सतर्क रहना चाहिए। इस दौरान जातकों का मानसिक दबाव बढ़ सकता है, इसलिए धैर्यवान रहें।
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मीन राशि पर साढ़ेसाती का प्रभाव
ज्योतिष गणना के मुताबिक, वर्तमान समय में मीन राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का दूसरा चरण चल रहा है, जिसे सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। जून 2027 से इसका तीसरा चरण शुरू होगा। इसके बाद साल 2032 तक यह पूरी तरह समाप्त होगा।
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इस पूरे समय के दौरान शनि की दृष्टि मीन राशि वालों के करियर, स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और रिश्तों पर गहरा असर डाल सकती है। हालांकि, यह समय सिर्फ कठिनाइयों का नहीं, बल्कि धैर्य और जीवन को नए सिरे से समझने का भी होता है।
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ज्योतिषियों के अनुसार, मीन राशि वालों को 2032 तक अपने हर कदम को सोच-समझ कर उठाने की जरूरत होगी। जल्दबाजी या बिना योजना के किए गए काम नुकसान दे सकते हैं। साथ ही आपके तनाव का स्तर भी बढ़ सकता है। इस समय करियर और कारोबार में कई बार रुकावट आ सकती हैं। आर्थिक मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, इसलिए खर्चों पर नियंत्रण रखना बेहद जरूरी होगा।
उपाय
ज्योतिषियों के मुताबिक, शनि की साढ़ेसाती होने पर शनिवार के दिन व्रत रखना लाभकारी होता है। इससे कार्यों में आ रही रुकावटें दूर होती हैं। शनिवार को शनि देव की पूजा करना शुभ माना जाता है। काले तिल, काली उड़द, सरसों का तेल और काले कपड़े का दान करने से शनि के अशुभ प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके साथ ही नियमित रूप से शनि मंत्र या शनि चालीसा का पाठ करने से मानसिक शांति मिलती है और जीवन में स्थिरता आने लगती है।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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