{"_id":"6ab0e4029e2a07b6c307a47a","slug":"causes-of-lung-infection-if-i-don-t-smoke-in-hindi-kya-smoke-na-karne-walo-ko-bhi-lung-infection-ho-skta-hai-2026-09-21","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"लंग इंफेक्शन के कारण: धूम्रपान न करने वालों में क्यों बढ़ रहा है फेफड़ों के संक्रमण का खतरा?","category":{"title":"Health & Fitness","title_hn":"हेल्थ एंड फिटनेस","slug":"fitness"}}
लंग इंफेक्शन के कारण: धूम्रपान न करने वालों में क्यों बढ़ रहा है फेफड़ों के संक्रमण का खतरा?
Mon, 21 Sep 2026 02:53 PM IST
Shruti Gaur
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Shruti Gaur
Updated Mon, 21 Sep 2026 02:53 PM IST
सार
Causes Of Lung Infection: अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता ही है कि क्या उन लोगों के फेफड़ों में भी इंफेक्शन हो सकता है, जो धूम्रपान नहीं करते। यहां हम आपको इसी सवाल का सही जवाब देंगे।
विज्ञापन
धूम्रपान न करने वालों में क्यों बढ़ रहा है फेफड़ों के संक्रमण का खतरा?
- फोटो : AI
Causes Of Lung Infection: धूम्रपान को फेफड़ों की कई बीमारियों का प्रमुख जोखिम कारक माना जाता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि जो लोग धूम्रपान नहीं करते, उन्हें लंग इंफेक्शन नहीं हो सकता। फेफड़ों में संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है और इसके पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।
धूम्रपान न करने वालों में क्यों बढ़ रहा है फेफड़ों के संक्रमण का खतरा?
- फोटो : AI
लंग इंफेक्शन के मुख्य कारण
वायरल इंफेक्शन: फ्लू, COVID-19 और अन्य श्वसन वायरस फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। बैक्टीरियल इंफेक्शन वाले लोगों में फंगल संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
बैक्टीरियल इंफेक्शन: कुछ बैक्टीरिया फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर सकते हैं, जिससे निमोनिया जैसी समस्या हो सकती है। इसमें तेज बुखार, लगातार खांसी और सीने में दर्द हो सकता है।
फंगल इंफेक्शन: कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में फंगल संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। लंबे समय तक चलने वाली खांसी, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी इसके संभावित लक्षण हैं।
कमजोर इम्यून सिस्टम: डायबिटीज, लंबे समय से चल रही कुछ बीमारियों या कुछ दवाओं के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे फेफड़ों में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
वायु प्रदूषण: लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे सांस की तकलीफ और अन्य श्वसन समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
धूल और केमिकल्स: कार्यस्थल पर धूल, धुआं, गैस या कुछ रसायनों के लगातार संपर्क में रहने से फेफड़ों में जलन और सूजन हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क रहने पर फेफड़ों को नुकसान भी हो सकता है।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना: कुछ श्वसन संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकते हैं।
वायरल इंफेक्शन: फ्लू, COVID-19 और अन्य श्वसन वायरस फेफड़ों में संक्रमण का कारण बन सकते हैं। बैक्टीरियल इंफेक्शन वाले लोगों में फंगल संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है।
बैक्टीरियल इंफेक्शन: कुछ बैक्टीरिया फेफड़ों में संक्रमण पैदा कर सकते हैं, जिससे निमोनिया जैसी समस्या हो सकती है। इसमें तेज बुखार, लगातार खांसी और सीने में दर्द हो सकता है।
फंगल इंफेक्शन: कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में फंगल संक्रमण का खतरा अधिक हो सकता है। लंबे समय तक चलने वाली खांसी, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी इसके संभावित लक्षण हैं।
कमजोर इम्यून सिस्टम: डायबिटीज, लंबे समय से चल रही कुछ बीमारियों या कुछ दवाओं के कारण इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है, जिससे फेफड़ों में संक्रमण होने की संभावना बढ़ जाती है।
वायु प्रदूषण: लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है। इससे सांस की तकलीफ और अन्य श्वसन समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
धूल और केमिकल्स: कार्यस्थल पर धूल, धुआं, गैस या कुछ रसायनों के लगातार संपर्क में रहने से फेफड़ों में जलन और सूजन हो सकती है। लंबे समय तक संपर्क रहने पर फेफड़ों को नुकसान भी हो सकता है।
संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना: कुछ श्वसन संक्रमण संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या बात करने से निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकते हैं।
धूम्रपान न करने वालों में क्यों बढ़ रहा है फेफड़ों के संक्रमण का खतरा?
- फोटो : AI
लंग इंफेक्शन के लक्षण
खांसी, बलगम, बुखार, ठंड लगना, सांस फूलना, सीने में दर्द, थकान और कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में लक्षण हल्के होते हैं, जबकि गंभीर संक्रमण में सांस लेने में काफी परेशानी हो सकती है।
खांसी, बलगम, बुखार, ठंड लगना, सांस फूलना, सीने में दर्द, थकान और कमजोरी इसके सामान्य लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में लक्षण हल्के होते हैं, जबकि गंभीर संक्रमण में सांस लेने में काफी परेशानी हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
धूम्रपान न करने वालों में क्यों बढ़ रहा है फेफड़ों के संक्रमण का खतरा?
- फोटो : AI
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में तेज दर्द, भ्रम या होंठ/चेहरे पर नीलेपन जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में विशेष सावधानी जरूरी है।
अगर तेज बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में तेज दर्द, भ्रम या होंठ/चेहरे पर नीलेपन जैसे लक्षण हों, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में विशेष सावधानी जरूरी है।
विज्ञापन
धूम्रपान न करने वालों में क्यों बढ़ रहा है फेफड़ों के संक्रमण का खतरा?
- फोटो : AI
बचाव कैसे करें?
हाथों की स्वच्छता रखें, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में सावधानी बरतें, घर और कार्यस्थल में वेंटिलेशन अच्छा रखें, प्रदूषण और धूल के अनावश्यक संपर्क से बचें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी टीकाकरण कराएं।
-----------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
हाथों की स्वच्छता रखें, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में सावधानी बरतें, घर और कार्यस्थल में वेंटिलेशन अच्छा रखें, प्रदूषण और धूल के अनावश्यक संपर्क से बचें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी टीकाकरण कराएं।
-----------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।