ट्यूबरक्लोसिस यानी टीबी फेफड़ों की गंभीर संक्रामक बीमारी है, जो अकेले भारत में हर साल लगभग 3.2 लाख लोगों की मौत का कारण बनती है। भारत ने साल 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा था, हालांकि इसमें सफलता नहीं मिल पाई। जागरूकता और इलाज में सुधार के जरिए हाल के वर्षों में टीबी से होने वाली मृत्यु दर में 21% से 25% तक की कमी जरूर दर्ज की गई है।
Cough & TB: कैसे जानें कहीं आपकी खांसी टीबी का संकेत तो नहीं? कब हो जाना चाहिए अलर्ट
अगर आपकी खांसी दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी हुई है, वजन बिना वजह कम हो रहा है, रात में पसीना आता है या हल्का बुखार लगातार बना रहता है, तो यह टीबी का संकेत हो सकता है। कैसे जानें आपकी खांसी टीबी में बदल गई है?
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खांसी कब हो सकती है टीबी का संकेत?
टीबी का सबसे सामान्य लक्षण लगातार बनी रहने वाली खांसी है। भारत सरकार के राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी बनी रहे तो उसे टीबी की जांच करवाने की सलाह दी जाती है।
- खांसी के साथ अगर वजन कम हो रहा है, रात में ज्यादा पसीना आता है या हल्का बुखार बना रहता है, तो ये भी टीबी की ओर इशारा माना जाता है।
- ऐसे संकेतों को समझना और समय रहते जांच करवाना बेहद जरूरी है।
टीबी के अन्य लक्षणों पर भी दें ध्यान
सिर्फ खांसी होना ही टीबी नहीं है। इसके कई अन्य लक्षण भी होते हैं जो शरीर में संक्रमण की ओर संकेत करते हैं।
- लगातार हल्का बुखार, और बिना किसी कारण वजन कम होना टीबी का संकेत हो सकता है।
- शरीर संक्रमण से लड़ने में लगातार ऊर्जा खर्च करता रहता है इसलिए मरीज कों अक्सर थकान और कमजोरी महसूस होती रहती है।
- फेफड़ों की टीबी में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी और बलगम में खून आना भी देखा जा सकता है।
- यदि टीबी शरीर के अन्य अंगों में फैल जाए तो लक्षण उस अंग के अनुसार बदल सकते हैं।
किन लोगों को टीबी का ज्यादा खतरा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो टीबी किसी को भी हो सकती है, लेकिन जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
- एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों में टीबी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है।
- डायबिटीज या कुपोषण के शिकार के अलावा ज्यादा धूम्रपान करने वालों में भी जोखिम देखा जाता रहा है।
- छोटे बच्चों और बुजुर्गों में भी संक्रमण का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।