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नफरत की दुनिया में मोहब्बत ढूंढ रहे थे,
काँटों की नगरी में फूल ढूंढ रहे थे,
पैसों कि इस दुनिया में प्यार ढूंढ रहे थे,
धोखे की इस दुनिया में वफ़ा ढूंढ रहे थे,
ये दुनिया क्या है मुझे क्या पता.
मौत की भीड़ में ज़िन्दगी ढूंढ रहे थे।
मोहब्बत के भी कुछ अंदाज होते है,
जागती आँखो के भी कुछ ख्वाब होते है,
ज़रूरी नही के गम मे ही आँसू निकले,
मुस्कुराती आँखो मे भी सैलाब होते है।
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