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Rajasthan: 5वीं पास महिला सरपंच को राष्ट्रपति भवन से न्योता, 15 अगस्त पर दिल्ली में होंगी खास मेहमान
Thu, 13 Aug 2026 10:49 PM IST
बाड़मेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बाड़मेर
Published by: बाड़मेर ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 10:49 PM IST
सार
Rajasthan News: बाड़मेर के सीमांत हाथला गांव की सरपंच भूरी देवी को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ रिसेप्शन के लिए विशेष आमंत्रण मिला है। पांचवीं पास भूरी देवी को सीमा प्रबंधन, सरकारी योजनाओं की पहुंच, जल संरक्षण, बालिका शिक्षा और ग्रामीण विकास के कामों के लिए यह सम्मान मिला है।
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सरपंच भूरी देवी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के सीमांत गांव की एक महिला सरपंच को स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय कार्यक्रम में शामिल होने के लिए खास न्योता मिला है। हाथला गांव की पांचवीं पास सरपंच भूरी देवी को बेहतर सीमा प्रबंधन और ग्रामीण विकास कार्यों के लिए राष्ट्रपति भवन से विशेष तौर पर आमंत्रित किया गया है। राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिलने के बाद भूरी देवी के परिवार और जिलेभर के लोगों में खुशी का माहौल है।
पहली बार दिल्ली पहुंचीं भूरी देवी
हाथला गांव की सरपंच भूरी देवी गुरुवार को दिल्ली पहुंचीं। उन्हें 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ रिसेप्शन में अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है। नई दिल्ली पहुंचने पर सरपंच भूरी देवी का आईटीबीपी के अधिकारियों ने स्वागत किया।
सीमा से गांव के विकास तक, इन कामों ने दिलाया न्योता
सरपंच भूरी देवी को सीमावर्ती इलाके में सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, बेहतर सीमा प्रबंधन, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम, टांका निर्माण, पौधरोपण, बालिका शिक्षा और ग्रामीण विकास कार्यों के लिए राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिला है। वे देश के उन चुनिंदा सरपंचों में शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रपति भवन से विशेष निमंत्रण मिला है।
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दिल्ली में उन्हें प्रधानमंत्री संग्रहालय, वॉर मेमोरियल और नेशनल पुलिस मेमोरियल का भ्रमण भी कराया जाएगा। सीमावर्ती रेगिस्तानी गांव से राष्ट्रपति भवन तक का यह सफर पूरे बाड़मेर जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है।
स्कूल, पानी और सड़क को बनाया विकास का आधार
सरपंच भूरी देवी ने बताया कि विकास को प्राथमिकता देते हुए स्कूल, आवास, पानी के टांके और सड़क आदि के निर्माण पर काम किया। इसके साथ ही पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया। उन्होंने कहा कि गांव के विकास में उन्होंने अपनी ओर से कोई कमी नहीं रखी और जितने कार्य संभव हुए, उन्हें करवाने का प्रयास किया।
पांचवीं के बाद पढ़ाई छूटी, बेटों को सरकारी नौकरी तक पहुंचाया
भूरी देवी ने बताया कि वह केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ी हैं, क्योंकि पहले के समय में ज्यादा पढ़ाई नहीं करवाई जाती थी। पांचवीं तक पढ़ाई के बाद खेती-किसानी का काम किया और शादी के बाद भी खेती-बाड़ी करती रहीं। उन्होंने बताया कि ससुराल में सास-ससुर और पति पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने चारों बेटों को पढ़ाया। आज उनके सभी बेटे अलग-अलग सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं।
यह भी पढ़ें: 41 जिला परिषदों में आरक्षण की स्थिति स्पष्ट, हर संभाग में एक महिला जिला प्रमुख अनिवार्य
'हवाई जहाज से दिल्ली आना कभी नहीं सोचा था'
सरपंच भूरी देवी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह दिल्ली जाएंगी और वह भी हवाई जहाज से। उन्होंने कहा कि दिल्ली का नाम केवल सुना था। उनका गांव सीमा क्षेत्र में है, इसलिए उन्होंने सीमांत क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया।
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पहली बार दिल्ली पहुंचीं भूरी देवी
हाथला गांव की सरपंच भूरी देवी गुरुवार को दिल्ली पहुंचीं। उन्हें 15 अगस्त को राष्ट्रपति भवन में आयोजित ‘एट होम’ रिसेप्शन में अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया है। नई दिल्ली पहुंचने पर सरपंच भूरी देवी का आईटीबीपी के अधिकारियों ने स्वागत किया।
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सीमा से गांव के विकास तक, इन कामों ने दिलाया न्योता
सरपंच भूरी देवी को सीमावर्ती इलाके में सरकारी योजनाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, बेहतर सीमा प्रबंधन, वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम, टांका निर्माण, पौधरोपण, बालिका शिक्षा और ग्रामीण विकास कार्यों के लिए राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिला है। वे देश के उन चुनिंदा सरपंचों में शामिल हैं, जिन्हें राष्ट्रपति भवन से विशेष निमंत्रण मिला है।
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दिल्ली में उन्हें प्रधानमंत्री संग्रहालय, वॉर मेमोरियल और नेशनल पुलिस मेमोरियल का भ्रमण भी कराया जाएगा। सीमावर्ती रेगिस्तानी गांव से राष्ट्रपति भवन तक का यह सफर पूरे बाड़मेर जिले के लिए गर्व का विषय बन गया है।
स्कूल, पानी और सड़क को बनाया विकास का आधार
सरपंच भूरी देवी ने बताया कि विकास को प्राथमिकता देते हुए स्कूल, आवास, पानी के टांके और सड़क आदि के निर्माण पर काम किया। इसके साथ ही पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम किया। उन्होंने कहा कि गांव के विकास में उन्होंने अपनी ओर से कोई कमी नहीं रखी और जितने कार्य संभव हुए, उन्हें करवाने का प्रयास किया।
पांचवीं के बाद पढ़ाई छूटी, बेटों को सरकारी नौकरी तक पहुंचाया
भूरी देवी ने बताया कि वह केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ी हैं, क्योंकि पहले के समय में ज्यादा पढ़ाई नहीं करवाई जाती थी। पांचवीं तक पढ़ाई के बाद खेती-किसानी का काम किया और शादी के बाद भी खेती-बाड़ी करती रहीं। उन्होंने बताया कि ससुराल में सास-ससुर और पति पढ़े-लिखे नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अपने चारों बेटों को पढ़ाया। आज उनके सभी बेटे अलग-अलग सरकारी नौकरियों में कार्यरत हैं।
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'हवाई जहाज से दिल्ली आना कभी नहीं सोचा था'
सरपंच भूरी देवी ने कहा कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह दिल्ली जाएंगी और वह भी हवाई जहाज से। उन्होंने कहा कि दिल्ली का नाम केवल सुना था। उनका गांव सीमा क्षेत्र में है, इसलिए उन्होंने सीमांत क्षेत्र के विकास के लिए हर संभव प्रयास किया।