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बीकानेर: निकाय नतीजों ने बदले सियासी समीकरण, अब बोर्ड गठन में नेताओं की असली परीक्षा
Mon, 14 Sep 2026 09:42 PM IST
बीकानेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीकानेर
Published by: बीकानेर ब्यूरो
Updated Mon, 14 Sep 2026 09:42 PM IST
सार
बीकानेर की छह नगर पालिकाओं में कहीं भाजपा तो कहीं कांग्रेस और विकास मंच ने बढ़त बनाई है। नोखा में विकास मंच को स्पष्ट बहुमत मिला, जबकि श्रीडूंगरगढ़ और नापासर में बोर्ड गठन के लिए समर्थन जुटाना होगा।
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बीकानेर नगर निगम चुनाव परिणाम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जिले की छह नगर पालिकाओं के चुनाव परिणाम केवल जीत-हार तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने स्थानीय राजनीति में प्रभावशाली नेताओं की ताकत और संगठनात्मक पकड़ की भी नई तस्वीर पेश की है। कहीं भाजपा ने बहुमत के दम पर बोर्ड गठन का रास्ता साफ किया है तो कहीं कांग्रेस ने वापसी के संकेत दिए हैं। वहीं दो नगर पालिकाओं में सत्ता की चाबी अब ऐसे पार्षदों के हाथ में है जो चुनाव बाद के राजनीतिक समीकरण तय करेंगे।
नोखा में विकास मंच का फिर दबदबा
नोखा में विकास मंच ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। नगर पालिका की 45 सीटों में से 29 पर जीत दर्ज कर विकास मंच ने संकेत दिया कि स्थानीय राजनीति में उसकी पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है। भाजपा यहां अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी और 13 सीटों पर सिमट गई, जबकि तीन सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं।
श्रीडूंगरगढ़ में सत्ता की चाबी विकास मंच के हाथ
श्रीडूंगरगढ़ का जनादेश सबसे रोचक माना जा रहा है। कांग्रेस 15 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर है। भाजपा को 13 सीटें मिली हैं। विकास मंच के नौ पार्षद, माकपा का एक और दो निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका में हैं। अब नजर इस बात पर है कि विकास मंच किसका समर्थन करता है।
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नापासर में निर्दलीय बनेंगे किंगमेकर
नापासर में भी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। भाजपा 10 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा उससे दूर है। कांग्रेस को सात, निर्दलीयों को सात और आरएलपी को एक सीट मिली है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद सत्ता गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
खाजूवाला और लूणकरणसर में भाजपा आगे
खाजूवाला में भाजपा ने 14 सीटें जीतकर बढ़त बनाई है। कांग्रेस को चार और निर्दलीयों को दो सीटें मिली हैं। लूणकरणसर में भी भाजपा 16 सीटों के साथ आगे है। कांग्रेस को सात और अन्य व निर्दलीयों को 12 सीटें मिली हैं। देशनोक में कांग्रेस 13 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। भाजपा को 10 और अन्य को दो सीटें मिली हैं। वहीं नोखा में विकास मंच का प्रदर्शन जिले में सबसे प्रभावशाली रहा।
अब नेताओं के सामने बोर्ड गठन की चुनौती
परिणामों के बाद अब निगाहें जनप्रतिनिधियों पर टिक गई हैं। श्रीडूंगरगढ़ में विधायक ताराचंद सारस्वत और नापासर क्षेत्र में मंत्री सुमित गोदारा के लिए बोर्ड गठन बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। चुनावी लड़ाई खत्म हो चुकी है, लेकिन सत्ता के समीकरण साधने की असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है।
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नोखा में विकास मंच का फिर दबदबा
नोखा में विकास मंच ने एक बार फिर अपना दबदबा साबित करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। नगर पालिका की 45 सीटों में से 29 पर जीत दर्ज कर विकास मंच ने संकेत दिया कि स्थानीय राजनीति में उसकी पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है। भाजपा यहां अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी और 13 सीटों पर सिमट गई, जबकि तीन सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं।
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श्रीडूंगरगढ़ में सत्ता की चाबी विकास मंच के हाथ
श्रीडूंगरगढ़ का जनादेश सबसे रोचक माना जा रहा है। कांग्रेस 15 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत से दूर है। भाजपा को 13 सीटें मिली हैं। विकास मंच के नौ पार्षद, माकपा का एक और दो निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में निर्णायक भूमिका में हैं। अब नजर इस बात पर है कि विकास मंच किसका समर्थन करता है।
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नापासर में निर्दलीय बनेंगे किंगमेकर
नापासर में भी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। भाजपा 10 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, लेकिन बहुमत का आंकड़ा उससे दूर है। कांग्रेस को सात, निर्दलीयों को सात और आरएलपी को एक सीट मिली है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद सत्ता गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
खाजूवाला और लूणकरणसर में भाजपा आगे
खाजूवाला में भाजपा ने 14 सीटें जीतकर बढ़त बनाई है। कांग्रेस को चार और निर्दलीयों को दो सीटें मिली हैं। लूणकरणसर में भी भाजपा 16 सीटों के साथ आगे है। कांग्रेस को सात और अन्य व निर्दलीयों को 12 सीटें मिली हैं। देशनोक में कांग्रेस 13 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। भाजपा को 10 और अन्य को दो सीटें मिली हैं। वहीं नोखा में विकास मंच का प्रदर्शन जिले में सबसे प्रभावशाली रहा।
अब नेताओं के सामने बोर्ड गठन की चुनौती
परिणामों के बाद अब निगाहें जनप्रतिनिधियों पर टिक गई हैं। श्रीडूंगरगढ़ में विधायक ताराचंद सारस्वत और नापासर क्षेत्र में मंत्री सुमित गोदारा के लिए बोर्ड गठन बड़ी चुनौती बनकर सामने आया है। चुनावी लड़ाई खत्म हो चुकी है, लेकिन सत्ता के समीकरण साधने की असली परीक्षा अब शुरू होने वाली है।