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Rajasthan: सफलता, राजनीति और फिर अध्यात्म...; आखिर क्यों 'चायवालाज' के युवा संस्थापक ने उठाया आत्मघाती कदम?
Sun, 02 Aug 2026 11:46 AM IST
दौसा ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दौसा
Published by: दौसा ब्यूरो
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:46 AM IST
सार
दौसा के चर्चित युवा उद्यमी और 'चायवालाज' स्टार्टअप के संस्थापक रोहित शर्मा ने आत्महत्या कर ली। वे वर्ष 2024 के विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी भी थे। छह महीने पहले उन्होंने अपना स्टार्टअप बंद कर अध्यात्म का मार्ग अपना लिया था। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आत्महत्या के कारणों का अभी खुलासा नहीं हुआ है।
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मृत रोहित शर्मा
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
दौसा जिला मुख्यालय के सैंथल मोड़ स्थित 80 फीट रोड पर क्षेत्र के चर्चित युवा उद्यमी और 'चायवालाज' स्टार्टअप के संस्थापक रोहित शर्मा ने आत्महत्या कर ली। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने दरवाजा तोड़कर उन्हें नीचे उतारा और जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कोतवाली थाना पुलिस के अनुसार, साकेत कॉलोनी निवासी 30 वर्षीय रोहित शर्मा ने आत्महत्या की है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। फिलहाल आत्महत्या के कारणों का खुलासा नहीं हो पाया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल पर पहुंच गए। पूरे शहर और आसपास के क्षेत्रों में इस घटना की चर्चा होती रही।
पिता चलाते हैं मेडिकल स्टोर, पत्नी हैं निजी स्कूल में शिक्षिका
रोहित के पिता हितेंद्र मोहन शर्मा मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं। उनकी पत्नी एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। परिवार में उनका करीब सात वर्षीय बेटा भी है।
निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भरा था नामांकन
रोहित शर्मा ने वर्ष 2024 में हुए दौसा विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने चुनाव प्रचार भी शुरू किया था, हालांकि बाद में चुनावी दौड़ से हट गए थे।
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17 साल की उम्र में शुरू किया था 'चायवालाज' स्टार्टअप
रोहित युवावस्था से ही चर्चा में रहे। 17 वर्ष की उम्र में नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने 'चायवालाज' नाम से जयपुर में स्टार्टअप की शुरुआत की। इसके साथ ही दौसा शहर में मिशन हेल्पलाइन के माध्यम से सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने जयपुर के मानसरोवर स्थित शिप्रा पथ पर पहला चाय कैफे शुरू किया। इसके बाद जयपुर में एक और आउटलेट खोला। अन्य शहरों सहित उन्होंने कुल सात 'चायवालाज' आउटलेट स्थापित किए।
छह महीने पहले स्टार्टअप बंद कर अध्यात्म की ओर हुए अग्रसर
करीब छह महीने पहले रोहित शर्मा ने अपने सभी 'चायवालाज' आउटलेट बंद कर दिए थे। इसके बाद उन्होंने अध्यात्म की राह पकड़ ली। वे धार्मिक स्थलों पर जाने लगे और आध्यात्मिक विषयों पर कई पुस्तकें भी लिखीं। उनकी पुस्तक 'तत्सुखे सुखित्वं' को बेस्टसेलर बताया जाता है। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना नाम भी रोहित शिवोहम कर लिया था।
नेशनल अवॉर्ड से भी हुए थे सम्मानित
रोहित शर्मा को करीब चार वर्ष पहले 'चायवालाज' स्टार्टअप के लिए नेशनल MSME अवॉर्ड्स 2022 फॉर बिजनेस एक्सीलेंस श्रेणी में सम्मानित किया गया था। यह सम्मान ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम की ओर से प्रदान किया गया था। इसके अलावा सफल स्टार्टअप स्थापित करने के लिए उन्हें कई संस्थाओं ने सम्मानित किया था।
आत्महत्या के कारणों की जांच जारी
रोहित शर्मा ने इतना कठोर कदम किन परिस्थितियों में उठाया, इसका स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं, इसकी भी पुलिस जांच कर रही है। कोतवाली थाना पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से निष्पक्ष जांच की जा रही है।
ये भी पढ़ें- गर्भवती हत्याकांड में बड़ा फैसला: 24 घंटे बाद धरना समाप्त, 21 लाख मुआवजा और फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा केस
लोगों के मन में एक ही सवाल
जिला मुख्यालय ही नहीं, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग स्तब्ध हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने रोहित को हमेशा खुशमिजाज देखा था। वह आर्थिक रूप से भी संपन्न थे और कभी किसी परेशानी का जिक्र नहीं करते थे। ऐसे में लोगों के मन में यही सवाल है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी, जिसने उन्हें इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
युवाओं के मार्गदर्शक माने जाते थे रोहित शर्मा
रोहित शर्मा अपने 'चायवालाज' स्टार्टअप और सामाजिक गतिविधियों के कारण युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और बाद में राजनीति में भी सक्रिय हुए। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाकर अध्यात्म का मार्ग अपना लिया।
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पिता चलाते हैं मेडिकल स्टोर, पत्नी हैं निजी स्कूल में शिक्षिका
रोहित के पिता हितेंद्र मोहन शर्मा मेडिकल स्टोर संचालित करते हैं। उनकी पत्नी एक निजी स्कूल में शिक्षिका हैं। परिवार में उनका करीब सात वर्षीय बेटा भी है।
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निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भरा था नामांकन
रोहित शर्मा ने वर्ष 2024 में हुए दौसा विधानसभा उपचुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किया था। उन्होंने चुनाव प्रचार भी शुरू किया था, हालांकि बाद में चुनावी दौड़ से हट गए थे।
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17 साल की उम्र में शुरू किया था 'चायवालाज' स्टार्टअप
रोहित युवावस्था से ही चर्चा में रहे। 17 वर्ष की उम्र में नर्सिंग की पढ़ाई के दौरान उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने 'चायवालाज' नाम से जयपुर में स्टार्टअप की शुरुआत की। इसके साथ ही दौसा शहर में मिशन हेल्पलाइन के माध्यम से सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहे। उन्होंने जयपुर के मानसरोवर स्थित शिप्रा पथ पर पहला चाय कैफे शुरू किया। इसके बाद जयपुर में एक और आउटलेट खोला। अन्य शहरों सहित उन्होंने कुल सात 'चायवालाज' आउटलेट स्थापित किए।
छह महीने पहले स्टार्टअप बंद कर अध्यात्म की ओर हुए अग्रसर
करीब छह महीने पहले रोहित शर्मा ने अपने सभी 'चायवालाज' आउटलेट बंद कर दिए थे। इसके बाद उन्होंने अध्यात्म की राह पकड़ ली। वे धार्मिक स्थलों पर जाने लगे और आध्यात्मिक विषयों पर कई पुस्तकें भी लिखीं। उनकी पुस्तक 'तत्सुखे सुखित्वं' को बेस्टसेलर बताया जाता है। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना नाम भी रोहित शिवोहम कर लिया था।
नेशनल अवॉर्ड से भी हुए थे सम्मानित
रोहित शर्मा को करीब चार वर्ष पहले 'चायवालाज' स्टार्टअप के लिए नेशनल MSME अवॉर्ड्स 2022 फॉर बिजनेस एक्सीलेंस श्रेणी में सम्मानित किया गया था। यह सम्मान ग्लोबल इंडिया बिजनेस फोरम की ओर से प्रदान किया गया था। इसके अलावा सफल स्टार्टअप स्थापित करने के लिए उन्हें कई संस्थाओं ने सम्मानित किया था।
आत्महत्या के कारणों की जांच जारी
रोहित शर्मा ने इतना कठोर कदम किन परिस्थितियों में उठाया, इसका स्पष्ट कारण अभी सामने नहीं आया है। घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट मिला है या नहीं, इसकी भी पुलिस जांच कर रही है। कोतवाली थाना पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से निष्पक्ष जांच की जा रही है।
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लोगों के मन में एक ही सवाल
जिला मुख्यालय ही नहीं, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोग स्तब्ध हैं। लोगों का कहना है कि उन्होंने रोहित को हमेशा खुशमिजाज देखा था। वह आर्थिक रूप से भी संपन्न थे और कभी किसी परेशानी का जिक्र नहीं करते थे। ऐसे में लोगों के मन में यही सवाल है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति बनी, जिसने उन्हें इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
युवाओं के मार्गदर्शक माने जाते थे रोहित शर्मा
रोहित शर्मा अपने 'चायवालाज' स्टार्टअप और सामाजिक गतिविधियों के कारण युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय थे। उन्होंने उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई और बाद में राजनीति में भी सक्रिय हुए। हालांकि, कुछ समय बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाकर अध्यात्म का मार्ग अपना लिया।