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Hanumangarh: नोहर में मिली प्राचीन मूर्तियों की जांच अधूरी, बिना बताए जैन समाज ने मरम्मत के लिए बुलाए कारीगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हनुमानगढ़
Published by: हनुमानगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 22 Nov 2024 09:37 PM IST
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सार
हनुमानगढ़ जिले के नोहर तहसील के ढीलकी जाटान गांव में 6 माह पहले खुदाई के दौरान मिली दो प्राचीन मूर्तियों की जांच अभी तक पूरी नहीं हुई है। जैन समाज की ओर से मूर्तियों के संरक्षण की पहल की गई है, लेकिन पुरातत्व विभाग की विस्तृत रिपोर्ट और आधिकारिक निर्णय अब भी लंबित है।
हनुमानगढ़ के नोहर में खेत में निकली प्राचीन मूर्तियां।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हनुमानगढ़ जिले के नोहर तहसील के गांव ढीलकी जाटान में करीब 6 माह पहले खुदाई में निकली प्राचीन मूर्तियों की जांच होनी अभी बाकी है, लेकिन जैन समाज की ओर से भटनेर दुर्ग में रखी गई मूर्ति की मरम्मत के लिए कारीगर को भी बुला लिया गया है। हालांकि अभी इसकी सूचना पुरातत्व विभाग तक नहीं पहुंची है।
बता दें कि प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम,1958 की धारा 6 के तहत कलेक्टर के पास पुरावशेष की स्थापना, अनुरक्षण, संस्मारक की अभिरक्षा आदि की शक्तियां होती हैं। पुरातत्व विभाग की जारी रिपोर्ट के बाद कलेक्टर ने इन मूर्तियों को लेकर अहम निर्णय लेता है। इसकी सूचना केंद्र सरकार को भी दी जाती है।
यह था मूर्तियों का पूरा मामला
28 मई 2024 को नोहर क्षेत्र के गांव ढिलकी जाटान में किसान भूप सिंह बुडानिया को खेत में बिजाई के दौरान ये मूर्तियां मिली थीं। जब वह ट्रैक्टर चलाकर जमीन को समतल किया जा रहा था तभी कुछ पत्थरों के टकराने की आवाज आई। उन्होंने मिट्टी को हटाकर देखा तो करीब 4 फुट गहराई में ये दो मूर्तियां निकलीं थी। जब इन मूर्तियों को ले जाने के लिए विभिन्न समुदाय आगे आए तो विवाद बढ़ते देख गोगामेड़ी पुलिस ने मूर्ति को अपनी कस्टडी में रख लिया। मूर्तियों को पुलिस सुरक्षा दिलाने के बाद कलेक्टर ने ही इनकी जांच करने के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा था।
क्यों जरूरी है मूर्तियों की जांच
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के शिल्प शास्त्र और प्रतिमा शास्त्र के अनुसार इन मूर्तियों पर बने पहचान चिन्हों की एक विस्तृत रिपोर्ट बनाई जाएगी। अगर इसमें कोई देवी देवताओं के चिह्न उकेरे गए हैं तो उनका अंकन किया जाएगा। इसी तरह मूर्ति की कला शैली, मूर्ति पर बने जीव जंतुओं सहित सभी मुद्राओं के आधार पर एक पूरी रिपोर्ट बनाई जाएगी। मूर्ति किस भगवान और काल से जुड़ी है, इसकी सभी जानकारी रिपोर्ट में दर्ज होगी। मूर्तियों की जांच के लिए पत्र लिखा है, रखरखाव के लिए रखा है।
दोबारा जांच करने के लिए लिखा पत्र
ज़िला कलेक्टर कानाराम ने बताया कि नोहर में मिली मूर्तियों को थाने से निकलवा कर एक बार के लिए भटनेर दुर्ग और नोहर मंदिर में रखवाया गया था, ताकि इनकी बेअदबी न हो और अच्छे से रखरखाव किया जा सके। हमने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को इन मूर्तियों की दोबारा जांच करने के लिए पत्र लिखा है। जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा कि इन मूर्तियों की सही जगह कहां होगी। करीब 6 माह पहले नोहर के गांव ढीलकी जाटान से खुदाई में निकली 2 प्राचीन मूर्तियों में से एक को भटनेर दुर्ग स्थित प्राचीन जैन मंदिर में रखवाया गया है। वहीं अन्य दूसरी मूर्ति को भादरा के स्थानीय मंदिर में रखवाया गया है। इससे पहले यह पुलिस थाने में रखी गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अभी इन मूर्तियों की जांच के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र भी लिखा गया है।
मूर्तियां को लेकर हो चुका है विवाद
बता दें कि जुलाई में जोधपुर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम इन मूर्तियों की गहन जांच कर चुकी है। इसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर को भेजी जानी थी। ताजा जानकारी के अनुसार अब कलेक्टर ने एक बार फिर इन मूर्तियों की जांच करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए पत्र भेजा है। विदित रहे कि खेत में प्राचीन मूर्तियां मिलने की सूचना के बाद भीड़ जमा हो गई थी। नोहर, भादरा सहित आसपास के क्षेत्रों से जैन समाज के लोग पहुंचे और इन मूर्तियां को ले जाने की बात को लेकर विवाद भी हुआ। कोई इसे भगवान महावीर,कोई भगवान बुद्ध तो कोई पार्श्वनाथ की मूर्तियां बता रहा था। विडंबना यह है कि 6 माह बीत जाने के बावजूद अभी तक इनकी जांच नहीं हो सकी है कि क्या ये मूर्तियां वाकई प्राचीन हैं या फिर महज कुछ ही वर्षों पुरानी है।
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बता दें कि प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम,1958 की धारा 6 के तहत कलेक्टर के पास पुरावशेष की स्थापना, अनुरक्षण, संस्मारक की अभिरक्षा आदि की शक्तियां होती हैं। पुरातत्व विभाग की जारी रिपोर्ट के बाद कलेक्टर ने इन मूर्तियों को लेकर अहम निर्णय लेता है। इसकी सूचना केंद्र सरकार को भी दी जाती है।
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यह था मूर्तियों का पूरा मामला
28 मई 2024 को नोहर क्षेत्र के गांव ढिलकी जाटान में किसान भूप सिंह बुडानिया को खेत में बिजाई के दौरान ये मूर्तियां मिली थीं। जब वह ट्रैक्टर चलाकर जमीन को समतल किया जा रहा था तभी कुछ पत्थरों के टकराने की आवाज आई। उन्होंने मिट्टी को हटाकर देखा तो करीब 4 फुट गहराई में ये दो मूर्तियां निकलीं थी। जब इन मूर्तियों को ले जाने के लिए विभिन्न समुदाय आगे आए तो विवाद बढ़ते देख गोगामेड़ी पुलिस ने मूर्ति को अपनी कस्टडी में रख लिया। मूर्तियों को पुलिस सुरक्षा दिलाने के बाद कलेक्टर ने ही इनकी जांच करने के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र लिखा था।
क्यों जरूरी है मूर्तियों की जांच
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के शिल्प शास्त्र और प्रतिमा शास्त्र के अनुसार इन मूर्तियों पर बने पहचान चिन्हों की एक विस्तृत रिपोर्ट बनाई जाएगी। अगर इसमें कोई देवी देवताओं के चिह्न उकेरे गए हैं तो उनका अंकन किया जाएगा। इसी तरह मूर्ति की कला शैली, मूर्ति पर बने जीव जंतुओं सहित सभी मुद्राओं के आधार पर एक पूरी रिपोर्ट बनाई जाएगी। मूर्ति किस भगवान और काल से जुड़ी है, इसकी सभी जानकारी रिपोर्ट में दर्ज होगी। मूर्तियों की जांच के लिए पत्र लिखा है, रखरखाव के लिए रखा है।
दोबारा जांच करने के लिए लिखा पत्र
ज़िला कलेक्टर कानाराम ने बताया कि नोहर में मिली मूर्तियों को थाने से निकलवा कर एक बार के लिए भटनेर दुर्ग और नोहर मंदिर में रखवाया गया था, ताकि इनकी बेअदबी न हो और अच्छे से रखरखाव किया जा सके। हमने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को इन मूर्तियों की दोबारा जांच करने के लिए पत्र लिखा है। जांच रिपोर्ट के बाद ही पता चलेगा कि इन मूर्तियों की सही जगह कहां होगी। करीब 6 माह पहले नोहर के गांव ढीलकी जाटान से खुदाई में निकली 2 प्राचीन मूर्तियों में से एक को भटनेर दुर्ग स्थित प्राचीन जैन मंदिर में रखवाया गया है। वहीं अन्य दूसरी मूर्ति को भादरा के स्थानीय मंदिर में रखवाया गया है। इससे पहले यह पुलिस थाने में रखी गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार अभी इन मूर्तियों की जांच के लिए पुरातत्व विभाग को पत्र भी लिखा गया है।
मूर्तियां को लेकर हो चुका है विवाद
बता दें कि जुलाई में जोधपुर से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम इन मूर्तियों की गहन जांच कर चुकी है। इसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर कलेक्टर को भेजी जानी थी। ताजा जानकारी के अनुसार अब कलेक्टर ने एक बार फिर इन मूर्तियों की जांच करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए पत्र भेजा है। विदित रहे कि खेत में प्राचीन मूर्तियां मिलने की सूचना के बाद भीड़ जमा हो गई थी। नोहर, भादरा सहित आसपास के क्षेत्रों से जैन समाज के लोग पहुंचे और इन मूर्तियां को ले जाने की बात को लेकर विवाद भी हुआ। कोई इसे भगवान महावीर,कोई भगवान बुद्ध तो कोई पार्श्वनाथ की मूर्तियां बता रहा था। विडंबना यह है कि 6 माह बीत जाने के बावजूद अभी तक इनकी जांच नहीं हो सकी है कि क्या ये मूर्तियां वाकई प्राचीन हैं या फिर महज कुछ ही वर्षों पुरानी है।