राजस्थान निकाय चुनाव: बीजेपी का बड़ा दांव, ज्योति खंडेलवाल समेत कई दिग्गजों को टिकट, कुसुम यादव का पत्ता साफ
राजस्थान में निकाय चुनाव के नामांकन का आज आखिरी दिन है। बगावत की आशंका के चलते बीजेपी ने प्रत्याशियों की सूची गोपनीय रखी। देर रात फोन पर टिकट तय हुए, आज सिंबल सीधे आरओ कार्यालय में जमा होंगे।
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जयपुर नगर निगम के निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों के भीतर घमासान मचा हुआ है। 30 अगस्त तक दोनों पार्टियां बड़े पैमाने पर अपनी प्रत्याशी सूचियां जारी नहीं कर पाईं। नामांकन दाखिल करने का सोमवार को अंतिम दिन है और बगावत की आशंका के चलते भाजपा ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पार्टी ने कई बड़े और चर्चित नेताओं को भी इस बार वार्ड चुनाव के मैदान में उतार दिया है, लेकिन अधिकृत प्रत्याशियों के नाम अंतिम समय तक सार्वजनिक करने से परहेज किया जा रहा है।
भाजपा ने कई बड़े चेहरों को वार्ड चुनाव में उतारा
भाजपा ने कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुईं पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को वार्ड नंबर 110 से टिकट दिया है। वहीं पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को वार्ड नंबर 112 से मैदान में उतारा गया है। खास बात यह है कि इसी वार्ड से भाजपा की निवर्तमान मेयर कुसुम यादव ने पिछला चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार उनका टिकट काट दिया गया है।
पार्टी ने वार्ड नंबर 121 से कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए निवर्तमान पार्षद नीरज अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। वहीं वार्ड नंबर 89 से नगर निगम के पूर्व चेयरमैन भवानी सिंह राजावत को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया है। इसके अलावा वार्ड नंबर 12 से निवर्तमान पार्षद रश्मि सैनी के पति राजेंद्र सैनी को भी भाजपा ने चुनाव मैदान में उतारा है। इन नामों के जरिए भाजपा ने स्थानीय स्तर पर अपने मजबूत राजनीतिक और संगठनात्मक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। जयपुर शहर भाजपा के अध्यक्ष रह चुके शैलेंद्र भार्गव को भी पार्टी ने वार्ड नंबर 43 से अपना प्रत्याशी बनाया है।
बगावत के डर से नाम आखिरी समय तक रखे गए गोपनीय
निकाय चुनाव में टिकट को लेकर कांग्रेस और भाजपा के भीतर स्थिति ऐसी बनी कि 30 अगस्त तक दोनों पार्टियां बड़े पैमाने पर प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं कर पाईं। सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन होने के कारण अब दोनों दलों के सामने बगावत रोकने की चुनौती है। जयपुर स्थित भाजपा कार्यालय में रविवार को टिकट बंटवारे को लेकर कई दौर की बैठकें चलीं। तय किया गया कि सोमवार को भाजपा के अधिकृत उम्मीदवारों के नाम सीधे रिटर्निंग ऑफिसर यानी आरओ के सामने सिंबल जमा होने के साथ सामने आएंगे।
सूत्रों के अनुसार, बगावत के डर ने भाजपा को प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक करने से रोक दिया। जिस प्रत्याशी का टिकट फाइनल किया गया है, उसे पहले ही संदेश भेजे जाने की रणनीति अपनाई गई है। इसके बाद अंतिम समय में नामांकन दाखिल कराया जाएगा, ताकि बगावत की गुंजाइश कम से कम रहे। पार्टी की कोशिश है कि टिकट से नाराज दावेदारों को निर्दलीय या किसी दूसरे दल के टिकट पर नामांकन दाखिल करने का मौका न मिले। इसी वजह से भाजपा ने प्रत्याशियों के नामों को सार्वजनिक करने के बजाय पूरी प्रक्रिया को गोपनीय रखा है।
देर रात तक फोन पर तय होते रहे प्रत्याशियों के नाम
भाजपा प्रदेश कार्यालय में रविवार को जयपुर नगर निगम समेत विभिन्न निकायों के वार्डों के टिकट को लेकर कई दौर में मंथन हुआ। कई सीटों पर विधायकों की पसंद, संगठन की राय और पार्टी सर्वे की रिपोर्ट अलग-अलग होने के कारण अंतिम फैसला करना आसान नहीं रहा। ऐसे में कुछ नामों पर बैठक में फैसला करने के बजाय फोन पर ही सहमति बनाने और अंतिम निर्णय लेने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। स्थानीय स्तर पर टिकट के दावेदारों को भी अंतिम क्षण तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पार्टी की ओर से किसे उम्मीदवार बनाया जा रहा है।
150 वार्डों पर चर्चा, तीन बार स्थगित हुई बैठक
जयपुर में 150 वार्डों को लेकर हुई चर्चा के दौरान कई बार सहमति नहीं बन पाई। इसके चलते बैठक को तीन बार स्थगित करना पड़ा। कुछ विधायकों ने अपने विधानसभा क्षेत्रों के वार्डों में एकल नामों पर टिकट देने की पैरवी की, जबकि संगठन और सर्वे रिपोर्ट में कई वार्डों के लिए अलग-अलग नाम सामने रखे गए।
विधायक की पसंद बनाम संगठन का फीडबैक
टिकट वितरण में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती स्थानीय राजनीतिक समीकरण और संगठनात्मक फीडबैक के बीच संतुलन बनाने की रही। कुछ विधायकों ने अधिकांश वार्डों में अपनी पसंद के एकल नाम पार्टी के सामने रखे। वहीं संगठन प्रभारियों और आंतरिक सर्वे में कुछ सीटों पर दूसरे दावेदारों को मजबूत बताया गया। इसी वजह से कई वार्डों में अंतिम निर्णय को लेकर खींचतान बनी रही। पार्टी नेतृत्व ने केवल विधायक की पसंद को आधार बनाने के बजाय जीत की संभावना, स्थानीय समीकरण, संगठन की रिपोर्ट और सर्वे के नतीजों को भी टिकट चयन का आधार बनाया।
खाली सिंबल लेटर पहले ही जिलों तक पहुंचाए गए
भाजपा ने बगावत की आशंका को देखते हुए टिकट वितरण की पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय रखा है। पार्टी की ओर से जिला प्रभारियों को खाली सिंबल लेटर पहले ही उपलब्ध करा दिए गए हैं। रविवार देर रात अधिकृत ई-मेल के जरिए अंतिम प्रत्याशी सूची संबंधित जिला प्रभारियों को भेजे जाने की प्रक्रिया तय की गई। इसके बाद जिला प्रभारी अधिकृत प्रत्याशी का नाम सिंबल लेटर पर दर्ज कर पार्टी के जरूरी दस्तावेजों के साथ सोमवार को संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में जमा कराएंगे। जिला अध्यक्ष और संबंधित विधायक को भी प्रत्याशी के नाम की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद स्थानीय स्तर पर संबंधित उम्मीदवार को टिकट फाइनल होने की सूचना दी जाएगी। इस पूरी रणनीति का मकसद अंतिम समय तक प्रत्याशियों के नाम छिपाकर टिकट के इच्छुक दावेदारों की संभावित बगावत को रोकना और पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों का नामांकन सुरक्षित कराना है।