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अदालत ने सुनाई सजा: बाइक छोड़ने के बदले मांगी रिश्वत, महिला एएसआई को 3 साल की जेल; 500 रुपये लेते पकड़ी गई थी

Wed, 02 Sep 2026 03:51 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Wed, 02 Sep 2026 03:51 PM IST
सार

बांदीकुई थाने की तत्कालीन महिला एएसआई ललिता शर्मा को रिश्वतखोरी के मामले में तीन साल की जेल और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा हुई। अदालत ने रिश्वत मांगने और 500 रुपये लेने के साक्ष्यों को पर्याप्त माना।

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Court sentences female ASI to 3 years in jail for demanding bribe to release a motorcycle news in hindi
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मामलों की विशेष अदालत के न्यायाधीश राजेश दडिया ने रिश्वतखोरी के पांच साल पुराने मामले में बांदीकुई थाने की तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) ललिता शर्मा को दोषी ठहराते हुए तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी महिला पुलिस अधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

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बाइक छोड़ने के एवज में मांगी थी रिश्वत
मामला अलवर जिले के रैणी निवासी हरिओम शर्मा की शिकायत से जुड़ा है। हरिओम ने 12 मार्च 2021 को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि बांदीकुई थाने में तैनात एएसआई ललिता शर्मा दुर्घटनाग्रस्त बाइक को छोड़ने और हादसे के लिए जिम्मेदार दूसरे वाहन को जब्त करने के बदले रिश्वत मांग रही थीं। शिकायत मिलने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामले का सत्यापन कराया। जांच में दो हजार रुपये रिश्वत मांगने की बात सामने आई। सत्यापन के दौरान ही महिला अधिकारी द्वारा शिकायतकर्ता से 500 रुपये लेने की बात भी सामने आई।

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पूरी रकम बरामद नहीं हुई, फिर भी दोषी करार
सत्यापन के बाद ब्यूरो ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई। बची हुई 1,500 रुपये की राशि पर फेनोफ्थलीन पाउडर लगाया गया, लेकिन कार्रवाई के दौरान यह राशि मौके से बरामद नहीं हो सकी। इसके बावजूद मामले की सुनवाई अदालत में जारी रही।

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि पूरी रिश्वत राशि बरामद नहीं होने से आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती, क्योंकि रिश्वत मांगने और शिकायतकर्ता से 500 रुपये लेने के पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अदालत ने अभियोजन पक्ष के तर्कों और साक्ष्यों को स्वीकार करते हुए एएसआई ललिता शर्मा को दोषी ठहराया और तीन साल के कारावास के साथ 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। मामले में राज्य सरकार की ओर से सहायक निदेशक अभियोजन मंजुला जैन ने पैरवी की।

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